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मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के एम्पलाइज अब माने जाएंगे एक्स-सर्विसमैन, जानें इससे क्या बदल जाएगा?

सरकार ने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) स्टाफ को पूर्व सैनिक का दर्जा दे दिया है.अब उन्हें सरकारी नौकरियों में क्या फायदा मिलेगा आइये जानते हैं.

देश की रक्षा सेवाओं में काम करने वाली महिलाओं के लिए सरकार ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला लिया है. अब मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में सेवा दे चुकी महिलाओं को भी पूर्व सैनिक यानी एक्स-सर्विसमैन की कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है. पहले यह सुविधा सिर्फ आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के जवानों को मिलती थी. लेकिन अब सरकार ने नियम बदलते हुए MNS स्टाफ को भी इसमें शामिल कर लिया है. इस फैसले से सेना की नौकरी खत्म होने के बाद महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों के नए रास्ते खुल जाएंगे और उन्हें कई सुविधाओं का फायदा मिलेगा.

MNS स्टाफ को मिला पूर्व सैनिक का दर्जा

सरकार ने एक्स-सर्विसमैन से जुड़े नियमों में बदलाव करते हुए मिलिट्री नर्सिंग सर्विस स्टाफ को आधिकारिक रूप से पूर्व सैनिक मान लिया है.यह बदलाव संविधान के आर्टिकल 309 के तहत किया गया है.इसका मतलब यह है कि अब MNS में काम करने वाले कर्मचारी, चाहे उन्होंने लड़ाकू भूमिका निभाई हो या गैर-लड़ाकू भूमिका, दोनों को ही एक्स-सर्विसमैन की सुविधाएं मिलेंगी.पहले MNS स्टाफ को सेना का हिस्सा माना तो जाता था, लेकिन उन्हें पूर्व सैनिकों वाली सुविधाएं नहीं मिलती थीं. इस वजह से उन्हें सरकारी नौकरियों में आवेदन करने के समय कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. अब सरकार के नए नियम से यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी.

सरकारी नौकरियों में मिलेगा आरक्षण का लाभ

नए नियम लागू होने के बाद MNS स्टाफ को केंद्रीय सरकारी नौकरियों में आरक्षण का फायदा मिलेगा. सरकार ने साफ किया है कि ग्रुप ‘C’ की नौकरियों में 10 प्रतिशत और ग्रुप ‘D’ की नौकरियों में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा.इस फैसले से MNS स्टाफ को UPSC, SSC और अन्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं में आवेदन करते समय बेहतर अवसर मिलेंगे. पहले उन्हें सामान्य उम्मीदवारों के साथ प्रतियोगिता करनी पड़ती थी, लेकिन अब आरक्षण मिलने से उनके चयन की संभावना बढ़ जाएगी. इससे सेना में सेवा देने वाली महिलाओं को नौकरी के मामले में बराबरी का मौका मिलेगा.

उम्र सीमा में भी मिलेगी राहत

सरकार ने उम्र सीमा को लेकर भी MNS स्टाफ को बड़ी राहत दी है. अब सिविल सरकारी नौकरियों में आवेदन करते समय उन्हें अतिरिक्त उम्र सीमा की छूट मिलेगी. नए नियम के अनुसार उम्मीदवार की असली उम्र से सेना में किए गए सेवा के साल घटाए जाएंगे और इसके अलावा 3 साल की अतिरिक्त छूट भी दी जाएगी.मान लीजिए किसी महिला ने सेना में 6 या 7 साल सेवा दी है, तो उसे सरकारी नौकरी में आवेदन करने के लिए इतने सालों की छूट के साथ अतिरिक्त 3 साल और मिलेंगे. इससे MNS स्टाफ को नौकरी की तैयारी करने के लिए ज्यादा समय मिलेगा और वे बिना किसी दबाव के अपने करियर की योजना बना सकेंगी.

सरकार के इस फैसले के बाद MNS स्टाफ के लिए सरकारी नौकरियों के नए रास्ते खुल जाएंगे. सेना में सेवा देने के बाद अब वे आसानी से सिविल जॉब्स के लिए आवेदन कर सकेंगी. इससे उनकी नौकरी की सुरक्षा बढ़ेगी और भविष्य को लेकर चिंता भी कम होगी.सरकार का यह फैसला यह भी दिखाता है कि अब महिलाओं की भूमिका रक्षा सेवाओं में पहले से ज्यादा मजबूत हो रही है. इससे महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा मिलेगा और उनकी मेहनत को सही पहचान मिल सकेगी. कुल मिलाकर यह फैसला MNS स्टाफ के लिए एक बड़ी राहत और उनके उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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