इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को करनी थी 800000 बैरल तेल की डिलीवरी, भारत में एंट्री लेने से पहले वापस भेजी गई रूसी जहाज
Russian Crude Oil: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को डिलीवर करने के लिए यह जहाज 800,000 बैरल तेल के साथ गुजरात के वाडिनार बंदगार की ओर बढ़ रही थी कि तभी इसे रोक दिया गया.

Russian Crude Oil: भारतीय बंदरगाह अधिकारियों ने गुरुवार (27 मार्च, 2025) को अपर्याप्त दस्तावेजों के चलते रूसी कच्चे तेल से भरे एक पुराने टैंकर को एंट्री लेने से रोक दी. मामले से परिचित सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है. ऐसा आमतौर पर नहीं होता है. इससे रूसी तेल ले जाने वाले जहाजों की सख्ती से जांच होने के संकेत मिलते हैं.
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को करनी थी डिलीवरी
भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. रूस से समंदर के रास्ते भारत को तेल की सप्लाई की जाती है. 2024 में भारत ने कुल जितनी मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया है, उसमें से लगभग 35 फीसदी हिस्सा रूसी कच्चे तेल का है. भारत दुनिया भर में कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक और उपभोक्ता है.
शिपिंग डेटा के मुताबिक, तंजानिया के झंडे वाला अंडमान स्काईज में उत्तरी रूसी बंदरगाह मरमंस्क में रूसी तेल कंपनी लुकोइल के बेचे गए लगभग 100,000 मीट्रिक टन (या लगभग 800,000 बैरल) कच्चे तेल की लोडिंग हुई थी. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को डिलीवरी के लिए यह जहाज गुजरात के वाडिनार बंदगार की ओर बढ़ रहा था. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस जहाज को वापस भेज दिया गया.
इससे पहले दिसंबर में भारत आई थी ये जहाज
भारत में बंदरगाह प्रवेश नियमों के मुताबिक, 20 साल से अधिक पुराने जहाजों को इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ क्लासिफिकेशन सोसायटी के किसी सदस्य या भारत के समुद्री प्रशासन द्वारा अधिकृत इकाई की तरफ से समुद्री योग्यता प्रमाणन प्राप्त होना आवश्यक है.
सूत्रों ने बताया कि 2004 में बनी अंडमान स्काईज इससे पहले दिसंबर में भारत आई थी. उस वक्त इसके पास डकार क्लास सर्टिफिकेशन था. ये इंडिया बेस्ड है, लेकिन इसे भारतीय शिपिंग अधिकारियों ने मान्यता नहीं दी है. बता दें कि जनवरी में रूस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों से रूसी कच्चे तेल की डिमांड कम हुई है. अमेरिका के लगाए गए इस प्रतिबंध का मकसद रूस की इकोनॉमी पर सीधा वार करना था.
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Source: IOCL























