फ्लाइट टिकट के दामों पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं, सरकार का बड़ा बयान
सस्ते हवाई किराए का इंतजार कर रही जनता को सरकार ने बड़ा झटका दिया है. सरकार ने कहा है कि फ्लाइट टिकट के दामों पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है, हालांकि इमरजेंसी की स्थिति में किराए पर कैप लगाई जा सकती है.

त्योहारी सीजन में फ्लाइट्स के दाम आसमान पर है. सरकार से लगातार टिकट के दामों पर कैप लगाने की मांग हो रही है. अब सरकार ने साफ कहा है कि आम दिनों में हवाई टिकट के दामों पर कोई कंट्रोल नहीं लगेगा. एयरलाइंस अभी जैसे डिमांड-सप्लाई के हिसाब से किराया तय करती हैं, वैसे ही करती रहेंगी.
हालांकि सरकार ने बताया है कि सरकार नया हवाई किराया नियम बना रही है, उसमें एक पावर रहेगी, अगर बाढ़, भूकंप, कोरोना जैसी इमरजेंसी या कोई बड़ी आपदा आए तो सरकार टिकट के दाम पर कैप लगा सकेगी, ताकि आम लोग लूटे न जाएं.
एयरलाइन शेयरों में भारी गिरावट
इकॉनोमिक टाइम्स से बातचीत में सरकार के बड़े अधिकारी ने कहा है, ''मांग और आपूर्ति के आधार पर हवाई किराए तय करने वाली मुक्त बाजार व्यवस्था में हस्तक्षेप करने की सरकार की कोई योजना नहीं है.'' इस घोषणा से अब एयरलाइन मूल्य निर्धारण में सरकारी हस्तक्षेप की अटकलें तेज हो गईं और एयरलाइन शेयरों में भारी गिरावट आई.
भारत के विमानन नियामक 'डीजीसीए' (DGCA) के नए नियम के अनुसार, सभी एयरलाइंस को अपना किराया ढांचा एक महीने पहले जमा करना होगा और इसे अपनी वेबसाइटों पर भी दिखाना होगा. डीजीसीए इस बात पर नज़र रखेगा कि कोई भी एयरलाइन जमा की गई अधिकतम सीमा से ज़्यादा किराया न वसूले.
पिछले हफ्ते पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने बताया कि सरकार हवाई किराए को सही और बजट में रखने की पूरी कोशिश कर रही है. हालांकि, हवाई ईंधन की बदलती कीमतों की वजह से ऐसा कर पाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.
हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है केस
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में भी हवाई किराए में लूट और हिडन चार्ज पर केस चल रहा है और सरकार ने कोर्ट को बताया है कि 2 हफ्ते में नए नियम पब्लिश होंगे. मतलब नॉर्मल टाइम में बाजार तय करेगा, इमरजेंसी में सरकार बचाएगी.
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