दीवाली तक दिल्ली में धरने-प्रदर्शनों पर लगे बैन, व्यापारियों की PM मोदी से गुहार
सीजेपी और विपक्षी दलों के दिल्ली में प्रदर्शन के बीच सीटीआई ने पीएम मोदी को पत्र लिखा है और विरोध प्रदर्शनों को बैन करने की मांग की है. सीटीआई ने कहा है कि इससे कारोबार पर असर पड़ रहा है.

राजधानी दिल्ली में सीजेपी और विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर चैंबर ऑफ़ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है और विरोध प्रदर्शनों पर बैन की मांग की है. सीटीआई ने चिट्ठी में कहा है कि नवरात्रि से दिवाली तक दिल्ली के बड़े कमर्शियल और सेंट्रल इलाकों में बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए, क्योंकि इनका असर कारोबार पर पड़ता है.
इतना ही नहीं सीटीआई ने सरकार से दिल्ली के बाहर विरोध प्रदर्शन के लिए एक स्थायी जगह तय करने की भी अपील की है. पीएम मोदी को लिखे पत्र में सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट और लुटियंस दिल्ली में बड़ी भीड़ जमा होने पर रोक लगाने की मांग की. उन्होंने कहा है, ''बार-बार होने वाले प्रदर्शनों और मेट्रो सेवाओं में रुकावट से व्यापारियों और ग्राहकों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है.''
विरोध प्रदर्शनों पर बैन लगाना अब जरूरी- CTI
चेयरमैन बृजेश गोयल ने पत्र में बताया है, ''11 अक्टूबर को नवरात्रि और रामलीला कार्यक्रमों के साथ शुरू होने वाला त्योहारों का वक्त व्यापारियों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि इसके बाद दीवाली और शादी-ब्याह का सीजन आता है. ऐसे में दिल्ली के करीब 15 लाख व्यापारियों के कारोबार को बचाने के लिए विरोध प्रदर्शनों पर बैन लगाना जरूरी है.''
सीटीआई ने बताया है कि हमने हाल ही में व्यापार को लेकर एक सर्वे भी कराया है, जिसमें पिछले तीन दिनों में दिल्ली के बाजारों में कारोबार लगभग 70 फीसदी कम हुआ है. संगठन का दावा है कि खरीदारी के लिए दिल्ली के बाहर से शहर आने वाले ग्राहकों की संख्या रोज़ाना अनुमानित दो से तीन लाख से घटकर लगभग 40 से 50 हजार रह गई है और स्थानीय ग्राहकों की संख्या में भी 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है.
बाजारों में आने से कतरा रहे हैं लोग- CTI
सीटीआई का दावा है कि जंतर-मंतर, पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस के आस-पास बार-बार मेट्रो स्टेशन बंद होने, ट्रैफिक जाम और रुकावटों की वजह से लोग बाजारों में आने से कतरा रहे हैं. इसका सीधा असर व्यापारियों पर पड़ता है.






















