बीएमसी को मिलने जा रही हैं नई मेयर, कितनी पढ़ी-लिखी हैं रितु तावड़े? जानें कितनी मिलेगी सैलरी
बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को नई मेयर मिल गई हैं. भारतीय जनता पार्टी ने रितु तावड़े को मुंबई की अगली मेयर बनाने का फैसला लिया है. आइए उनकी एजुकेशन जानते हैं...

भारतीय जनता पार्टी ने बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) के लिए अपने नए मेयर के नाम का ऐलान कर दिया है. पार्टी ने रितु तावड़े को मुंबई की अगली मेयर बनाने का फैसला लिया है. रितु तावड़े बीजेपी की सीनियर कॉर्पोरेटर हैं और लंबे समय से नगर निगम की राजनीति में सक्रिय रही हैं. उनके नाम की चर्चा पहले से ही मेयर पद के मजबूत दावेदार के रूप में हो रही थी, जिस पर अब मुहर लग गई है.
रितु तावड़े ने हाल ही में हुए बीएमसी चुनाव में वार्ड नंबर 132 से जीत दर्ज की है. यह उनकी लगातार तीसरी जीत है. इससे पहले वह साल 2012 में पहली बार वार्ड नंबर 127 से चुनाव जीतकर निगम में पहुंची थीं. इसके बाद 2017 में उन्होंने घाटकोपर के वार्ड नंबर 121 से जीत हासिल की. 2025 के चुनाव में एक बार फिर जनता ने उन पर भरोसा जताया और वार्ड नंबर 132 से उन्हें विजयी बनाया.
रिपोर्ट्स के अनुसार बीएमसी मेयर को मानदेय मिलता है. इनका मानदेय करीब 6 हजार रुपये मंथली होता है. इसके अलावा कई अलाउंस और सुविधाएं मिलती हैं, जिन्हें मिलाकर करीब 50 हजार रुपये के आसपास सैलरी हो जाती है.
पढ़ाई-लिखाई कैसी रही?
अगर रितु तावड़े की पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा पूरी की है. इसके बाद उन्होंने बीकॉम (S.Y. B.Com) की पढ़ाई की. उन्होंने एन.जी. आचार्य कॉलेज, चेंबूर, मुंबई से यह पढ़ाई साल 1995-96 के दौरान की थी. राजनीति में आने से पहले ही उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझा और आगे चलकर निगम में शिक्षा से जुड़े कामों पर खास ध्यान दिया.
शिक्षा समिति की चेयरमैन रह चुकी हैं
नगर निगम में अपने कार्यकाल के दौरान रितु तावड़े को कई अहम जिम्मेदारियां मिलीं. वह मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की एजुकेशन कमिटी की चेयरमैन भी रह चुकी हैं. इस दौरान उन्होंने नगर निगम के स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता से काम किया. शिक्षा, बच्चों की सुविधाएं और स्कूलों की स्थिति सुधारना उनकी प्राथमिकताओं में रहा है.
जमीनी नेता के रूप में पहचान
रितु तावड़े को एक जमीनी नेता के तौर पर जाना जाता है. वह अपने इलाके में लोगों से सीधे जुड़ी रहती हैं और नागरिक समस्याओं को मौके पर जाकर समझने की कोशिश करती हैं. सड़क, पानी, सफाई, स्कूल और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर उनकी सक्रियता अक्सर देखने को मिलती है. यही वजह है कि जनता के बीच उनकी अच्छी पकड़ बनी हुई है.
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Source: IOCL























