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सरकारी नौकरियों में भर्तियों में आई गिरावट, 3 साल के निचले स्तर पर पहुंची हायरिंग, जानें क्या है वजह

सरकारी नौकरी में लगातार भर्तियां कम होती जा रही है. पिछले तीन सालों के मुकाबले वित्तीय वर्ष 2020-21 में सरकार ने बहुत कम हायरिंग की है. नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के पेरोल डेटा से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने जहां 27 फीसदी कम लोगों की हायरिंग की तो  वहीं राज्यों ने 21 फीसदी कम लोगों को काम पर रखा.

वित्तीय वर्ष 2020-21 में पिछले तीन सालों के मुकाबले सरकारी नौकरी में हायरिंग में गिरावट आई है और यह निचले स्तर पर पहुंच गई है. नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के पेरोल डेटा से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने जहां 27 फीसदी कम लोगों की हायरिंग की तो  वहीं राज्यों ने 21 फीसदी कम लोगों को काम पर रखा.

2020 की तुलना में 2021 में कम हुई सरकारी विभागों में हायरिंग

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2020 में लगभग 119,000 लोगों को परमानेंट पे-रोल पर रखा था, लेकिन वित्त वर्ष 2021 में यह संख्या घटकर 87,423 रह गई. इसी तरह, राज्यों ने वित्त वर्ष 2021 में 389,052 लोगों को काम पर रखा, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 107,000 कम है.

ये डाटा साफ दिखाता है कि न केवल प्राइवेट सेक्टर बल्कि सरकार ने भी महामारी काल में भर्ती को धीमा कर दिया है. वहीं विशेषज्ञ और सरकारी कर्मचारी संघ महामारी दौर में  सरकारी हायरिंग में कमी के लिए, नए पदों पर प्रतिबंध और आउटसोर्स श्रमिकों पर बढ़ती निर्भरता को जिम्मेदार ठहराते हैं.

सरकार स्थायी पदों को कर रही है कम

हिंदुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय लोक सेवा कर्मचारी महासंघ (IPSEF) के महासचिव प्रेम चंद का कहना है कि,  “सरकारी भर्ती साल दर साल कम होती जा रही है और यह प्रवृत्ति जारी रहेगी क्योंकि केंद्र सरकार के स्तर पर और यहां तक ​​कि राज्यों में भी विभागों में स्थायी पदों को कम किया जा रहा है  ज्यादातर कॉन्ट्रेक्ट पर भर्तियां हो रही है.  मल्टी-टास्किंग कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स, जैसा कि सरकार उन्हें बुलाती है, को स्थायी कर्मचारियों के बजाय काम पर रखा जा रहा है. ”

कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स सिस्टम के खिलाफ नहीं बोलते

प्रेम चंद आगे कहते है कि, “सरकार ऐसा क्यों कर रही है, इसके दो कारण हैं- एक सरकार अब कर्मचारियों की लागत कम करना चाहती है, और दूसरा, कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स सिस्टम के खिलाफ कुछ नहीं बोलेंगे. किसी भी मंत्रालय में, आप सचिवीय सहायता सेवाओं के लिए तैनात संविदा कर्मियों को आसानी से देख सकते हैं. यहां तक ​​​​कि सचिव और अतिरिक्त सचिव सहयोगी स्टाफ का एक हिस्सा अब कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स के पास जा रहा है.

क्या कहते हैं एनपीएस के आंकड़े

एनपीएस के आंकड़ों से पता चलता है कि केंद्र सरकार ने 2017-18 में हर महीने औसतन लगभग 11,000 लोगों को काम पर रखा था, जो 2019-20 में घटकर 9,900 और 2020-21 में 7,285 हो गया. राज्य सरकार के स्तर पर जहां 2019 में मंथली 45,208 लोगों की नियुक्ति की गई तो वहीं 2021 में ये आंकडा सिर्फ 32,421 रहा.

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