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F&O Classroom: ऑप्शन ट्रेडिंग करते समय इन 5 गलतियों से बचें इन्वेस्टर, तो नहीं होगा कभी भी नुकसान

Option Trading: ऑप्शन ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा तो होता ही है, लेकिन नुकसान भी तगड़ा होता है. अगर आप नुकसान से बचना चाहते हैं तो आपको इन 5 गलतियों से बचने की जरूरत है...

ऑप्शन ट्रेडिंग कम समय और कम पूंजी से मोटा लाभ कराने की क्षमता के कारण भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रही है. हालांकि, ट्रेडर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जैसे ऑप्शंस ट्रेडिंग आपको भरपूर लाभ कमाने में मदद कर सकती है, वैसे ही इससे भारी नुकसान भी हो सकता है. यही कारण है कि शेयर बाजार नियामक सेबी ने लगातार ऑप्शंस ट्रेडिंग के नुकसान पर प्रकाश डाला है. सेबी की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि लगभग 90 फीसदी ट्रेडर्स को फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) में नुकसान उठाना पड़ता है. हालांकि, इन नुकसानों से आसानी से बचा जा सकता है. आइए जानते हैं कि ऑप्शन ट्रेडिंग में किन गलतियों के कारण नुकसान होता है...

अच्छी तरह से जांच-पड़ताल और समझ की कमी

चाहे कोई इक्विटी, कमोडिटी या डेरिवेटिव (एफएंडओ) बाजारों में ट्रेडिंग कर रहा हो या निवेश कर रहा हो, यह जानना महत्वपूर्ण है कि बाजार कैसे काम करता है. बाजार के बारे में अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करना बेहद जरूरी है. विशेष रूप से ऑप्शंस ट्रेडिंग से पहले, किसी को डेरिवेटिव बाजार में उतरने से पहले स्ट्राइक प्राइस, प्रीमियम, इम्प्लाइड वोलैटिलिटी, कॉल/पुट, ग्रीक और रणनीतियों जैसी बुनियादी अवधारणाओं को समझ लेना चाहिए. इन अवधारणाओं और शब्दावली की समझ न होने के चलते ट्रेडर्स को नुकसान उठाना पड़ सकता है.

ऐसे ऑप्शंस में ट्रेडिंग जो लिक्विड नहीं हैं

लिक्विडिटी का अर्थ है किसी ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट में जब चाहे एंट्री करने या एक्जिट करने की सुविधा. मान लीजिए कि आप एक इलिक्विड ऑप्शन कांट्रैक्ट खरीदते या बेचते हैं, तो आप या तो डिलीवरी ले सकते हैं या आप सही भाव पर एक्जिट नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा, इलिक्विड ऑप्शंस में बिड-आस्क स्प्रेड अधिक होता है, जो आपकी प्रॉफिटेबिलिटी पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है. यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ऑप्शंस की लिक्विडिटी का अनुमान उस कॉन्ट्रैक्ट के लिए स्ट्राइक के वॉल्यूम और ओपन इंटरेस्ट के माध्यम से लगाया जा सकता है.

दूर दिखाई देने वाले ओटीएम ऑप्शंस की लालच

ऐसे ऑप्शंस जिनकी स्ट्राइक प्राइसेज अंडरलाइंग एसेट के मौजूदा बाजार मूल्य (जिन्हें फार ओटीएम विकल्प भी कहा जाता है) से बहुत दूर हैं, आमतौर पर बाजार मूल्य (एटीएम विकल्प) के करीब कीमत वाले ऑप्शंस की तुलना में कम प्रीमियम होता है. यह ऑप्शन खरीदारों के लिए दूर के ओटीएम ऑप्शंस को आकर्षक बनाता है. लेकिन, सुदूर ओटीएम ऑप्शंस के लाभदायक होने की संभावना कम है. ऐसा इसलिए है क्योंकि दूर के ओटीएम ऑप्शंस से पैसा कमाने के लिए, ऑप्शंस के अंडरलाइंग एसेट को बहुत अधिक स्थानांतरित करना पड़ता है.

अस्थिरता की अनदेखी

किसी ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट की कीमत या प्रीमियम निर्धारित करने में अस्थिरता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उदाहरण के लिए, जब अस्थिरता अधिक होती है, तो प्रीमियम भी अधिक होता है. इसी तरह जब अस्थिरता कम होती है, तो प्रीमियम आमतौर पर कम होता है. इसलिए, ट्रेडर्स को अस्थिरता को नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए. ऐसा इसलिए है क्योंकि रणनीति तय करते समय ऑप्शंस की कीमत प्रमुख मापदंडों में से एक है.

ग्रीक्स को नजरंदाज करना

ग्रीक्स वो प्रमुख संकेतक हैं, जो ऑप्शंस की रणनीति तैयार करने में मदद करते हैं. उदाहरण के लिए, डेल्टा हमें बताता है कि अंडरलाइंग एसेट की कीमत में प्रत्येक इकाई परिवर्तन के लिए ऑप्शंस की कीमत कितनी बदलेगी, जबकि थीटा ऑप्शन मूल्य निर्धारण पर टाइम डिके के प्रभाव को प्रकट करता है, वेगा अस्थिरता के प्रभाव को समझने में मदद करता है. इस प्रकार, ऑप्शंस की ट्रेडिंग करते समय ग्रीक्स की बुनियादी समझ आवश्यक है.


F&O Classroom: ऑप्शन ट्रेडिंग करते समय इन 5 गलतियों से बचें इन्वेस्टर, तो नहीं होगा कभी भी नुकसान

डिस्‍क्‍लेमर- लेखक अपस्‍टॉक्‍स के डायरेक्‍टर हैं. प्रकाशित विचार उनके निजी हैं. शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्‍तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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