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5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची महंगाई, दिसंबर 2019 में खाने पीने की चीजों की महंगाई दर 14.12 फीसदी हुई

आमतौर पर सर्दियों के मौसम में खाने पीने की चीजों खासकर सब्जियों की कीमतें घट जाती हैं. इसी के चलते आमतौर पर सर्दियों के मौसम में महंगाई दर घटती है. लेकिन इस बार महंगाई दर उल्टी ही चाल से चल रही है.

नई दिल्लीः महंगाई के मोर्चे पर एक और बुरी खबर सामने आई है. जहां आमतौर पर सर्दियों के मौसम में खुदरा महंगाई दर कम होती है वही इस बार खुदरा महंगाई दर उल्टी चाल पर चल पड़ी है. लगातार पांच महीनों से खुदरा महंगाई दर बढ़ रही है. बीते दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर ने बीते लगभग 5 साल का का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बीते दिसंबर में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 7.35 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है. दिसंबर 2019 में खाने पीने की चीजों की महंगाई दर 14.12 फीसदी हो गई है.

जबकि पिछले महीने यानी कि नवंबर 2019 में खुदरा महंगाई दर का यह आंकड़ा 5.54 फ़ीसदी था. खुदरा महंगाई दर बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह खाने पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी है.

दिसंबर 2019 में खाने पीने की चीजों की महंगाई दर 14.12 फ़ीसदी बड़ी है. जबकि इससे पिछले महीने नवंबर में यह आंकड़ा 10.01 फीसदी का था. महंगाई दर के अगर रिकॉर्ड की हम बात करें तो जुलाई 2014 में महंगाई दर का आंकड़ा 7.39 फीसदी था. जुलाई 2014 के बाद पहली बार महंगाई का आंकड़ा दिसंबर 2019 में 7.35 फ़ीसदी का रहा है.

खाने-पीने की चीजें महंगी

आमतौर पर सर्दियों के मौसम में खाने पीने की चीजों खासकर सब्जियों की कीमतें घट जाती हैं. इसी के चलते आमतौर पर सर्दियों के मौसम में महंगाई दर घटती है. लेकिन इस बार महंगाई दर उल्टी ही चाल से चल रही है.

लगातार बीते 5 महीनों से महंगाई दर बढ़ रही है. महंगाई के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने पीने की चीजों की ज्यादा कीमतें होना है. खाने पीने की चीजों में भी सबसे ज्यादा इजाफा सब्जियों की कीमतों में देखने को मिल रहा है. प्याज, आलू और टमाटर के दाम लगातार बड़े हैं. इसके चलते ही महंगाई दर पर काबू रख पाना मुश्किल हो गया है.

क्या होगा असर

केंद्र सरकार का लक्ष्य महंगाई को 4 फ़ीसदी की रेंज में रखने का है. केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को महंगाई दर 4 फ़ीसदी की रेंज में रखने के लिए कहा है. इसमें 2 फ़ीसदी का मार्जिन है. यानी के महंगाई दर 6 फ़ीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

रिजर्व बैंक खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखकर ही मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा करता है. दिसंबर में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अपनी मॉनिटरी पॉलिसी में लगातार ब्याज दरों में कटौती के बाद इससे परहेज किया था.

दिसंबर की मॉनिटरी पॉलिसी में ब्याज दरों में कटौती न करने के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बढ़ती महंगाई दर को ही मुख्य वजह बताया था. ऐसे में अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को 6 फरवरी को अपनी मौद्रिक नीति यानी मॉनेटरी पॉलिसी की घोषणा करनी है.

ऐसे में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद तो कतई नहीं है बल्कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने की आशंका भी बन गई है. अगर महंगाई पर काबू नहीं पाया जाता है तो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सामने ब्याज दरें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

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