एक्सप्लोरर

Explained: तो क्या अब रील से कमाई बंद? इन्फ्लूएंसर्स इकोनॉमी में कैसे पड़ रही दरारें, ब्रांड एंडोर्समेंट क्यों चल रहे चालें?

Influencer Economy Crisis: यह इकोनॉमी 'क्वाइट रीसेट' से गुजर रही है. ब्रांड्स अब इन्फ्लुएंसरों पर अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं. 'इंडियाज गॉट लेटेंट' जैसे विवादों ने ब्रांड्स को सतर्क कर दिया है.

भारत की इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी बीते कुछ सालों में जिस रफ्तार से बढ़ी है, उसे देखकर लगता था कि यह सेक्टर अब पीछे मुड़कर नहीं देखेगा. 2023 में 1,900 करोड़ रुपये का यह बाजार 2027 तक बढ़कर 3,400 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान था. लेकिन असलियत है कि यह बाजार 5,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार करने की राह पर है. यानी अनुमान से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि, जैसे-जैसे यह बाजार बड़ा हो रहा है, वैसे-वैसे इसकी कमजोरियां भी उजागर हो रही हैं. पेमेंट में देरी, एजेंसियों की भरमार और भरोसे की कमी वो दरारें हैं जो इस इकोनॉमी में दिखने लगी हैं...

पेमेंट में देरी बना सबसे बड़ा सिरदर्द

इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी में सबसे बड़ी समस्या पेमेंट को लेकर है. फूड क्रिएटर आयुष सप्रा ने मनीकंट्रोल को बताया, 'आज क्रिएटर्स के लिए ब्रांड्स या एजेंसियों पर फौरन भरोसा करना बहुत मुश्किल हो गया है. भरोसा बनने में समय लगता है, खासकर जब बात पेमेंट की हो.'

पेमेंट्स में देरी होने की दो बड़ी वजहें हैं:

  • एजेंसियों पर काम का बोझ: इन्फ्लुएंसर-मार्केटिंग एजेंसी ओप्राह के को-फाउंडर प्रणव पनपालिया कहते हैं कि एजेंसियों को क्रिएटर्स को जल्दी पेमेंट करनी होती है, जबकि क्लाइंट्स के पेमेंट टर्म्स काफी लंबे होते हैं, जिससे वर्किंग कैपिटल पर दबाव बनता है. यानी एजेंसी के पास पैसा आता तो है, लेकिन देर से, जबकि उसे क्रिएटर को समय पर देना होता है. इस बीच का गैप ही देरी की वजह बनता है.
  • क्रिएटर्स की भरमार: एजेंसियां अब 30 दिन या उससे ज्यादा की पेमेंट टर्म्स ऑफर कर रही हैं, क्योंकि उन्हें ऐसे क्रिएटर्स की कमी नहीं है जो ऐसी शर्तें मान लें. यानी अगर कोई क्रिएटर ये शर्तें नहीं मानता, तो एजेंसी को दूसरा क्रिएटर मिल ही जाएगा.

क्या इन्फ्लूएंसर इकोनॉमी में सिर्फ देरी से पेमेंट मिलना ही परेशानी है?

नहीं, इससे भी बड़ी समस्या- कोई ऑफिशियल एग्रीमेंट नहीं होना है. आयुष सप्रा ने बताया, 'मुझे ऐसे ब्रांड्स और एजेंसियों ने भी कॉन्टैक्ट किया जिन्होंने कोई ऑफिशियल एग्रीमेंट या ईमेल ट्रेल भी ऑफर नहीं किया. वे सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज या फोन कॉल के आधार पर डील करना चाहते थे.' छोटे क्रिएटर्स के पास अक्सर इन डील्स से मना करने का ऑप्शन नहीं होता.

2,000 एजेंसियों में सिर्फ 35 के हाथ में 70% बाजार

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में एक और बड़ी समस्या है कि एजेंसियां बहुत ज्यादा हो गई हैं. भारत में 1,500 से 2,000 इन्फ्लुएंसर-मार्केटिंग एजेंसियां हैं.

IPLIX मीडिया के को-फाउंडर और CEO नील गोगिया के मुताबिक, टॉप की 30-35 एजेंसियां 4,000 करोड़ रुपये के बाजार का 70-75% हिस्सा संभालती हैं. यानी बाकी की 1,200 से ज्यादा छोटी एजेंसियां बचे हुए 25-30% बाजार के लिए आपस में लड़ रही हैं.

नील गोगिया ने आगे बताया, 'महीने में 1-2 करोड़ रुपये का कारोबार करना आसान है क्योंकि बहुत सारे क्रिएटर्स और ब्रांड्स हैं, लेकिन इससे आगे बढ़ना मुश्किल है.' ज्यादातर एजेंसियां 20 लाख से 1 करोड़ रुपये के रेवेन्यू ब्रैकेट में काम करती हैं और अक्सर   सिर्फ 2-3 बड़े क्लाइंट्स के भरोसा रहती हैं.

छत्रबॉक्स के MD और CEO राज मिश्रा ने कहा, 'जब किसी शख्स के पास इंस्टाग्राम हैंडल की स्प्रेडशीट हो, वह खुद को एजेंसी कह सकता है. ब्रांड्स के लिए यह बताना मुश्किल हो जाता है कि कौन असल में स्ट्रैटेजिक काम कर रहा है और कौन सिर्फ ट्रांजैक्शन कर रहा है.'

मार्जिन पर घटती कमाई का बढ़ता दबाव

एजेंसियों की भरमार का एक और असर यह है कि मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है. राज मिश्रा ने साफ कहा, 'एजेंसियां अब वैल्यू के बजाय कीमत पर कॉम्पिटीशन कर रही हैं, जो लंबे समय में टिकाऊ नहीं है.' इसका मतलब यह हुआ कि एजेंसियां एक-दूसरे से सस्ते दरों पर काम ले रही हैं, जिससे उनकी अपनी कमाई घट रही है. इससे क्रिएटर्स की फीस बढ़ रही है, लेकिन ROI (निवेश पर वापसी) को मापने में गड़बड़ है. नतीजतन, बाजार में हर कोई बिजी है, लेकिन हर कोई मुनाफे में नहीं है.'

ASCI की रिपोर्ट से टूटता भरोसा

पेमेंट और एजेंसियों की समस्या के अलावा इस इकोनॉमी के सामने एक और बड़ा संकट है- भरोसा. एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने 2025 में 1,609 इन्फ्लुएंसर-बेस्ड एडवर्टाइजमेंट मामलों की जांच की. चौंकाने वाली बात यह है कि   97% से ज्यादा मामलों में संशोधन या सुधारात्मक कार्रवाई की जरूरत पड़ी. इनमें:

  • 50% से ज्यादा उल्लंघन अवैध उत्पादों के प्रमोशन से जुड़े थे. इसमें ऑफशोर बेटिंग प्लेटफॉर्म और शराब शामिल हैं.
  • 869 इन्फ्लुएंसर अवैध बेटिंग या दूसरे प्रतिबंधित कैटेगरी के प्रमोशन में पकड़े गए.
  • फोर्ब्स इंडिया की टॉप 100 डिजिटल स्टार्स लिस्ट में शामिल इन्फ्लुएंसरों में 76% 2025 में उल्लंघन में पाए गए, जो 2024 के 69% से ज्यादा था.

ASCI ने साफ चेतावनी दी है, 'इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की तेज ग्रोथ ने जवाबदेही व्यवस्था को पीछे छोड़ दिया है.'

आखिर इन्फ्लूएंसर्स के साथ क्यों हो रहा है 'क्वाइट रीसेट'?

ETPlay की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी 'क्वाइट रीसेट' से गुजर रही है. ब्रांड्स अब इन्फ्लुएंसरों पर अपने खर्चों में कटौती कर रहे हैं और ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं. अब किसी भी विवादास्पद चूक या लापरवाह सोशल मीडिया पोस्ट से किसी बड़े ब्रांड एंडोर्समेंट को नुकसान पहुंच सकता है. 'इंडियाज गॉट लेटेंट' जैसे हालिया विवादों ने ब्रांड्स को और सतर्क कर दिया है.

क्या इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी मुश्किल में है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत की इन्फ्लुएंसर इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ कई दरारें भी सामने आ रही हैं:

  • पेमेंट में देरी: क्रिएटर्स को 30 दिन या उससे ज्यादा का इंतजार करवाना और कोई ऑफिशियल एग्रीमेंट नहीं करना.
  • एजेंसियों की भरमार: 2,000 एजेंसियां, लेकिन सिर्फ 30-35 एजेंसियों के हाथ में 70-75% बाजार है.
  • मार्जिन पर दबाव: कीमत पर प्रतिस्पर्धा, मुनाफा घट रहा है.
  • भरोसे की कमी: 97% मामलों में उल्लंघन, तो 76% टॉप इन्फ्लुएंसर नियम तोड़ रहे.
  • ब्रांड्स का सतर्क होना: खर्चों में कटौती और ज्यादा जांच-पड़ताल का पैंतरा.

ASCI ने चेतावनी दी है कि अगर ये दरारें नहीं भरी गईं, तो इन्फ्लूएंसर इकोनॉमी मुश्किलों में पड़ सकती है. आने वाले दिनों में ही यह तय होगा कि यह अपनी दरारों को पाट पाता है या बिखर जाता है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

RBI MPC Meeting August 2026: क्या होम और कार लोन पर सस्ती होगी EMI? रेपो रेट आज RBI का फैसला
RBI MPC Meeting August 2026: क्या होम और कार लोन पर सस्ती होगी EMI? रेपो रेट आज RBI का फैसला
Gold-Silver Price Today: सुबह- सुबह सोने में मामूली गिरावट, जानें अपने शहर में 18K, 22K, 24K सोना और चांदी का भाव
Gold-Silver Price Today: सुबह- सुबह सोने में मामूली गिरावट, जानें अपने शहर में 18K, 22K, 24K सोना और चांदी का भाव
अब सस्ता होकर रहेगा पेट्रोल-डीजल! 80 डॉलर से नीचे आया क्रूड ऑयल
अब सस्ता होकर रहेगा पेट्रोल-डीजल! 80 डॉलर से नीचे आया क्रूड ऑयल
5 अगस्त को आपके शहर में कितने का मिलेगा 14 किलो वाला गैस सिलेंडर, देखें एलपीजी की रेट लिस्ट
5 अगस्त को आपके शहर में कितने का मिलेगा 14 किलो वाला गैस सिलेंडर, देखें एलपीजी की रेट लिस्ट
Advertisement

वीडियोज

Mannat: Dhairya का खतरनाक खेल फेल, Mannat ने बचा लिया Vikrant को मौत के मुंह से!
Bollywood News: सोहेल को सपोर्ट करने पहुंचे सलमान खान, जेल के दिनों और 16 किलो वेट लॉस पर किया खुलासा (04.08.26)
Bigg Boss 20 में क्या है Salman Khan का Karan Arjun Secret? Promo ने बढ़ाई उत्सुकता
Salman Khan का Emotional खुलासा, Sohail Khan Divorce और Jail Days पर पहली बार करी चर्चा
Lock Upp 2 में Harshad Chopda ने Shivangi Joshi के लिए किया बड़ा Sacrifice, फैंस हुए इमोशनल
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'किसी भी कीमत पर हो डील', ईरान से समझौते के लिए क्यों बेताब हैं ट्रंप?
'किसी भी कीमत पर हो डील', ईरान से समझौते के लिए क्यों बेताब हैं ट्रंप?
राहुल गांधी रांची क्यों नहीं गए? संजय निरुपम का कांग्रेस पर हमला
राहुल गांधी रांची क्यों नहीं गए? संजय निरुपम का कांग्रेस पर हमला
'आप मर्द हैं तो...' तृषा पर स्टालिन के कमेंट के बाद खुशबू सुंदर का फूटा गुस्सा
'आप मर्द हैं तो...' तृषा पर स्टालिन के कमेंट के बाद खुशबू सुंदर का फूटा गुस्सा
मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में क्या अंतर होता है?
मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में क्या अंतर होता है?
'अपना इमोशनल साइड नहीं दिखाना चाहता था', 'लॉक अप 2' से एविक्शन के बाद बोले हर्षद चोपड़ा
'इमोशनल साइड नहीं दिखाना चाहता था', 'लॉक अप 2' से एविक्शन के बाद बोले हर्षद चोपड़ा
'A फॉर एप्पल नहीं अमरूद पढ़िए, तभी होगा देश का विकास', अनिरुद्धाचार्य का नया 'ज्ञान'
'A फॉर एप्पल नहीं अमरूद पढ़िए, तभी होगा देश का विकास', अनिरुद्धाचार्य का नया 'ज्ञान'
लाल सागर में कैसे डूबा भारतीय जहाज? सभी 13 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया, जानें अपडेट
लाल सागर में कैसे डूबा भारतीय जहाज? सभी 13 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया, जानें अपडेट
Biryani Cooking Tips: हैदराबादी या मुरादाबादी... कौन सी बिरयानी में दम? घर पर खुद बनाकर देखो
हैदराबादी या मुरादाबादी... कौन सी बिरयानी में दम? घर पर खुद बनाकर देखो
Embed widget