Income Tax भरने का टाइम: सैलरी स्लिप से लें टैक्स फाइल करने में मदद !

नई दिल्लीः मार्च का महीना शुरू हो चुका है और आ चुका है इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का समय. आपको अगर पता नहीं है तो बता दें कि पिछले एक साल में इनकम टैक्स कानून में कई बदलाव हो चुके हैं. इस बार 1 फरवरी को पेश हुए बजट 2017 में भी आयकर कानूनों में बड़े बदलाव हुए हैं. हालांकि इस बार सरकार ने आयकर की लिमिट में जो कुछ बदलाव किए हैं उनसे आपको टैक्स में राहत मिली है लेकिन कुछ बदलाव लोगों के लिए महंगे भा साबित हो सकते हैं तो जान लें कि इस बार कैसे आपको नए नियमों के मुताबिक इनकम टैक्स भरना है.
सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात है कि अग आपकी सालाना आमदनी 3 लाख रुपये से ऊपर है तो टैक्स विभाग के लिए आपके ऊपर कुछ टैक्स जरूर हैं. आपको इनकम टैक्स देने की जरूरत है और इसके लिए आपको अपनी ग्रॉस टोटल इनकम को जोड़ने की जरूरत है. क्योंकि कई बार लोगों को ये ही नहीं पता होता कि उनकी कितनी सैलरी पर टैक्स लगने वाला है और इसी के चलते वो टैक्स रिटर्न फाइल भी नहीं करते और इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ता है.
जानें आपकी ग्रॉस टोटल इनकम के जरूरी कंपोनेंट इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आपको अपनी सालाना आमदनी दर्ज करानी होगी. आप की सालाना इनकम आपकी सैलरी, प्रॉपर्टी से आय और किसी अन्य माध्यम से हुई किसी अन्य इनकम का कम्बाइंड टोटल होता है.
जिनकी सिर्फ सैलरी इनकम होती है आपकी ग्रॉस टोटल इनकम में सिर्फ सैलरी शामिल है तो इनकम टैक्स भरना बेहद आसान है. जरूरत है आपको अपनी सैलरी स्लिप को समझने की. लेकिन इसके लिए आपको अपनी सैलरी स्लिप को समझना बेहद जरूरी होता है और इसके लिए आपकी पूरी जानकारी होनी चाहिए.
आपकी सैलरी स्लिप में कंपनी अथवा सरकार की तरफ से हर महीने मिले पैसा का पूरा डिटेल्ड वर्णन रहता है. सैलरी स्लिप में कई हेड्स के तहत आपको मिले पैसों को ब्यौरा शामिल है. जैसे बेसिक सैलरी, हाउस रेंट अलाउंस, महंगाई भत्ता यानी डियरनेस अलाउंस, मेडिकल अलाउंस, यात्रा खर्च या कन्वेएंस अलाउंस ये सब मिलाकर सैलरी का कंपोनेंट तैयार होता है.
सैलरी स्लिप में डिडक्शन को इस तरह समझें आपकी सैलरी स्लिप में आपको मिले पैसों के साथ-साथ हुए डिडक्शन्स भी दर्ज रहते हैं. सैलरी देने वाले एम्प्लॉयर को ये सैलरी में यह कटौती करने जरूरी होते हैं. आपकी सैलरी में हुए कुछ डिडक्शन्स आपको भविष्य में फायदा देने के लिए हैं तो कुछ नियमों के चलते जरूरी हैं. जिसे सैलरी मिल रही है उसे भी इन डिडक्शन्स को जोड़कर रखना चाहिए क्योंकि ये गलत हों तो आपका ज्यादा टैक्स कट सकता है. वहीं इनको जानने से आयकर रिटर्न भरते समय इस डिडक्शन से आपको कई तरह की राहत मिल सकती है.
Source: IOCL

























