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देश भर में बदल गए पीएफ के 74 साल पुराने नियम, जानें नई EPF स्कीम में आपके लिए क्या कुछ है नया?
New EPF scheme 2026: 1 जुलाई से लागू EPF Scheme 2026 ने 70 साल पुरानी EPF Scheme 1952 की जगह ले ली है. EPF अब सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 का हिस्सा बन गई है.

New EPF scheme 2026 में क्या-क्या बदला?
Source : ABPLive
EPF New Scheme: नई एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड (EPF) स्कीम 2026 को इस हफ्ते सरकार ने देश भर में लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने 'सोशल सिक्योरिटी कोड 2020' को लागू करने के तहत इसका ऐलान किया है, जिसने पुरानी EPF स्कीम 1952 की जगह ली है. इसका मकसद पीएफ के नियमों को आसान बनाना और इसके आठ करोड़ सब्सक्राइबर्स डिजिटल सुविधा मुहैया कराना है ताकि पारदर्शिता बढ़े, कागजी कार्रवाई कम हो और काम करने का प्रॉसेस भी आसान हो. कुल मिलाकर इसका मकसद यूजर्स के लिए फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी को बेहतर बनाना है कि नौकरी छोड़ने से पहले या इसके बाद वे फंड का इस्तेमाल बेहतर तरीके से कर सके.
यूजर्स के लिए क्या कुछ बदला?
- नए नियमों के मुताबिक, 15000 रुपये तक की बेसिक सैलरी पर 12% यानी अधिकतम 1800 रुपये प्रति माह का पीएफ कंट्रीब्यूशन जारी रहेगा. हालांकि, अगर आपकी सैलरी ज्यादा हो, तो एक्स्ट्रा पीएफ कटवाना आपकी मर्जी पर निर्भर करेगा. मान लीजिए कि आपकी सैलरी प्रति माह 1 लाख रुपये है, तो इस स्थिति में कंपनी आपकी अनुमति के बगैर 1800 रुपये से अधिक पीएफ नहीं काट सकती.
- नई स्कीम में सरकार ने आंशिक निकासी के नियमों को भी आसान बनाया है. अब पीएफ की आंशिक निकासी की 13 श्रेणियों को घटाकर इसे 3 श्रेणियों में समेट दिया गया है. 1- आवश्यक जरूरतें (बच्चों की पढ़ाई, शादी और बीमारी), 2- आवास की जरूरतें और 3- विशेष परिस्थितियां.
- नए नियमों के तहत, अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ देता है, तो पूरा पीएफ निकालने के लिए न्यूनतम सदस्या अवधि की शर्तें लागू नहीं होगी. इसके अलावा, अगर EPFO बिना किसी ठोस वजह के सेटलमेंट में देरी करता है, तो इस स्थिति में सदस्य को 12% की दर से ब्याज भी दिया जाएगा.
- नई स्कीम के तहत, सदस्यों को अपने आधार, PAN और आधार से जुड़े बैंक अकाउंट की जानकारी देनी होगी ताकि क्लेम और दूसरी सेवाओं की डिजिटल प्रोसेसिंग की जा सके. इसका मकसद आंशिक निकासी (partial withdrawal) और दूसरी सेवाओं के लिए ऑनलाइन क्लेम को आसान बनाना है.
- नई स्कीम के लागू होने के 15 दिनों के भीतर कंपनी या नियोक्ता को फॉर्म-5 में कर्मचारियों के आधार, पैन, UAN, ग्रॉस वेज से जुड़ी सारी जानकारियां अपडेट करानी होंगी.
- नए नियमों के तहत आंशिक निकासी (partial withdrawal) के लिए EPF खाते में कम से कम 25% बैलेंस बनाए रखना जरूरी किया गया है. यानी कि अपनी कुल जमा राशि में से 50-75% तक निकाल सकते हैं.
क्या पहले जैसा ही रहा?
- अनिवार्य EPF योगदान में कोई बदलाव नहीं किया गया है. कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अनिवार्य पीएफ योगदान पहले की ही तरह मूल वेतन का 12% बना रहेगा, जबकि कुछ अधिसूचित संस्थानों के लिए मौजूदा 10% की दर लागू रहेगी.
- नई स्कीम के तहत मौजूदा EPF सब्सक्राइबर्स की सदस्यता बिना किसी रूकावट के जारी रहेगी. यानी कि वे अपने-आप EPF स्कीम, 2026 के तहत सदस्य बन जाएंगे. इसके लिए उन्हें कोई नया खाता खुलवाने वगैरह की जरूरत नहीं पड़ेगी.
- नई स्कीम की वजह से 'एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस' (EDLI) स्कीम के तहत मिलने वाले फायदों में कोई बदलाव नहीं होगा.अकाउंट होल्डर की मौत होने पर नॉमिनी और कानूनी वारिसों के लिए कम से कम 50,000 और ज्यादा से ज्यादा 7 लाख का इंश्योरेंस पेमेंट मिलना तय है.
- एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम 1995 (EPS 95) के मौजूदा सदस्य अपने आप ही EPS 2026 के सदस्य बन जाएंगे. उन्हें पहले से स्वीकृत पेंशन भी बिना किसी रूकावट के मिलती रहेगी.
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