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कैसे हुई थी बिहार लोक सेवा आयोग की शुरुआत? कौन थे इसके पहले चेयरमैन

क्या आप जानते हैं बिहार लोक सेवा आयोग कब बना था और इसके पहले चेयरमैन कौन थे? अगर नहीं तो आज हम आपको BPSC से जुड़ा इतिहास बताने जा रहे हैं.

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  • सरकारी नौकरी भर्ती हेतु बिहार लोक सेवा आयोग 1949 में गठित.
  • 1950 में इसे संवैधानिक दर्जा मिला; मुख्यालय रांची से पटना स्थानांतरित.
  • राजंधारी सिन्हा पहले अध्यक्ष, वर्तमान अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई हैं.

हर स्टेट में युवाओं का सपना सरकारी नौकरी पाने का होता है. ऐसे में सरकारी पदों पर युवाओं के सिलेक्शन के लिए हर राज्य में एक आयोग होता है. जो कि राज्य के संवैधानिक पदों पर भर्ती और उनके आगे की प्रोसेस को देखता है. आज हम ऐसे ही एक आयोग की बात करने जा रहे हैं. आइए जानते हैं बिहार लोक सेवा आयोग के बारे में...

राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए होने वाले टॉप एग्जाम का आयोजन करने का जिम्मा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के पास है. हर वर्ष लाखों कैंडिडेट्स BPSC के अलग-अलग एग्जाम में शामिल होते हैं. लेकिन क्या आपको इस आयोग के बारे में पता है. अगर नहीं तो हम बताते हैं.

देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के जरिए सरकारी नियुक्तियों का विचार पहली बार वर्ष 1853 में सामने आया था. उस समय ब्रिटिश शासन के दौरान सरकारी पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक व्यवस्थित परीक्षा प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता महसूस की गई. इसके बाद शला 1854 में लॉर्ड मैकाले की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया, जिसने प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को स्वरूप देने का काम किया गया.

इसके बाद के वर्षों में सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई सुधार किए गए. इसी क्रम में भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत संघीय लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों के गठन का प्रावधान किया गया. यही व्यवस्था आगे चलकर स्वतंत्र भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और अलग-अलग राज्य लोक सेवा आयोगों का आधार बनी.

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कब बना BPSC?

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की स्थापना 1 अप्रैल 1949 को हुई थी. उस समय यह आयोग उड़ीसा और मध्य प्रदेश राज्यों के लिए कार्यरत संयुक्त आयोग से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इसका गठन भारत सरकार अधिनियम, 1935 की धारा 261(1) के तहत किया गया था.

हालांकि, BPSC को वास्तविक संवैधानिक दर्जा 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के बाद मिल सका. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों की व्यवस्था की गई है. इसी प्रावधान के तहत बिहार लोक सेवा आयोग एक कोंस्टीटूशनल बॉडी के रूप में कार्य करता है.

पहले कहां था मुख्यालय

स्थापना के शुरुआती दिनों में BPSC का मुख्यालय रांची में स्थित था, क्योंकि उस समय रांची बिहार राज्य का हिस्सा हुआ करता था. इसके बाद में राज्य सरकार ने आयोग का मुख्यालय रांची से पटना स्थानांतरित करने का निर्णय लिया. इसके बाद 1 मार्च 1951 को BPSC का मुख्यालय आधिकारिक रूप से पटना स्थानांतरित कर दिया गया.

कौन थे पहले चेयरमैन?

बिहार लोक सेवा आयोग के पहले चेयरमैन राजंधारी सिन्हा थे. वहीं, आयोग के पहले सचिव राधा कृष्ण चौधरी बने थे. इन दोनों अधिकारियों ने आयोग की प्रारंभिक कार्यप्रणाली को स्थापित करने और इसे एक प्रभावी भर्ती संस्था के रूप में विकसित करने में अहम भूमिका निभाई थी. फिलहाल बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष परमार रवि मनुभाई हैं. उन्होंने 16 मार्च 2024 को पदभार ग्रहण किया था और वर्तमान में आयोग का नेतृत्व कर रहे हैं.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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