डॉलर के सामने नहीं टिक पा रहा रुपया, 2026 में कितनी बड़ी आएगी गिरावट? जानें एक्सपर्ट का अंदेशा
व्यापार समझौतों में देरी का असर बीते कुछ महीनों में साफ तौर पर देखने को मिला है, जब भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया.

पिछले वर्ष भारतीय रुपये में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और आगे भी इसमें दबाव बने रहने की आशंका जताई जा रही है. इन्वेस्टमेंट बैंक यूबीएस में हेड ऑफ एशिया एफएक्स एंड रेट्स स्ट्रैटजी रोहित अरोड़ा के मुताबिक, वर्ष 2026 में भारतीय रुपये में करीब 4 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. उनका मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौतों में हो रही देरी, जीडीपी वृद्धि दर में सुस्ती और इसके चलते देश से पूंजी निकासी की संभावना रुपये पर लगातार दबाव बना रही है.
इस साल और टूटेगा रुपया!
व्यापार समझौतों में देरी का असर बीते कुछ महीनों में साफ तौर पर देखने को मिला है, जब भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया. इस दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सीमित दखलअंदाजी ने भी रुपये की कमजोरी को कुछ हद तक बढ़ाया. महज 231 दिनों के भीतर रुपया डॉलर के मुकाबले 85 से टूटकर 90 के स्तर तक पहुंच गया, जो विदेशी मुद्रा बाजार में बढ़ते दबाव का संकेत माना जा रहा है. दिसंबर में तो रुपये ने डॉलर के मुकाबले 91 का स्तर भी पार कर लिया, जिसके बाद आरबीआई को हस्तक्षेप कर गिरावट थामनी पड़ी.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले दो तिमाहियों से रुपये में जारी गिरावट के पीछे अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक स्तर पर टैरिफ विवाद बड़ी वजह रहे हैं. दुनिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार तनाव का असर सीधे तौर पर भारतीय निर्यातकों पर पड़ा है, जबकि आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने से रुपये पर दबाव और गहरा गया है.
क्यों आ रही गिरावट?
हालांकि, हालिया कारोबारी सत्र में रुपये को कुछ राहत जरूर मिली. बुधवार, 7 जनवरी को रुपया 31 पैसे की मजबूती के साथ डॉलर के मुकाबले 89.87 (अस्थायी) पर बंद हुआ. आरबीआई के संभावित हस्तक्षेप और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.20 पर खुला और 89.75 से 90.23 के दायरे में कारोबार के बाद मजबूत होकर बंद हुआ. इससे एक दिन पहले मंगलवार को भी रुपया 12 पैसे की तेजी के साथ 90.18 पर बंद हुआ था, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि दीर्घकालिक दबाव अब भी बना रह सकता है.
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