9.1% का भारी रिटर्न या सरकारी गारंटी? बैंक और कॉर्पोरेट FD में बेहतर?
Corporate FD vs Bank FD: कॉर्पोरेट FD सालाना 9.1% तक का रिटर्न देती हैं, जो आमतौर पर बैंक FD से 1-3% ज्यादा होता है इसलिए बेहतर रिटर्न के लिए ये आकर्षक विकल्प हैं. हालांकि, इसमें जोखिम भी कम नहीं.

- बैंक FD सुरक्षित हैं, कॉर्पोरेट FD में अधिक ब्याज मिलता है.
- बैंक FD में सरकार ₹5 लाख तक की सुरक्षा देती है.
- कॉर्पोरेट FD में कंपनी दिवालिया होने पर पैसा डूब सकता है.
- कॉर्पोरेट FD की सुरक्षा कंपनी रेटिंग (AAA) देखकर जांचें.
FD Investment Alert: फिक्स्ड डिपॉजिट (FDs) लंबे समय से भारतीयों के लिए भरोसेमंद निवेश विकल्पों में से एक रहे हैं क्योंकि गारंटीड रिटर्न के साथ इसमें टैक्स बेनिफिट भी शामिल है.
फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा डूबने का कोई डर ही नहीं रहता क्योंकि ये मार्केट लिंक्ड नहीं हैं. यानी कि मार्केट के उतार-चढ़ाव से ये प्रभावित नहीं होते हैं. यही वजह है कि निवेश के लिए लोग बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट को काफी पसंद करते हैं. लेकिन हाल के सालों में कॉर्पोरेट या कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट भी खूब मशहूर हुए हैं क्योंकि आमतौर पर इनमें ब्याज दरें काफी ज्यादा मिलती हैं.
दोनों में क्या है अंतर?
बैंक FD के उलट, कॉर्पोरेट FD को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs), हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों (HFCs) और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा मैनेज किया जाता है. इसमें कंपनी निवेशकों से पैसा लेती है और तय समय बाद ब्याज के साथ लौटाती है. इसके लिए कंपनी फॉर्म जारी करती है, जिसे अब ऑनलाइन भी आसानी से भरा जा सकता है. कुल मिलाकर कॉरपोरेट FD और बैंक FD दोनों ही फिक्स्ड डिपॉजिट के ही विकल्प हैं, फर्क बस जोखिम और रिटर्न भर का होता है. बेशक कॉरपोरेट FD में आमतौर पर बैंक FD के मुकाबले ब्याज ज्यादा मिलता है, लेकिन इसमें जोखिम ज्यादा रहता है.
कैसे काम करता है कॉर्पोरेट FD?
बैंक FD में आप बैंकों के पास पैसा जमा कराते हैं और बैंक उसके बदले आपको ब्याज देता है. ठीक इसी तरह से कॉरपोरेट FD में आप एक तरह से बड़ी-बड़ी कंपनियों को ब्याज पर उधार देते हैं.
कई बड़ी कंपनियों को अपना बिजनेस चलाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है, तो ये आम जनता से उधार लेते हैं और बदले में बैंक के मुकाबले ज्यादा रिटर्न देते हैं. इसमें आप एक तय समय (1, 2 या 5 साल) के लिए अपना पैसा कंपनी के पास जमा कराते हैं. कंपनी आपको एक सर्टिफिकेट देती है, जिस पर ब्याज समेत सारा ब्यौरा लिखा होता है. मैच्योरिटी के वक्त आपको अपना प्रिंसिपल अमाउंट इंटरेस्ट सहित वापस मिल जाता है.
बैंक FD से कितना अलग है कॉर्पोरेट FD?
बैंक FD में सरकार सुरक्षा की गारंटी देती है. अगर किसी स्थिति में बैंक डूब भी जाए, तो सरकार आपने 5 लाख तक का बीमा गारंटी देती है. जबकि कॉरपोरेट FD में कोई सरकारी गारंटी नहीं होती है. अगर कंपनी कंगाल हो गई, तो आपका पैसा फंस भी सकता है. बस इसी जोखिम के बदले कंपनियां बैंक FD के मुकाबले 1-2% ज्यादा ब्याज देती हैं.
बैंक FD बनाम कॉर्पोरेट FD
| फीचर | बैंक FD | कॉर्पोरेट FD |
| ब्याज दर | आमतौर पर 6.50% -7.80% तक | 7.90% - 9.10% तक |
| सुरक्षा की गारंटी | RBI की DICGC स्कीम के तहत 5 लाख तक का बीमा | कोई सरकारी गारंटी नहीं |
| लिक्विडिटी | 0.5% - 1% पेनल्टी के साथ कभी भी निकाल सकते हैं | शुरुआत के 3 महीने तक लॉक-इन |
| मूल्यांकन का तरीका | RBI करती है निगरानी | रेटिंग एजेंसियों के भरोसे |
कॉर्पोरेट FD के 3 बड़े जोखिम
- जैसे कि पहले ही बताया जा चुका है कि बैंक डूबने की स्थिति में सरकार आपके 5 लाख तक सुरक्षित रखने की गारंटी देती है. लेकिन कॉर्पोरेट FD में अगर कंपनी डूबती है या दिवालिया हो जाती है, तो आपका पूरा पैसा फंस भी सकता है.
- कॉर्पोरेट FD का लॉक-इन पीरियड बड़ा होता है. RBI के नियम के मुताबिक, आप किसी भी कंपनी FD से शुरुआती 3 महीने के भीतर अपना पैसा नहीं निकाल सकते हैं. इसमें 3-6 महीने के भीतर पैसा निकालने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है.
- कॉर्पोरेट FD में 9.10% तक का ब्याज केवल वही कंपनियां देती हैं, जिनकी रेटिंग 'A' या 'AA' होती है.
सुरक्षित कंपनी की कैसे करें पहचान?
CRISIL या ICRA जैसी रेटिंग एजेंसियां कंपनियों को उनकी सुरक्षा जांचने के बाद सर्टिफिकेट देती हैं. इसके आधार पर आप एक अंदाजा लगा सकते हैं.
AAA- यह सबसे सुरक्षित है. इसमें पैसा डूबने का खतरा न के बराबर है.
AA या A- यह भी काफी हद तक सुरक्षित है, लेकिन इसमें जोखिम की स्थिति बनी रहती है.
B या C- इस रेटिंग वाली कंपनियां बेहद खतरनाक होती हैं. इसमें पैसा डूबने का खतरा कई गुना ज्यादा रहता है.
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