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बिन PhD भी बन सकते हैं प्रोफेसर! मालिनी अवस्थी बनीं मिसाल, जानें क्या है Professor of Practice?

अब डिग्री नहीं, अनुभव दिलाएगा प्रोफेसर बनने का मौका. मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी की नियुक्ति से समझिए क्या है ‘Professor of Practice’ और कैसे आप भी बन सकते हैं प्रोफेसर.

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  • बिना PhD-NET के भी अब प्रोफेसर बनने का अवसर प्राप्त होगा.
  • मालिनी अवस्थी ‘Professor of Practice’ के रूप में नियुक्त हुईं.
  • इस पद के लिए 15 साल का अनुभव आवश्यक है.
  • छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव और विशेषज्ञता मिलेगी.

आज के दौर में पढ़ाई का मतलब सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रह गया है. अब छात्रों को असली दुनिया के कामकाज के लिए तैयार करना भी जरूरी हो गया है. इसी सोच के साथ एक नई पहल सामने आई है, जिसके तहत बिना PhD और NET जैसी डिग्री के भी लोग विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बन सकते हैं. हाल ही में मशहूर लोक गायिका मालिनी अवस्थी को ‘Professor of Practice’ के रूप में नियुक्त किया गया है, जिससे इस नई व्यवस्था को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है. 

मालिनी अवस्थी बनीं नई मिसाल

लोक संगीत की दुनिया में बड़ा नाम बना चुकीं मालिनी अवस्थी को मेरठ की यूनिवर्सिटी में ‘Professor of Practice’ के रूप में नियुक्त किया गया है. उनके पास सालों का अनुभव है और उन्होंने अपनी कला से देश-विदेश में पहचान बनाई है. उनकी नियुक्ति से छात्रों को किताबों के साथ-साथ असली मंच का अनुभव भी मिलेगा. यानी अब पढ़ाई सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्रैक्टिकल भी उतना ही जरूरी होगा. 

क्या है ‘Professor of Practice’?

‘Professor of Practice’ एक ऐसा पद है, जिसे खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया गया है जो अपने क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे हैं और उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान हासिल किया है. ऐसे लोगों के पास जरूरी नहीं कि PhD या NET जैसी पारंपरिक डिग्रियां हों, लेकिन उनके अनुभव को ही उनकी सबसे बड़ी योग्यता माना जाता है.इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह है कि छात्रों को सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि असली दुनिया के अनुभव से भी जोड़ा जाए. इससे पढ़ाई का स्तर और उपयोगिता दोनों बेहतर होते हैं.

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कौन बन सकता है ऐसा प्रोफेसर?

इस पद के लिए सबसे जरूरी चीज है अनुभव. अगर किसी के पास अपने क्षेत्र में करीब 15 साल का अनुभव है, तो वह इसके लिए योग्य हो सकता है. चाहे आप कला, मीडिया, बिजनेस, साइंस या किसी भी फील्ड से हों, अगर आप अपने काम के एक्सपर्ट हैं तो आपके लिए यह मौका खुला है. 

क्यों शुरू की गई यह पहल?

अक्सर देखा जाता है कि छात्र किताबों से पढ़ाई तो कर लेते हैं, लेकिन असली काम करने में उन्हें दिक्कत आती है इसी गैप को खत्म करने के लिए यह पहल शुरू की गई है. इसका मकसद है कि छात्रों को इंडस्ट्री से जुड़ी असली जानकारी मिले और वे नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें. 

छात्रों को क्या फायदा मिलेगा?

  • सबसे बड़ा फायदा यह है कि छात्रों को सीधे एक्सपर्ट्स से सीखने का मौका मिलेगा.
  • उन्हें वही चीजें सिखाई जाएंगी जो नौकरी में काम आती हैं.साथ ही इंटर्नशिप और जॉब के मौके भी बढ़ जाएंगे.
  • इसके अलावा नए आइडिया और स्टार्टअप की सोच भी मजबूत होगी.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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