छोटे लोन पर खतरे की घंटी! RBI ने माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को किया सतर्क, देश में एटीएम की संख्या घटी
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्त संस्थानों से अपने ऋण बही खाते में दबाव बनने पर नजर रखने को कहा है. आइए जानते हैं, क्या कहती है आरबीआई की रिपोर्ट?

RBI Banking Report: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को छोटी राशि के कर्ज देने वाले वित्त संस्थानों से अपने ऋण बही खाते में दबाव बनने पर नजर रखने को कहा है. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ‘बैंकिंग में रुझान और प्रगति’ रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में दक्षिणी राज्यों में ऋण वितरण कम रहा.
यह रिपोर्ट कर्नाटक और तमिलनाडु में उद्योग को प्रभावित करने वाले कई कदमों के बीच आई है.
क्या कहती है रिपोर्ट?
इसके मुताबिक प्रदर्शन में सुधार के लिए उद्योग ने कई कदम उठाए हैं. साथ ही अगर आगे चलकर इस सेक्टर में दबाव बढ़ता है, तो विनियमित संस्थाओं को इस पर लगातार नजर बनाए रखने की जरूरत होगी.
पिछली कुछ तिमाहियों में ऋणदाताओं को सूक्ष्म वित्त खंड में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. जिसके कारण उधारकर्ताओं पर अत्यधिक कर्ज का बोझ रहा. इसके चलते उद्योग ने मिलकर कुछ सुरक्षा उपाय अपनाए, जिनमें एक ही उधारकर्ता को दिए जाने वाले ऋणों की संख्या सीमित करना भी शामिल है.
एटीएम की संख्या हुई कम
पैसे की निकासी के लिए इस्तेमाल होने वाली एटीएम की संख्या में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान हल्की गिरावट आई. जबकि बैंक शाखाओं में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. आरबीआई की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में मार्च, 2025 तक कुल 2,51,057 एटीएम सक्रिय थे. जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 2,53,417 था. निजी क्षेत्र के बैंकों के एटीएम नेटवर्क में तुलनात्मक रूप से अधिक गिरावट आई है.
प्राइवेट बैंकों के एटीएम कम हुए
निजी बैंकों के एटीएम साल भर पहले के 79,884 से घटकर 77,117 रह गए. वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एटीएम 1,34,694 से घटकर 1,33,544 रह गए. रिपोर्ट कहती है, एटीएम की संख्या घटने के पीछे डिजिटलीकरण के बढ़ते कदम और दोनों तरह के बैंकों द्वारा एटीएम की बंदी मुख्य कारण रहे.
हालांकि इसी दौरान स्वतंत्र रूप से संचालित व्हाइट लेबल एटीएम की संख्या बढ़कर 36,216 हो गई. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एटीएम ग्रामीण, कस्बाई, शहरी एवं महानगरीय क्षेत्रों में समान रूप से वितरित हैं जबकि निजी एवं विदेशी बैंकों का ध्यान मुख्य रूप से शहरी एवं महानगरीय क्षेत्रों पर केंद्रित है.
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Source: IOCL






















