क्यों डॉलर के मुकाबले फिसल रहा रुपया, अकेले 2025 में 5 परसेंट की आई गिरावट; अब आगे क्या?
Rupee vs Dollar: साल 2025 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 5 परसेंट तक की गिरावट दर्ज की गई. जो 2022 के बाद इसका सबसे खराब सालाना प्रदर्शन रहा.

Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले भारतीय करेंसी रुपया लगातार कमजोर होता जा रहा है. शुक्रवार को रुपया 22 पैसे टूटकर 90.20 डॉलर पर आ गया. इसका मतलब है कि अब आपको एक डॉलर के लिए 90 रुपये से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे. हालांकि, इससे एक दिन पहले गुरुवार को रुपये में छह पैसे की बढ़त भी देखने को मिली थी और इसी के साथ यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.92 पर पहुंच गया था. इम्पोटर्स के बीच डॉलर की बढ़ती डिमांड और कम लिक्विडिटी के बीच रुपये के मुकाबले डॉलर में लगातार तेजी देखने को मिल रही है.
इससे पहले सरकारी बैंकों ने RBI को अमेरिकी डॉलर बेचे, तो इससे कुछ हद तक रुपये को संभालने में मदद मिली. लेकिन फिर से तेल इम्पोटर्स के बीच बढ़ती डिमांड के चलते फिर से डॉलर रुपये के मुकाबले और मजबूत हो गया. फिलहाल, मार्केट का फोकस करेंसी में उतार-चढ़ाव और RBI के दखल पर बना हुआ है, जिसमें FX स्वैप और लिक्विडिटी ऑपरेशन शामिल हैं.
2025 में 5 परसेंट की गिरावट
साल 2025 में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 परसेंट तक लुढ़का, जो 2022 के बाद से इसका सबसे खराब प्रदर्शन रहा. हालांकि, SBI ने भविष्यवाणी की है कि 2026 में इसमें बदलाव आने की उम्मीद है. SBI फंड्स मैनेजमेंट की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, करेंसी पर पिछले साल विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, निर्यात की कम हुई रफ्तार और आयातकों से बढ़ी हुई हेजिंग डिमांड का दबाव था.
विदेशी निवेशकों ने कमाई में गिरावट, AI के नेतृत्व वाली ग्लोबल ग्रोथ में सीमित हिस्सेदारी और दूसरे उभरते बाजारों में बेहतर अवसरों का हवाला देते हुए भारतीय इक्विटी से लगभग 18 बिलियन डॉलर निकाल लिए. पिछले साल जब डॉलर कमजोर हुआ और ज्यादार ग्लोबल करेंसीज मजबूत हुईं, लेकिन इन सब वजहों से रुपया तब भी कमजोर रहा.
क्या आगे सुधरेंगे हालात?
अगले फाइनेंशियल ईयर में रुपया लगभग 2 परसेंट तक गिरेगा और एक्सचेंज रेट अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92 के आसपास रहेगा. इसे कई अहम फैक्टर्स का सहारा मिलेगा. SBI ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मजबूत सर्विस एक्सपोर्ट और कच्चे तेल की कम कीमतों की वजह से भारत का करेंट अकाउंट डेफिसिट GDP के 1 परसेंट से कम रहने की संभावना है. महंगाई RBI के 4 परसेंट के टारगेट के करीब रहने की उम्मीद है, जिससे करेंसी को किसी बड़े झटके से उबरने में मदद मिलेगी.
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