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देशभर के स्कूलों में बदल रही पढ़ाई की तस्वीर,अब किताबों के साथ AI भी बनेगा छात्रों का नया साथी

देशभर के स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलने जा रहा है. अब कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों को AI और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई भी कराई जाएगी. जानिए नए सिलेबस में क्या होगा और बच्चों को इससे क्या फायदा मिलेगा.

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  • सरकार ने कक्षा 3 से 8 के लिए AI शिक्षा शुरू की.
  • बच्चे AI, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और समस्या-समाधान का अध्ययन करेंगे.
  • यह पहल उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी.

अब स्कूलों में सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं होगी.आने वाले समय में छोटे बच्चे भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीक के बारे में सीखेंगे. सरकार ने कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों के लिए नया सिलेबस तैयार किया है, ताकि बच्चे शुरू से ही बदलती दुनिया के साथ कदम मिला सकें.

अब कक्षा 3 से बच्चे सीखेंगे AI

सरकार ने स्कूलों की पढ़ाई में बड़ा बदलाव किया है.अब कक्षा 3 से 8 तक के बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कम्प्यूटेशनल थिंकिंग (CT) की पढ़ाई कराई जाएगी. इसका मकसद बच्चों को नई तकनीक से जोड़ना और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना है.

नए सिलेबस में क्या पढ़ाया जाएगा?

इस नए सिलेबस में बच्चों को आसान तरीके से सोचने, किसी समस्या का हल निकालने और तकनीक का सही इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा. पढ़ाई को मजेदार और आसान बनाने के लिए नई किताबें और शिक्षकों के लिए अलग गाइड भी तैयार की गई हैं.

बच्चों को क्या होगा फायदा?

आज के समय में AI का इस्तेमाल हर जगह बढ़ रहा है.ऐसे में अगर बच्चे स्कूल से ही इसकी जानकारी हासिल करेंगे, तो उन्हें आगे की पढ़ाई और नौकरी में काफी मदद मिलेगी. इससे उनकी सोचने की क्षमता बढ़ेगी और नई चीजें सीखना भी आसान होगा.

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सरकार का क्या है मकसद?

सरकार चाहती है कि भारत के बच्चे समय के साथ आगे बढ़ें और नई तकनीक को अच्छे से समझें. इसी वजह से स्कूलों में AI की पढ़ाई शुरू की जा रही है, ताकि आने वाले समय में देश के युवा नई तकनीक के क्षेत्र में बेहतर काम कर सकें.

अब पढ़ाई होगी पहले से ज्यादा स्मार्ट

इस नए सिलेबस को लागू करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. पहले शिक्षकों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे बच्चों को आसान भाषा में AI और नई तकनीक से जुड़ी बातें समझा सकें. इसके बाद स्कूलों में नई किताबों और पढ़ाई के तरीके के साथ इस सिलेबस को लागू किया जाएगा. सरकार का मानना है कि अगर बच्चों को छोटी उम्र से ही नई तकनीक की सही जानकारी मिलेगी, तो वे आगे चलकर पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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