Budget 2025: 1 फरवरी से पहले अच्छे से समझ लें ये टर्म, वित्त मंत्री का बजट भाषण सुनने में रहेगी आसानी
Budget 2025: बजट पेश करते समय वित्त मंत्री कुछ खास टर्म या शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जो आम इंसान की समझ से परे होता है. इनके बारे में अच्छे से पता हो, तो पूरा बजट समझने में आसानी होती है.

Budget 2025: फाइनेंशियल ईयर 2025-26 का बजट के अब बस चंद दिन रह गए हैं. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी, जिसका इंतजार देश के हर आम इंसान से लेकर बड़े-बड़े सेक्टर को भी है. हालांकि, बजट में कई बातें ऐसी होती हैं, जो समझ से परे होती हैं. ऐसे में बजट का भाषण सुनते वक्त किसी-किसी बात को समझने में बड़ी परेशानी आती है. 1 फरवरी को आपको इन्हीं दिक्कतों का सामना न करना पड़े इसके लिए हम कुछ ऐसे टर्म या शब्दों की जानकारी इस खबर के जरिए देने जा रहे हैं.
छूट (रिबेट)- छूट और डिडक्शन के बाद जो अमाउंट बचता है उस पर भी टैक्स देना पड़ता है. आपको कितना टैक्स भरना है इसके कैलकुलेशन बाद रिबेट टैक्स के रूप में भुगतान की जाने वाली राशि में राहत देता है.
पुरानी कर व्यवस्था (ओल्ड टैक्स रिजीम)- इसमें चार इनकम टैक्स स्लैब हैं . पुरानी कर व्यवस्था में 10 लाख रुपये से अधिक के इनकम पर 30 परसेंट टैक्स लगेगा.
नई कर व्यवस्था (न्यू टैक्स रिजीम)- नई कर व्यवस्था में 7 इनकम टैक्स स्लैब हैं. इसमें बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया गया है, जबकि 3 से 7 लाख रुपये की आय पर 5 परसेंट टैक्स लगेगा.
महंगाई (इनफ्लेशन)- इसका मतलब एक निश्चित समयावधि में देश में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें सामान्य रूप से अधिक हो जाना है.
प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स)- यह वह टैक्स है, जिसका भुगतान व्यक्ति या कंपनी की तरफ से सीधे सरकार को इनकम टैक्स या कार्पोरेट टैक्स के रूप में किया जाता है.
पूंजीगत व्यय (कैपेक्स)- कैपेक्स या पूंजीगत व्यय कंपनियां अपने व्यवसाय, दक्षता, प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने के लिए करती है.
उपकर (सेस)- यह किसी कर के ऊपर लगाया जाने वाला कर है.
विनिवेश (डिसइंवेस्टमेंट)- इसका मतलब सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के निगमों में शेयरों की बिक्री से है.
सोर्स पर एकत्रित कर (टीसीएस)- टीसीएस वस्तुओं और सेवाओं पर लागू होता है. इसकी वसूली सरकार की तरफ से विक्रेता खरीदार से करता है.
कर कटौती (टैक्स डिडक्शन)- इसमें इनकम से ही टैक्स काटकर बाकी पैसा व्यक्ति को दे दिया जाता है, यानी कि सैलरी या इंवेस्टमेंट पर ब्याज पर डिडक्शन इस कैटेगरी में आता है.
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Source: IOCL

























