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भारत लौट कैसे टाटा समूह को पहुंचाया बुलंदियों तक, जानें रतन टाटा की दिलचस्प कहानी

रतन टाटा को लॉस एंजिल्स काफी पसंद आ रहा था और वह वहीं बस जाना चाहते थे. रतन टाटा लॉस एंजलिस में एक अपार्टमेंट में थे, पर तभी भारत में उनकी दादी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई और उन्हें भारत लौटना पड़ा.

भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा का नाम नहीं सुना होगा. भारत के इस दिग्गज उद्योगपति के जीवन के न जाने कितने उतार चढ़ाव के पल आए पर रतन टाटा ने हर घड़ी का सामना किया. एक वक्त था जब रतन टाटा अमेरिका में आर्कटेक्ट का काम करते थे वह उस वक्त लॉस एंजिल्स में रहते थे और वहीं बस जाना चाहते थे. इसका खुलासा पीटर केसी ने अपनी किताब द स्टोरी ऑफ टाटा में किया है. इस किताब में उन्होंने बताया है कि आखिर क्यों रतन टाटा का अमेरिका छोड़कर भारत लौटना पड़ा.

दादी के खराब तबियत के कारण लौटे भारत

रतन टाटा को लॉस एंजिल्स काफी पसंद आ रहा था और वह वहीं बस जाना चाहते थे. रतन टाटा लॉस एंजलिस में एक अपार्टमेंट में रह रहे थे, पर तभी भारत में उनकी दादी गंभीर रूप से बीमार पड़ गई और उन्हें भारत लौटना पड़ा.

क्यों रतन टाटा ने नहीं की शादी


भारत लौट कैसे टाटा समूह को पहुंचाया बुलंदियों तक, जानें रतन टाटा की दिलचस्प कहानी

पीटर केसी के किताब से मिली जानकारी के अनुसार रतन टाटा जिस वक्त अमेरिका के लॉस एंजिल्स में बतौर आर्किटेक्ट काम कर रहे थे, तब उनकी एक गर्लफ्रेंड भी थी. पर जब रतन टाटा भारत वापस लौटे तब वह अपनी गर्लफ्रेंड के साथ रिश्ता जारी नहीं रख सके. इसके अलावा इस किताब से एक और रोचक जानकारी मिली है उसके अनुसार रतन टाटा के जीवन में चार गर्लफ्रेंड रही, जिन्हे लेकर वह काफी सीरियस भी थे, इतना ही नहीं एक लड़की से उन्होंने सगाई भी कर ली थी, लेकिन उनकी सगाई टूट गई. सगाई टूटने के बाद से ही रतन टाटा ने कभी शादी नहीं की.

1991 में संभाली टाटा समूह की कमान


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28 दिसंबर 1937 के जन्मे रतना टाटा ने साल 1991 में टाटा समूह का नेतृत्व अपने हाथ में लिया. रतन टाटा ने अपने पूर्ववर्ती जेआरटी टाटा के उद्योगों का पुरोधा समझा जाता था. जब 80 के दशक में जेआरडी का नेतृत्व कमजोर पड़ने लगा था तब रतन टाटा ने टाटा समूह की कमान संभाली थी. आज पूरे दुनिया में टाटा समूह का डंका बचता है इसका एक सबसे प्रमुख कारण रतन टाटा का शानदार नेतृत्व है. मौजूदा वक्त में टाटा समूह के निहित कई सारी कंपनियां कार्य करती हैं.

नैनो थी ड्रीम प्रोजेक्ट


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रतन टाटा चाहते थे कि भारत का हर तबके का व्यक्ति अपने लिए कार खरीद सके, अपने इस सपने को पूरा करने के लिए रतन टाटा ने भारत की सबसे सस्ती कार नैनो भारत में उतारी. हालांकि यह रतन टाटा के उम्मीद के अपेक्षा भारतीय बाजार में करिश्मा नहीं कर सकी.

गुजराती और पारसी डिश खाने में है पसंद

बात रतन टाटा के खाने की करें तो रतना टाटा को चॉकलेट खाना काफी पसंद है. चॉकलेट के अलावा उन्हें पारसी डिश और गुजराती खाना का स्वाद लेना काफी अच्छा लगता है. रतन टाटा के शेफ परवेज पटे है जो खाने के दुनिया में काफी बड़ी नाम हैं. शेफ ने बताया कि रतन टाटा को मटन पुलाव दाल, अखरोट से भरपूर कस्टर्ड मसूर दाल लहसुन के साथ पकी हुई खाना काफी अच्छा लगता है.

लग्जरी कारों का है क्लेक्शन


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रतन टाटा के पास लग्जरी कारों का खास क्लेक्शन है. उनके पास जगुआर, मर्सिडीज एसएल 500, फरारी कैलिफोर्निया और लैंड रोवर फ्रीलैंडर जैसी नामचीन महंगी लग्जरी गाड़ियां मौजूद है.

आलीशान बंग्ले में रहते हैं रतन टाटा

रतन टाटा का बंग्ला काफी आलीशान है. इनके बंग्ले में हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध है. इनका बंग्ला मुंबई के कोलाबा में समुद्र किनारे बना हुआ है. ये तीन मंजिला बंगला 13 हजार वर्ग फीट में फैला हुआ है. वहीं, इसके पहले हिस्से में पार्टी के लिए सन डेक और लिविंग एरिया है. जबकि बाकी हिस्सों में जिम, लाइब्रेरी, स्वीमिंग पूल, लाउंज, स्टडी रूम है.

दुनिया के सबसे बड़े दानवीर


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हुरुन रिसर्च और एडेलगिव फाउंडेशन के अनुसार रतन टाटा दुनिया के सबसे बड़े दानवीर है. टाटा ट्रस्ट ने अब 7.60 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का दान किया है. टाटा ट्रस्ट ने जितना दान किया है उतना कई अरबपतियों का नेट वर्थ भी नहीं है.

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