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मोदी सरकार के चार सालः खाने-पीने के सामान पर राहत, पेट्रोल-डीजल पर आफत

मोदी सरकार के पिछले चार साल के कार्यकाल में आटा, चावल जैसी जरूरी ग्राहक के रोजाना के इस्तेमाल की वस्तुओं के दाम इनके न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई बढ़त को देखते हुये ज्यादा नहीं बढ़े.

नई दिल्लीः आज से ठीक चार साल पहले मोदी सरकार ने केंद्र सरकार की बागडोर संभाली थी. सरकार ने चुनावों से पहले वादा किया था कि वो महंगाई को काबू में करेगी और आम जनता की जेब को राहत मिलेगी. आज जब 4 साल बीत चुके हैं तो आपको वाकई में कितनी राहत मिली है इसका फैसला जनता 2019 में आने वाले चुनावों में करेगी.

मोदी सरकार के पिछले चार साल के कार्यकाल में आटा, चावल जैसी जरूरी ग्राहक के रोजाना के इस्तेमाल की वस्तुओं के दाम इनके न्यूनतम समर्थन मूल्य में हुई बढ़त को देखते हुये ज्यादा नहीं बढ़े. सरकारी उपायों से दाल-दलहन उतार-चढ़ाव के बाद पहले के स्तर पर आ गये, चीनी के दाम 10 फीसदी नीचे हैं.

लेकिन ब्रांडेड तेल, साबुन जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल मैन्यूफैक्चर्ड उत्पादों में इस दौरान आठ से 33 फीसदी की बढ़त देखी गई.

पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से हुई आफत हालांकि, पिछले कुछ महीने से पेट्रोल, डीजल के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई को लेकर सरकार की आगे की राह कठिन नजर आती है. दिल्ली में पेट्रोल 78.01 रुपये और डीजल का दाम 68.94 रुपये के आसपास पहुंच गया है. देश के कुछ राज्यों में पेट्रोल का दाम 80 रुपये लीटर को पार कर चुका है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ने, अमेरिका द्वारा इस्पात और एल्यूमीनियम जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के चलते आने वाले दिनों में महंगाई को लेकर सरकार की राह कठिन हो सकती है.

महंगाई पहले घटी पर अब है बढ़ोतरी का रुख वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में भी महंगाई में नरमी के बाद मजबूती का रुख दिखा है. मई 2014 में थोक मुद्रास्फीति 6.01 फीसदी और खुदरा महंगाई 8.28 फीसदी थी. इसके बाद मई 2017 में थोक मुद्रास्फीति 2.17 और खुदरा मुद्रास्फीति 2.18 फीसदी रही. अब अप्रैल 2018 में इसमें बढ़त का रुख दिखाई दे रहा है और थोक मुद्रास्फीति 3.18 फीसदी और खुदरा मुद्रास्फीति 4.58 फीसदी पर पहुंच गई है.

जीएसटी को लागू करने से ये हुआ बदलाव मोदी सरकार ने पिछले साल एक जुलाई से देश में माल और सेवाकर (जीएसटी) लागू किया. जीएसटी के तहत खुले रूप में बिकने वाले आटा, चावल, दाल जैसे खाद्यान्नों को टैक्स फ्री रखा गया जबकि पैकिंग में बिकने वाले ब्रांडेड सामान पर पांच अथवा 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगाया गया.

जानें आटा, दाल, गेहूं, चावल के दाम में क्या हुआ बदलाव एक सामान्य दुकान से की गई खरीदारी के आधार पर तैयार आंकड़ों के मुताबिक मई 2014 के मुकाबले मई 2018 में ब्रांडेड आटे का दाम 25 रुपये किलो से बढ़कर 28.60 रुपये किलो हो गया. खुला आटा भी इसी अनुपात में बढ़कर 22 रुपये पर पहुंच गया. यह बढ़त 14.40 फीसदी की रही. हालांकि, चार साल में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 19.65 फीसदी बढ़कर 1735 रुपये क्विंटल पर पहुंच गया. चावल के दाम में कुछ तेजी दिखती है. पिछले चार साल में चावल की विभिन्न किस्म का भाव 15 से 25 फीसदी बढ़ा है जबकि सामान्य किस्म के चावल का एसएसपी इस दौरान 14 फीसदी बढ़कर 1550 रुपये क्विंटल रहा है. खुली बिकने वाली अरहर दाल इन चार सालों के दौरान 75 से 140 रुपये तक चढ़ने के बाद वापस 75 से 80 रुपये किलो पर आ गई.

महंगाई के मुद्दे पर भी ज्यादा नहीं मिली राहत नेशनल काउंसिल आफ एप्लाइड इकोनोमिक रिसर्च (एनसीएईआर) की फैलो बोरनाली भंडारी ने महंगाई के मुद्दे पर कहा कि 2017-18 इस मामले में नरमी का साल रहा. खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट रही लेकिन फल और सब्जियों में तेज घट-बढ देखी गई. खाद्य पदार्थों की महंगाई मानसून की चाल पर निर्भर रहती है. एनसीएईआर की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 2017-18 में खाद्य महंगाई दो फीसदी रही जो कि 2016-17 में चार फीसदी थी. अनाज के दाम मामूली बढ़े जबकि दलहन, मसालों में इस दौरान महंगाई कम हुई. केवल सब्जियों के दाम में तेजी रही.

टमाटर के दाम पहुंचे थे 100 रुपये किलो तक पीएचडी उद्योग मंडल के मुख्य अर्थशास्त्री एस.पी. शर्मा का भी कहना है कि पिछले चार साल के दौरान आटा, चावल, दाल जैसी जरूरत वस्तुओं के दाम सरकारी प्रयासों के चलते ज्यादा नहीं बढ़े हैं लेकिन सब्जियों के दाम में इस दौरान काफी उतार चढ़ाव रहा. प्याज, टमाटर जैसी सब्जियों के दाम कभी 10-15 रुपये किलो तो कभी 100 रुपये किलो तक ऊपर पहुंच गये. इस पर नियंत्रण होना चाहिये.

दालों के रिटेल दाम में नहीं हुई ज्यादा बढ़त उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सरकार ने दालों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये पिछले कुछ सालों में अरहर, उड़द, चना के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 24 से लेकर 38 फीसदी तक की बढ़त की है. इसके बावजूद दालों के खुदरा दाम चार साल की समाप्ति पर पूर्वस्तर के आसपास ही टिके हैं.

चीनी, तेल, सरसों तेल, नमक के दाम में कितना हुआ इजाफा पिछले चार साल में खुली चीनी का खुदरा दाम 35 रुपये से लेकर 40 रुपये और फिर घटकर 31 रुपये किलो रह गया. धारा रिफाइंड वनस्पति तेल 120 रुपये से 8.33 फीसदी बढ़कर 130 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया. सरसों तेल की एक लीटर बोतल 10 फीसदी बढ़कर 105 रुपये हो गई. ब्रांडेड टाटा नमक की यदि बात की जाये तो चार साल में यह 6.66 फीसदी बढ़कर 16 रुपये किलो हो गया.

साबुन के दाम में आई सबसे ज्यादा तेजी डिटॉल साबुन (तीन टिक्की) का पैक आलोच्य अवधि में सबसे ज्यादा 33 फीसदी बढ़कर 150 रुपये हो गया. कुछ ब्रांडों के दाम 50 फीसदी तक भी बढ़े हैं.

मसालों में नहीं दिखी ज्यादा घट-बढ़ हल्दी, धनिया, मिर्च में ब्रांड के अनुसार भाव ऊंचे नीचे रहे लेकिन इनमें घटबढ़ ज्यादा नहीं रही. धनिया पाउडर का 200 ग्राम पैक इन चार सालों के दौरान 35 से 40 रुपये के बीच बना रहा. हल्दी पाउडर भी इस दायरे में रहा.

देशी घी के दाम में आई भारी तेजी देशी घी का दाम जरूर इस दौरान 330 रुपये से बढ़कर 460 रुपये किलो पर पहुंच गया. आम खुदरा मंडी में मई 2018 में आलू 20 रुपये किलो, प्याज 20 रुपये किलो और टमाटर 10 रुपये किलो में बिक रहा है.

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