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सोनिया गांधी की राज्यसभा में मौजदूगी ही होगी बड़ी बात, उनकी सियासी उपलब्धियों का नहीं मुकाबला

कांग्रेस संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी अब लोकसभा का चुनाव नहीं लडे़ंगी. उनकी पार्टी ने राजस्थान के जरिए राज्यसभा में भेजने का फैसला किया है. सोनिया गांधी ने जयपुर में राहुल और प्रियंका गांधी की उपस्थिति में नामांकन भरा. सोनिया गांधी के चुनाव न लड़ने की वजह से बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है. आईटी सेल्ल के अध्यक्ष अमित मालवी का कहना है कि इस फैसले के बाद कांग्रेस ने अमेठी के बाद अब रायबरेली में भी हार स्वीकार की है.

कांग्रेस की बुरी स्थिति में सोनिया गांधी का साथ

सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस का अध्यक्ष बनी थी, उस समय कांग्रेस की स्थिति बहुत ही खराब थी. कांग्रेस ने काफी स्ट्रगल किया, सारे कांग्रेस जनों को इकट्ठा किया और मिलकर अटल बिहारी बाजपेयी और एनडीए जैसी शक्तिशाली गठबंधन को प्राप्त किया. डॉ. मनमोहन सिंह जैसे बुद्धिजीवी और बड़े इकोनॉमिस्ट देश का प्रधानमंत्री बनाया, जिन्होंने देश की आर्थिक दिशा और दशा बदली. सोनिया गांधी राजस्थान से, कहीं से चाहती तो राज्यसभा जा सकती थी. कांग्रेस में राज्यसभा की सीट अध्यक्ष का प्राइवेटिव होता है जो अध्यक्ष रिकमेन्ड करते हैं उसे असेंबली में पैनल बनाकर भेजा जाता है.

लोकसभा टिकट के लिए एक सीट से 3-4 लोगों का पैनल बनाकर भेजा जाता है. बंगाल में, डेल्ही, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब में जो भी राज्यसभा की सीट होती थी, अंडमान निकोबार या चंडीगढ़, उन यूनियन टैरेटरी को छोड़ कर बाकी के स्टेटस में, उनमें राज्यसभा की सीट होती थी तो रेकमेंड कर दिया जाता था. और किसी का नाम नहीं दिया जाता था, वो अध्यक्ष के ऊपर था, अध्यक्ष के मशवरे से ही होता था. सोनिया गांधी ने कांग्रेस की बुरी स्थिति में संगठित कर उसकी खोई हुई प्रतिष्ठा को वापस लाने का काम किया था.

कांग्रेस की तरफ से कौन लड़ेगा चुनाव

साल 2014 और 2019 में मोदी लहर के बावजूद बीजेपी रायबरेली सीट नहीं जीत पाई रायबरेली सीट से इंदिरा गांधी से लेकर फिरोज गांधी तक सांसद रह चूके हैं। यहां से खुद सोनिया गांधी पांच बार सांसद रही। ऐसे में सोनिया गांधी के राज्यसभा जाने के बाद क्या प्रियंका गाँधी सीट से लड़ेंगी. कांग्रेस की तरफ से लोकसभा का चुनाव कौन लड़ेगा ये समय बताएगा, पार्टी और कांग्रेस अध्यक्ष तय करेंगे या एक सेंट्रल इवेशन कमिटी तय करेगी. लेकिन अगर प्रियंका गांधी लड़ती हैं तो निश्चित रूप से उनका स्वागत होगा. सोनिया गांधी ने 1999, 2004, 2009 और 2014 में जीत हासिल की थी.

साथ ही नरेंद्र मोदी के इतने प्रचंड लहर के बाद भी 2019 में जीत अपने नाम की थी. सोनिया गांधी ने रायबरेली से पांच बार लोकसभा का चुनाव जीत चुकी है. इसलिए और लगातार कांग्रेस के प्रतिष्ठित नेता लड़ते रहे है जो कि कांग्रेस की ट्रेडिशनल सीट है. आने वाले समय में ही पता चलेगा कि प्रियंका गांधी चुनाव लड़ना चाहती हैं या नहीं, पॉलिटिक्स में आना चाहती हैं या नहीं. ये पूरी तरह से उनका फैसला होगा लेकिन अगर वो आएंगी तो सब लोग उनका स्वागत करेंगे. अमित मालवीय को सब जानते है. मालवीय आईटी सेल्ल के प्रभारी हैं. पांच बार जिस व्यक्ति ने लगातार विजय हासिल की हो और उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवारों को धूल चटाई है. उसके बाद भी कोई बीजेपी के नेता को इतनी हिम्मत होती है कि वहाँ से हार स्वीकार करती हुई चली गई है. 

सोनिया गांधी कांग्रेस के लिए बड़ी पूंजी

सोनिया गांधी कांग्रेस की यूनाइटिंग फोर्स है, वो सभी को साथ लेकर चलती है. कांग्रेस के अध्यक्ष भी उनके उतने ही अच्छे प्रशंसक है. कांग्रेस परिवार में किसी को कोई समस्या या परेशानी होती है तो वे लोग सोनिया गांधी के पास जाकर अपनी बात को कह सकता है. किसी भी यह नहीं लगता है कि सोनिया गांधी का फैसला उनके खिलाफ है या उनके मन में किसी के लिए किसी प्रकार की बात है.

सोनिया गांधी के नेतृत्व में ये एक तरह से आस्था है, कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ी पूंजी है. सोनिया गांधी का एक्टिव पॉलिटिक्स में रहना, राज्यसभा का मेंबर रहना, कांग्रेस के वर्किंग कमेटी में रहना ये सब कांग्रेस के लिए एक बहुत ही मूल्यवान चीज है. सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनने से पहले एक्टिव कांग्रेस कैंपेन का हिस्सा थीं. ये एक इतिहास है कि कैसे सोनिया गांधी ने सांप्रदायिक शक्तियों के गठबंधन को कमजोर करने का काम कर कांग्रेस को मजबूत करने का काम किया. जब उन्हें लगा कि कांग्रेस सभी लाइट मांइडेड पार्टी  के साथ मिलकर बीजेपी को हरा सकती है, तब सभी को साथ लेकर सफलता हासिल की. 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

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