क्रूड ऑयल में तेजी और भागते विदेशी निवेशकों ने निकाला रुपये का दम, 'करेंसी की रिंग' में फिर खाई शिकस्त
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी का रुख बना रहा. सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 356.49 अंक टूटकर 83,219.75 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 94.90 अंक फिसलकर 25,588.40 अंक पर पहुंच गया.

Rupee vs Dollar: शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी दिन गिरावट के बीच सोमवार को भारतीय रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली. शुरुआती कारोबार में रुपया पांच पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.23 के स्तर पर पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से घरेलू मुद्रा पर दबाव बना हुआ है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और भारतीय निर्यात पर अमेरिका की ओर से अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने की आशंकाओं ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.
रुपये में फिर गिरावट
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, इन कारकों के चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि निवेशक इस सप्ताह आने वाले प्रमुख व्यापक आर्थिक आंकड़ों से पहले सतर्क रुख अपनाए हुए हैं. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 90.23 प्रति डॉलर पर खुला, जो पिछले बंद भाव से पांच पैसे कम था.
शुक्रवार को रुपया 28 पैसे की गिरावट के साथ 90.18 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था. इस दौरान छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 98.75 पर रहा.
फिसला शेयर बाजार
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी का रुख बना रहा. सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 356.49 अंक टूटकर 83,219.75 अंक पर आ गया, जबकि निफ्टी 94.90 अंक फिसलकर 25,588.40 अंक पर पहुंच गया. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63.44 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने शुद्ध रूप से 3,769.31 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जिससे बाजार और रुपये दोनों पर दबाव बढ़ गया.
बाजार के जानकारों के मुताबिक इस समय कई ऐसे वैश्विक और घरेलू कारक हैं, जिनका सीधा असर भारतीय रुपये पर पड़ता दिख रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेनेजुएला और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक हालात, साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर संभावित कदमों ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर भी पड़ रहा है. इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 9 जनवरी को जारी आंकड़ों से यह संकेत मिला है कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है. 2 जनवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 9.809 अरब डॉलर घटकर 686.801 अरब डॉलर रह गया, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
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Source: IOCL























