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बिहार में PhD एडमिशन के नियम सख्त, नेट पास छात्रों को ही मिलेगा मौका

बिहार राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार उम्मीदवार जिस साल नेट पास करेगा, उसे उसी साल के पीएचडी एडमिशन चक्र के लिए एलिजिबल माना जाएगा. 

बिहार के विश्वविद्यालय में पीएचडी में एडमिशन को लेकर अब नियम पहले से ज्यादा सख्त होंगे. रिसर्च की क्वालिटी बनाए रखने और एडमिशन प्रक्रिया में सामने आ रही अनियमितताओं को रोकने के लिए राजभवन ने सभी राज्य यूनिवर्सिटी को नए पीएचडी ऑर्डिनेंस और पीएचडी रेगुलेशन 2026 के प्रावधान के अनुसार ही एडमिशन लेने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही लंबे समय से लंबित पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया को जल्द पूरा करने और आगे की पूरी प्रक्रिया तय समय के अंदर करने को भी कहा है. राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपतियों को जारी निर्देश में पीएचडी में नेट की एलिजिबिलिटी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है. नई व्यवस्था के तहत उम्मीदवार जिस साल नेट पास करेगा, उसे उसी साल के पीएचडी एडमिशन चक्र के लिए एलिजिबल माना जाएगा. 

निर्देश के अनुसार अगर किसी उम्मीदवार ने नेट 2024 में क्वालीफाई किया है, तो उसे 2024 के पीएचडी एडमिशन चक्र के लिए एलिजिबल माना जाएगा. इस तरह आगे के वर्षों में भी नीट पास करने वाले उम्मीदवारों की पात्रता संबंधित वर्ष के एडमिशन चक्र के आधार पर तय होगी. हालांकि नेट की पात्रता और उसके वेटेज का निर्धारण पीएचडी रेगुलेशन 2026 में दिए गए प्रावधानों के अनुसार ही किया जाएगा. यानी सिर्फ नेट पास होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि एडमिशन के लिए नए नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा. 

2024, 25 और 26 के लंबित एडमिशन होंगे पूरे 

राजभवन ने विश्वविद्यालय को 2024, 2025 और 2026 के लंबित पीएचडी एडमिशन चक्र के लिए जल्द से जल्द नोटिफिकेशन जारी करने को कहा है. इसका मकसद पुराने बैकलॉग को खत्म करने और पीएचडी एडमिशन को नियमित व्यवस्था में लाना है. निर्देश में साफ कहा गया है कि भविष्य में पीएचडी एडमिशन में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए, इसलिए आवेदन से लेकर एडमिशन तक की प्रक्रिया को तय समय में पूरा करना होगा. 

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1 एडमिशन चक्र में 1/3 से ज्यादा सीटें नहीं भरेंगी 

पीएचडी में सीटों को लेकर भी नई सीमा तय की गई है. रिसर्च की क्वालिटी और छात्रों को पर्याप्त रिसर्च सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किसी एक पीएचडी एडमिशन चक्र में उपलब्ध रिक्त सीटों की एक तिहाई से ज्यादा सीटों पर एडमिशन नहीं दिया जाएगा. वहीं 2026-27 तक की रिक्त सीटों में अधिकतम दो-तिहाई सीटों तक एडमिशन लेने की अनुमति होगी. विश्वविद्यालय को एडमिशन से पहले यह भी देखना होगा कि संबंधित विषय में पर्याप्त रिसर्च पर्यवेक्षक, रिसर्च सुविधा और नियमों के अनुसार जरूरी संसाधन उपलब्ध है या नहीं. 

रिसर्च टॉपिक भी होंगे सार्वजनिक 

नई व्यवस्था के तहत यूनिवर्सिटीज को अपने यहां चल रहे रिसर्च कार्य की जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होगी. इसमें यह बताया जाएगा कि किस यूनिवर्सिटी में किस विषय और टॉपिक पर रिसर्च हो रहा है. इसका उद्देश्य एक ही विषय पर होने वाले शोध के दौरान को रोकना है. इसके अलावा रिसर्च गाइड की जानकारी भी वेबसाइट पर उपलब्ध करानी होगी. यूनिवर्सिटी को बताना होगा कि कौन से प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर किस विषय में रिसर्च का मार्गदर्शन कर रहे हैं. उनके साथ कितने रिसर्चर्स रजिस्टर है और वे किन सब्जेक्ट पर रिसर्च कर रहे हैं. इसके अलावा राजभवन के निर्देशों में यूनिवर्सिटीज में पीएचडी रेगुलेशन 2026 का सख्ती से पालन करने को कहा है. नियमों का उल्लंघन या एडमिशन प्रक्रिया में गड़बड़ी सामने आने पर पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की बात भी कही है.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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