अमेरिका ने जारी की 120 देशों की लिस्ट, भारत की अनदेखी, जानें क्या है ट्रंप के ये हैरान करने वाले आंकड़े
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम को ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति और घरेलू राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे वक्त में जब अमेरिका में अप्रवासन और सरकारी खर्च को लेकर बहस तेज है.

Trump Release Immigrant Households Data: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को दुनियाभर के ऐसे अप्रवासियों की एक सूची जारी की है, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे अमेरिका के भीतर कल्याणकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता का लाभ उठा रहे हैं. ट्रंप ने ये आंकड़े अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर साझा किए हैं.
इस सूची में दुनिया के करीब 120 देशों के नाम शामिल हैं, लेकिन भारत का नाम इसमें नहीं है, जो सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात मानी जा रही है. खास बात यह है कि भारत के पड़ोसी देश- पाकिस्तान, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल और चीन इस सूची में साफ तौर पर शामिल हैं.
अमेरिकी ने जारी की 120 देशों की लिस्ट
ट्रंप द्वारा जारी किया गया यह चार्ट ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़ा रुख अपनाते हुए वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करने की कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई के महज एक घंटे के भीतर यह सूची सार्वजनिक की गई, जिससे इसके राजनीतिक और कूटनीतिक मायने और गहरे हो गए हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम को ट्रंप की सख्त आव्रजन नीति और घरेलू राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है, खासकर ऐसे वक्त में जब अमेरिका में अप्रवासन और सरकारी खर्च को लेकर बहस तेज है.
दरअसल, इस चार्ट में अलग-अलग देशों के अप्रवासियों को अमेरिकी सरकार की ओर से मिली सहायता को प्रतिशत के रूप में दर्शाया गया है. लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह सहायता किस प्रकार की थी- क्या वह नकद लाभ, खाद्य सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं या किसी अन्य कल्याणकारी योजना से जुड़ी थी.
भ्रम पैदा करने वाली लिस्ट
इसके अलावा, चार्ट में यह जानकारी भी नहीं दी गई है कि यह सहायता किस अवधि के लिए दी गई थी, अप्रवासियों को यह लाभ कब से कब तक मिला, और क्या यह सहायता अभी भी जारी है या पहले ही बंद की जा चुकी है।
इसी वजह से विशेषज्ञ और विश्लेषक इस डेटा की पारदर्शिता और संदर्भ पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि बिना स्पष्ट समयसीमा और योजना-वार विवरण के केवल प्रतिशत के आधार पर निष्कर्ष निकालना भ्रामक हो सकता है. कुल मिलाकर, यह चार्ट राजनीतिक संदेश तो देता है, लेकिन तथ्यों की पूरी तस्वीर पेश नहीं करता, जिससे इसके आंकड़ों की व्याख्या को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है.
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Source: IOCL






















