मनमाने टैरिफ पर भड़के BRICS देश, Trump की नीतियों पर बिना नाम लिए साधा निशाना
BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर चिंता जताई है. डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना अमेरिकी टैरिफ नीति पर निशाना साधते हुए WTO बेस्ड निष्पक्ष वैश्विक व्यापार व्यवस्था की मांग की गई.

भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन से पहले ब्रिक्स के सदस्य देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापार से जुड़े दूसरे प्रतिबंधों को लेकर कड़ी चिंता जताई है. ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों ने कहा कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचा रहे हैं और दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बढ़ा रहे हैं.
खास बात यह है कि बयान में अमेरिका या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन ब्रिक्स का इशारा साफ तौर पर अमेरिकी टैरिफ नीति की तरफ है.
ब्रिक्स ने टैरिफ को लेकर क्या कहा?
ब्रिक्स के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों ने कहा कि एकतरफा तरीके से लगाए जाने वाले ज्यादा टैरिफ और नॉन टैरिफ बैरियर वैश्विक व्यापार में गड़बड़ी पैदा कर रही हैं. समूह ने कहा कि ऐसे कदम WTO के नियमों के अनुसार नहीं हैं. ब्रिक्स ने ऐसी वैश्विक व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया है जो खुली, पारदर्शी, गैर-भेदभाव वाली और नियमों पर आधारित हो.
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किसपर साधा निशाना?
ब्रिक्स के संयुक्त बयान में अमेरिका या डोनाल्ड ट्रंप का नाम नहीं लिया गया है. इसके बावजूद बयान में जिस तरह एकतरफा व्यापार और वित्तीय कदमों, ऊंचे टैरिफ और व्यापार बाधाओं का जिक्र किया गया है, उसे अमेरिकी नीति के साथ जोड़कर देखा जा रहा है.
अमेरिका की मौजूदा व्यापार नीति में कई देशों के साथ टैरिफ को लेकर सख्त रुख देखने को मिला है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने अपने व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ लगाए हैं और ब्रिक्स के साथ जुड़ने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले देशों पर एक्स्ट्रा टैरिफ की धमकी भी दी है.
ब्रिक्स को है किस बात की चिंता?
ब्रिक्स देशों ने कहा कि इस समय दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है. इनमें भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार का बंटना, नीतियों को लेकर अनिश्चितता, महंगाई और बढ़ता कर्ज शामिल हैं. ब्रिक्स के मुताबिक इन परिस्थितियों का सबसे ज्यादा असर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है.
क्या है ब्रिक्स की मांग?
ब्रिक्स देशों ने साफ किया कि वो WTO के केंद्र में रहने वाली बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के पक्ष में हैं. साफ साफ कहें तो ब्रिक्स चाहता है कि दुनिया के देशों के बीच व्यापार के नियम सभी के लिए एक जैसे हों और कोई एक देश अपनी तरफ से ऐसे फैसले न ले, जिससे दूसरे देशों के कारोबार पर अचानक बड़ा असर पड़े.
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