New Income Tax Bill 2025: नए इनकम टैक्स बिल से परेशान कंपनियां, इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड से जुड़ा है मामला
Inter Corporate Dividend: किसी दूसरी कंपनी या ट्रस्ट से डिविडेंड पाने वाली कंपनी को अपने शेयर होल्डर्स के बीच डिविडेंड बांट देने के बाद भी अब टैक्स देने होंगे. छूट का लाभ नहीं मिलेगा.

Inter Corporate Dividend: नए इनकम टैक्स बिल की हर ओर वाहवाही हो रही है, लेकिन इस बिल ने एक खास मायने में कंपनियों के संकट बढ़ा दिए हैं. इसके तहत कपंनियों को इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड पर टैक्स की मार ज्यादा झेलनी पड़ेगी. 22 फीसदी टैक्सेशन का विकल्प चुनने वाली कंपनियों को पुराने कानून के डिविडेंड पर टैक्स से छूट का विकल्प नहीं मिलेगा.
इसका मतलब है कि किसी दूसरी कंपनी या ट्रस्ट से डिविडेंड पाने वाली कंपनी को अपने शेयर होल्डर्स के बीच डिविडेंड बांट देने के बाद भी टैक्स देने होंगे. पहले 22 फीसदी टैक्सेशन का विकल्प चुनने वाली कंपनी को टैक्स नहीं देना पड़ता था. केवल डिविडेंड का लाभ पाने वाले शेयरहोल्डर्स के खाते में यह टैक्स चुकाना होता था.
अभी के कानून में किस तरह है डिविडेंड पर टैक्स का सिस्टम
फाइनेंस एक्ट 2020 की धारा 80एम के तहत डबल टैक्सेशन से बचाने के लिए इंटर कॉरपोरेट डिविडेंड पर टैक्सेशन से छूट का इंतजाम किया गया है, ताकि एक ही डिविडेंड पर कंपनी और शेयर होल्डर्स दोनों को टैक्स का भार नहीं झेलना पड़े.
इसे ऐसे समझ लीजिए कि अगर कंपनी एक्स के पास कंपनी वाई के शेयर हैं, तो कंपनी एक्स को कंपनी वाई द्वारा दिया गया कोई भी डिविडेंड इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड माना जाता है. एक अप्रैल, 2020 को या उसके बाद प्राप्त इस तरह के इंटर-कॉरपोरेट डिविडेंड को टैक्स से छूट दी गई थी और कटौती की अनुमति दी गई थी.
घरेलू कंपनियों पर पड़ सकता है बड़ा असर
जानकारों का मानना है कि नए इनकम टैक्स बिल में 22 फीसदी टैक्सेशन के स्लैब चुनने वाली कंपनियों में इंटर कॉरपोरेट डिविडेंड पर इनकम टैक्स में छूट से मनाही कर दिए जाने के कारण घरेलू कंपनियों पर काफी बड़ा असर होगा. यह एक समस्या साबित हो सकती है, इसलिए विधेयक के कानून बनकर लागू होने से पहले ही इसके समाधान की जरूरत होगी.
नए विधेयक के अनुसार, अगर कंपनी एक्स 22 फीसदी रियायती कॉरपोरेट टैक्स रेट का विकल्प चुनती है, तो भी उसे 100 रुपये के डिविडेंड पर टैक्स देना होगा, क्योंकि कटौती उपलब्ध नहीं होगी. इसके अलावा शेयरधारकों को भी उसी 100 रुपये पर टैक्स देना होगा, जिस कारण डबल टैक्सेशन की नौबत पैदा हो रही है.
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