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टेक्नोलॉजी पर सवार आधुनिक शिक्षा और परीक्षा प्रबंधन का नया दौर

पूरी परीक्षा व्यवस्था में टेक्नोलॉजी का उपयोग करें तो परीक्षाओं की योजना बनाना और समय से सुनिश्चित करना आसान होता है, क्योंकि सारा काम ऑनलाइन होता है.

2020 और 2021 में महामारी के चलते सदियों से चली आ रही लिखित परीक्षा के सामने सवालिया निशान लग गए. शिक्षा जगत पूरी तरह से असमंजस में पड़ गया. हालांकि, हम इस कठिन दौर से निकल रहे हैं और महामारी से पहले की जिन्दगी बहाल हो रही है. लेकिन पढ़ाई में हुई कमी की भरपाई करने में समय लगेगा और इसमें टेक्नोलॉजी की मदद भी चाहिए. इससे बच्चों की पढ़ाई कारगर बनाने में टेक्नोलॉजी की अहमियत सामने आई है.

पढ़ाई में छात्रों की प्रगति कई कारणों से थम गई है जैसे अध्ययन सामग्री, संसाधन और मूल्यांकन की सुविधा नहीं होना. यहां तक कि उनके जीवन मूल्य और सत्यनिष्ठा भी प्रभावित हुई. परीक्षाओं में व्याप्त कदाचार को लेकर हंगामा हुआ तो के-12 शिक्षा के भागीदारों की चिंताएं बढ़ गईं. आज ऑनलाइन परीक्षा का कारोबार तो लाखों का है पर ज्यादातर उच्च शिक्षा और कॉर्पोरेट प्रशिक्षण में इसका उपयोग किया जाता है. इसकी पूरी क्षमता का लाभ लेने के लिए के-12 सेक्टर को चाहिए कि उच्च शिक्षा की तरह उत्साह से इसे अपनाए. 

हालांकि, बच्चे स्कूल जाने लगे हैं पर डिजिटल होने और टेक्नोलॉजी के लाभ लेने से शिक्षा जगत में एक नया दौर शुरू हो रहा है. टेक्नोलॉजी से हम अधिक दक्ष, सुरक्षित और लचीले हो गए हैं. ऐसे में तेजी से ऑनलाइन होती दुनिया में छात्रों के सीखने के मूल्यांकन का तरीका भी बदलना चाहिए. आज हम टेक्नोलॉजी की मददसे परीक्षाएं लेने या आकलन करने में हो रही प्रगति पर ध्यान केंद्रित करेंगे. आकलन को हम पांच क्षेत्रों में विभाजित कर सकते हैं:

शेड्यूल तैयार करना: परीक्षा की तैयारी का तनाव छात्रों और अभिभावकों को भी रहता है. हालांकि परीक्षा का आयोजन शिक्षकों और स्कूल प्रशासकों के लिए भी कम चुनौती का काम नहीं है. काम मैनुअल होता है और प्लानिंग बहुत लंबी. क्योंकि भारी संख्या में छात्र-छात्राएं, कक्षाएं, शिक्षक, स्थान शामिल होते हैं और फिर छुट्टियां, कोर्स पूरा करने और समय का स्लॉट सुनिश्चित करना होता है. कुल मिला कर यह बहुत थकाऊ काम है और इसमें समय भी बहुत लगता है.

लेकिन पूरी परीक्षा व्यवस्था में टेक्नोलॉजी का उपयोग करें तो परीक्षाओं की योजना बनाना और समय से सुनिश्चित करना आसान होता है, क्योंकि सारा काम ऑनलाइन होता है. इससे छात्रों और अभिभावकों को मिलने वाले लाभ के साथ-साथ समय और संसाधन की बचत होती है. यह अधिक सुरक्षित है और इसमें कदाचार भी नहीं होता है. स्कूल एकेडमिक कैलेंडर सेटअप की मदद से शिक्षक और स्कूल प्रशासक परीक्षा पूर्व रिविजन के लिए आवश्यक दिनों का ध्यान और मिलान कर के छात्रों के लिए रिविजन योजनाओं का बेहतर प्रबंधन कर सकते हैं. इसमें प्रत्येक छात्र की आवश्यकता को ध्यान में रखा जा सकता है. इसके अलावा, कैलेंडर मैनेजमेंट में सभी भागीदारों को अपने-आप तिथियां ब्लॉक करने और प्रत्येक निर्धारित परीक्षा के लिए अलार्म सेट करने की सुविधा रहती है. इस तरह पूरी व्यवस्था की सक्षमता और सफलता के साथ-साथ निष्पक्षता भी बढ़ती है. इतना ही नहीं, यह सिस्टम एक स्टेप में सभी स्टैंडर्ड के लिए परीक्षाएं तैयार करने की सुविधा देता है.

प्रश्न पत्र तैयार करना : आमतौर पर छात्र या उनके माता-पिता प्रश्न पत्र को ‘अच्छा’ या 'बुरा' बताते हैं जो प्रश्न पत्र तैयार करने पर निर्भर करता है. इसमें सिलेबस और टॉपिक्स को निष्पक्ष हो कर शामिल करना होता है. व्यावहारिक और सैद्धांतिक पहलुओं में संतुलन होना चाहिए और यह छात्र के कौशल और ज्ञान का उचित मूल्यांकन करे. एनईपी 2020 के नए दौर में इस पर जोर दिया गया है कि प्रश्न पत्र में हॉट (हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल्स) के साथ-साथ छात्र के समग्र विकास पर ध्यान देना है.

टेक्नोलॉजी की मदद से आज शिक्षक और स्कूल प्रशासक एक बटन क्लिक कर विषय-विशेष के प्रश्न पत्र बनाने में सक्षम हैं. प्रश्नों का एक विशाल डेटाबेस के रूप में ‘टेस्ट जेनरेटर’ टूल उपलब्ध है. इसमें विषय-वार, गहन शोध के साथ रेंडमाइजेशन के माध्यम से प्रश्न शामिल किए जाते हैं. यह एक ही विषय पर कई टेस्ट पेपर तैयार करता है जिनमें कठिनाई के स्तर और विविधता का ध्यान रखा जाता है. प्रश्न बार-बार दुहराएं नहीं इस पर नियंत्रण की सुविधा भी है.

परीक्षाओं का आयोजन: परीक्षा का शेड्यूल बनाने के बाद शिक्षक या स्कूल व्यवस्थापक की सबसे बड़ी चुनौती परीक्षाओं का आयोजन करना है. इसके तहत विद्यार्थियों के बैठने की योजना बनाना, प्रवेश पत्र जारी करना, परीक्षा केंद्र और प्रक्रिया के समुचित प्रबंधन के लिए जरूरी सुविधाएं देना, उत्तर पुस्तिकाएं एकत्र और उनकी देखभाल करना और फिर सुनिश्चित समय सीमा में विद्यार्थियों के प्राप्तांक अपलोड करना शामिल है. दूसरी ओर विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए शुल्क का पूरा भुगतान करना, एक अनिवार्य स्तर की उपस्थिति दर्ज होना और उनके माता-पिता या अभिभावक के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करना जरूरी होता है. परीक्षा में बैठने की योजना में स्वचालन होने से शिक्षकों और स्कूल प्रशासकों का काम आसान हो गया है. रियल टाइम में स्कूल के प्रदर्शन की जांच और निगरानी रखने में स्कूल प्रशासन अधिक सक्षम हो गया है. 

उपस्थिति में कमी या शुल्क जमा नहीं होने का पता लगाने के लिए ‘बिल्ट-इन चेक’ है जिसकी मदद से प्रवेश पत्र तैयार करना आसान होता है. शिक्षक मिनटों में मोबाइल ऐप पर परीक्षा के परिणाम अपलोड कर देते हैं. यह समय और ऊर्जा बचत की मिसाल है. उन्हें पेपर मार्कशीट तैयार करने की आवश्यकता नहीं रही. ऑनलाइन परीक्षा/मूल्यांलन के मामले में यह भी पता लग जाता है कि विद्यार्थियों ने किसी प्रश्न पर कितना समय दिया. यह आंकड़ा विद्यार्थियों की आम समस्याओं को समझने में सहायक है.

परिणामों का प्रकाशन: परीक्षा के परिणामों का प्रकाशन स्कूल प्रशासकों का एक अन्य महत्वपूर्ण काम है और इसमें बहुत समय लगता है. यह ध्यान रखना होता है कि बच्चे सभी विषयों में पासिंग ग्रेड जरूर प्राप्त करें और शुल्क भुगतान में कोई चूक नहीं हो. लेकिन यह प्रक्रिया अधिक जटिल हो जाती है जब तीन विषयों में दो में उच्चतम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के चयन, मध्यावधि परीक्षाओं के औसत अंक या रैंक या योग्यता के आकलन का सवाल उठता है.

आज स्कूल प्रशासक टेक्नोलॉजी के माध्यम से केवल वर्ष चुनते हैं और सिस्टम अपने-आप स्कूल के सभी छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार कर देता है. इस तरह जिस बच्चे का शुल्क भुगतान नहीं हुआ है उसका रिपोर्ट कार्ड प्रशासन आसानी से रोक सकता है. यदि डेटा मजबूत है तो यह सिस्टम इससे पूर्व की तुलना में कहीं अधिक कारगर है जिसमें प्रत्येक छात्र कीअलग से रिपोर्ट कार्ड बनाने की आवश्यकता होती थी. इस तरह अब प्रशासकों का बहुत समय बचता है और उन्हें अन्य चीजों पर ध्यान देने का समय मिलता है.

विश्लेषण(एनेलिटिक्स): आज के रिपोर्ट कार्ड में प्रत्येक विषय के अंकों का संयोजन होता है, जिसमें विद्यार्थियों की हॉबी और उनके प्रति शिक्षक के संक्षिप्त विचार भी शामिल होते हैं. यदि रिपोर्ट कार्ड में छात्र की प्रगति, अभिरुचि, हॉबी, विकास, व्यवहार के विभिन्न पहलुओं आदि पर कुछ डेटा प्रदर्शित किए जाएं तो उनकी महत्ता बहुत बढ़ेगी. हालांकि, इसके लिए स्कूल को प्रत्येक विद्यार्थी का डेटा दर्ज करना और सुरक्षित रखना होगा. 

यह भी आसान है यदि हम विद्यार्थियों के प्रदर्शन के गहन विश्लेषण और आकलन में सक्षम टेक्नोलॉजी का लाभ लें. स्कूल चाहे तो परीक्षाओं में छात्र के प्रदर्शन की तुलना करने, रुझानों और व्यवहारों के विश्लेषण के लिए आधुनिक परीक्षा व्यवस्था का उपयोग कर सकता है और विभिन्न एड-टेक टूल्स के माध्यम से सुधार के सुझाव दे सकता है. शिक्षकों और कक्षा के प्रदर्शन के लिए ऑटोमेटेड रिपोर्ट भी आसानी से जेनरेट किया जा सकता है.

आखिर में आज इसके ठोस प्रमाण हैं कि परीक्षा प्रबंधन में शिक्षा टेक्नोलॉजी के कई लाभलिए जा सकते हैं. ऑनलाइन सिस्टम पर पूरी दुनिया की निर्भरता बढ़ रही है. ऐसे में यह उचित होगा कि छात्रों के सीखने का मूल्यांकन इस रुझान के मद्देनजर हो. हालांकि वर्तमान परीक्षा प्रक्रिया के अपने लाभ हैं लेकिन इसमें टेक्नोलॉजी को शामिल करने से यह अधिक कुशल और कारगर हो सकती है.

लेखक: सर्वेश श्रीवास्तव यूफियस लर्निंग के संस्थापक और प्रबंध निदेशक

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