एक्सप्लोरर

Blog: बंगाल में आगजनी, महिलाओं और मासूम बच्चों पर हो रही बर्बरता ही क्या गांधीवादी भारत का संकेत है?

"हम परिवर्तन की राजनीति लाएंगे, प्रतिशोध नहीं." यही कहकर 2011 में ममता बनर्जी ने सत्ता संभाली थी. 2021 में भारतीय जनता पार्टी सोनार बांग्ला के आगाज पर चुनाव लड़ी, वहीं तृणमूल खेला होबे की चुनौती दी. कोरोना त्रासदी के काल में राजनीतिक हिंसा, आज के आशंका से भरे माहौल को और भी भयावह बना देता है. 2021 के इलेक्शन से यह एहसास हुआ की बंगाल में हिंसा की राजनीति यहां रह रहे मां, माटी और मानुष के जीवन में किसी न किसी प्रकार से अब हिस्सा बन चुकी है. यहां वैचारिक संघर्ष के नाम पर हिंसा का खेला होता है. यहां व्यक्तिगत पहचान की राजनीति आम नेताओं पर हावी है. हिंसा का प्रारूप इतना भयावह है कि उसका किसी भी वैचारिक संघर्ष से तुलना करना अनुचित होगा. 

चुनाव परिणाम के तुरंत बाद जो बंगाल का माहौल दिख रहा है, उसकी तुलना कई बुद्धिजीवी ने 1947 के भारत विभाजन के वक्त हुई हिंसा और 1946 में हुई अविभाजित बंगाल के नोआखाली की बर्बरता से कर रहें हैं. नोआखाली में मुख्यतः बच्चों और महिलाओं पर अत्याचार हुए थे.

1946 के नोआखाली (बंगाल, आज का बांग्लादेश) में हिंसा इस तरह फैल चुकी थी कि महात्मा गांधी को भी हिंसा के दौरान अपनी शांति मिशन को अधूरा छोड़, बंगाल से वापस जाना पड़ा. गांधीजी ने नोआखाली की घटनाओं पर बहुत चिंता जाहिर करते हुए कहे थे, अगर भारत की मानवता का आधा हिस्सा लकवाग्रस्त हो जाएगा, तो भारत कभी भी स्वतंत्र महसूस नहीं कर सकेगा. उन्होंने भारत की महिलाओं के प्रति चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें हथियार चलाने का प्रशिक्षण देना आवश्यक समझेंगे न कि उनको असहाय छोड़ देंगे.

महात्मा गांधी ने चार महीने के लिए नोआखाली में अपना डेरा डाला, शांति और सांप्रदायिक सद्भभाव को बहाल करने के लिए कई जिलों और गांवों में पदयात्रा की. कुछ समय के लिए उन्होंने अपना आधार नोआखाली के एक आधे जले हुए घर में स्थापित किए. दुर्भाग्यवश, यह शांति मिशन नोआखाली के बचे हुए लोगों में विश्वास बहाल करने में विफल रहा, क्योंकि उन सब को अपने गांवों में स्थायी रूप से पुनर्वासित करना असंभव था. बाद में बचे हुए अधिकांश लोग पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम में आश्रित हुए| 

देश के किसी भी हिस्से में हुई हिंसा का असर अन्य राज्यों पर भी होता है. जैसे नोआखाली की हिंसा का असर बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, असम और कई अन्य राज्यों में दिखा. ऐतिहासिक रूप से, स्वतंत्रता से बहुत पहले से ही हिंसा, बंगाल की राजनीति का हिस्सा रही है. इन घटनाओं में शामिल बर्बरता का पैमाना भी बहुत ही गंभीर और निंदनीय रहा.

1970 के दशक में, हिंसा का विकृत रूप दिखा जब सेनबारी की रेखा रानी, जिनके परिवार के साथ निर्मम अपराध हुआ और उनके परिवार में हुई बर्बरता किसी भी हिंसा के सारे मापदंडों को पार कर गई. सेन परिवार के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रति समर्थन के कारण ही उनके साथ यह घटना घटी, जो कि कथित रूप से उस वक़्त के कांग्रेस के विरोधी दल के सदस्यों द्वारा की गई थी.

2021 के बंगाल इलेक्शन में कांग्रेस और वाम दल ने अपने प्रमुख विरोधी दल को राजनीतिक घेराबंदी की रणनीति के तहत, सत्ता को फिर से तृणमूल को सौंपना आवश्यक समझा. कांग्रेस और वामदल जो बंगाल में मुख्य धारा की पार्टी थी आज वह विलुप्त नजर आ रही हैं. चुनाव परिणाम के बाद, एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान ममता बनर्जी ने वामदल और कांग्रेस के साथ विचारधारा की लड़ाई का जिक्र किया, अब वह पुरानी रंजिशें पार्टी लेवल पर सामन्य है, लेकिन पार्टी कार्यकर्त्ता आज भी हिंसा के शिकार होते हैं.

2016 के एक मीडिया साक्षात्कार में, जब रेखा रानी से पत्रकार ने वोट देने की बात पूछी, उस पर उनका जवाब था कि मेरी तबीयत भी अच्छी नहीं है और वोट देने से क्या फायदा, जब मेरे परिवार को विरोधी दल के कैडरों ने कांग्रेस का समर्थन देने  के कारण हत्या कर दी. अब उसी कांग्रेस ने वामदलों से हाथ मिला लिया है. 

कालांतर में अन्य पॉलिटिकल पार्टी विशेष ने अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए इस परिवार के साथ हुई त्रासदी का इस्तेमाल भी किया है. सेन परिवार जिस पार्टी का समर्थन करता था, जिस विरोधी दल ने उनके परिवार के साथ हिंसा और बर्बरता की और जिस दल ने उन्हें मंच पर बुलाकर सांत्वना और सम्मानित भी किया, आज ये सभी पार्टियां किसी न किसी रूप में एक साथ, एक ही मंच पर नजर आ रहे हैं. 

बंगाल या केंद्र में सभी प्रमुख दल, आलोचक, आज ग्रामीण इलाके में हो रही हिंसा पर मौन हैं. वैचारिक लड़ाई बंगाल की  राजधानी तक ही सीमित हैं और वहां गांव जल रहे हैं, पुरुष असहाय हैं, महिलाएं और बच्चे इस राजनीतिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं. गांव और छोटे शहरों में लोगों को दो तरफा मार झेलनी पड़ रही है, एक कोरोना और दूसरा रानीतिक हिंसा. कई परिवार अपना घर-बार छोड़ने को मजबूर हैं.

बंगाल के विभाजन के विरोध में 1905 में गुरु देव ठाकुर ने "आमार सोनार बंगला", "बंगलार माटी बांगलार जल" गीत लिखा और लोगों के बीच रक्षाबंधन मनाया. आज वह रक्षाबंधन शांतिनिकेतन तक ही सीमित रह गया है, बाकी चारों ओर भय का वातावरण है. जो माहौल लग रहा है, उससे यही प्रतीत होता है की यहां आग बुझाने वालों की संख्या से आग लगाने वालों की संख्या ज्यादे हैं. 

इसलिए बंगाल में लॉकडाउन जरूरी...
बंगाल के ग्रामीण क्षेत्र और छोटे शहरों में, दो कारणों से लॉकडाउन आवश्यक है. एक कोरोना का कहर, दूसरा राजनीतिक बर्बरता. कार्यकर्ता किसी भी दाल का हो, उनकी जान-माल की सुरक्षा सरकार का दायित्व है. सदियां बीत गए, न जाने बंगाल को किसकी नजर लगी हुई है. गुरु देव का सोनार बांग्ला का सपना दूर तक कहीं नजर नहीं आ रही है. इससे पहले कि बंगाल फिर से रक्तरंजित हो जाए, अब यहां शांति और सद्भभाव बहाल करना अति आवश्यक है.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

महिला आरक्षण पर BJP के साथ आई ये विपक्षी पार्टी, रिजिजू बोले - 'आपने...'
महिला आरक्षण पर BJP के साथ आई ये विपक्षी पार्टी, रिजिजू बोले - 'आपने...'
CJP के सौरव दास और रत्ना सिंह ने आदित्य ठाकरे से की मुलाकात, इसलिए कहा Thank You!
CJP के सौरव दास और रत्ना सिंह ने आदित्य ठाकरे से की मुलाकात, इसलिए कहा Thank You!
वैभव सूर्यवंशी के सामने आ गया तेंदुआ ! भारतीय क्रिकेटर ने यूं उठाया सफारी का मजा
वैभव सूर्यवंशी के सामने आ गया तेंदुआ ! भारतीय क्रिकेटर ने यूं उठाया सफारी का मजा
'आरंभ है प्रचंड...', रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिले अभिनेता पीयूष मिश्रा, गाया गाना
'आरंभ है प्रचंड...', रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिले अभिनेता पीयूष मिश्रा, गाया गाना

वीडियोज

Govinda संग Komal Rani Swarnkar हुईं स्पॉट, 4 साल की Dating Rumours फिर चर्चा में
Bhojpuri Bawal में Kajal Raghwani पर भड़के Nirahua, बोले- ‘आप उसी के लायक हो’
Pati Brahmachari: 😯Suraj का फिर दिखा पुराना 'राउडी' अवतार, Isha संग मिलकर मिशन पर निकला हीरो #sbs
Bollywood News: भारतीय फैंस से 2 दिन पहले विदेशी दर्शक देखेंगे 'रामायण', जानें मेकर्स की इस खास रिलीज स्ट्रेटजी के पीछे की वजह (08.08.26)
Ramayana का Global Release! Devendra Fadnavis बोले- Oscar नहीं मिला तो होगी निराशा

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
महिला आरक्षण पर BJP के साथ आई ये विपक्षी पार्टी, रिजिजू बोले - 'आपने...'
महिला आरक्षण पर BJP के साथ आई ये विपक्षी पार्टी, रिजिजू बोले - 'आपने...'
CJP के सौरव दास और रत्ना सिंह ने आदित्य ठाकरे से की मुलाकात, इसलिए कहा Thank You!
CJP के सौरव दास और रत्ना सिंह ने आदित्य ठाकरे से की मुलाकात, इसलिए कहा Thank You!
वैभव सूर्यवंशी के सामने आ गया तेंदुआ ! भारतीय क्रिकेटर ने यूं उठाया सफारी का मजा
वैभव सूर्यवंशी के सामने आ गया तेंदुआ ! भारतीय क्रिकेटर ने यूं उठाया सफारी का मजा
'आरंभ है प्रचंड...', रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिले अभिनेता पीयूष मिश्रा, गाया गाना
'आरंभ है प्रचंड...', रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिले अभिनेता पीयूष मिश्रा, गाया गाना
JPSC मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
JPSC मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, दोबारा परीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
जल्द जारी हो सकता है UPTET रिजल्ट, लाखों उम्मीदवार कर रहे इंतजार
जल्द जारी हो सकता है UPTET रिजल्ट, लाखों उम्मीदवार कर रहे इंतजार
'रेंट बॉयफ्रेंड' ऑफर से सावधान, स्कैमर्स का डेटिंग जाल कर देगा कंगाल
'रेंट बॉयफ्रेंड' ऑफर से सावधान, स्कैमर्स का डेटिंग जाल कर देगा कंगाल
ईरान जंग से बाहर नहीं निकला अमेरिका तो..., सीक्रेट मीटिंग में ट्रंप के जनरल ने चेताया
ईरान जंग से बाहर नहीं निकला अमेरिका तो..., सीक्रेट मीटिंग में ट्रंप के जनरल ने चेताया
Embed widget