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राष्ट्रपति चुनाव: कितना मजबूत चेहरा दे पाएगा विपक्ष ?

राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष का साझा उम्मीदवार तय करने के लिए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने मंगलवार को विपक्षी नेताओं की बैठक बुलाई है. अब तक तीन नेता उम्मीदवार बनने से इनकार कर चुके हैं, इसलिये बड़ा सवाल ये है कि क्या विपक्ष कोई मजबूत चेहरा दे पाएगा? राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए ही विपक्ष अगर कोई बड़ा नाम नहीं तलाश पाया, तो फिर सवाल ये भी उठेगा कि दो साल बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए किसी एक नाम पर वह आम सहमति भला कैसे बना पायेगा?

पहले शरद पवार, फिर फारूक अब्दुल्ला और अब गोपाल कृष्ण गांधी ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है. इससे जाहिर होता है कि इन तीनों को ही ये अहसास है कि समूचे विपक्ष का एकजुट हो पाना लगभग नामुमकिन है, लिहाजा ऐसा चुनाव ही क्यों लड़ा जाये, जिसमें पराजय पहले से तय दिखाई दे रही हो. गोपाल कृष्ण गांधी का इनकार करना विपक्षी दलों के लिए किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि विपक्षी खेमे में अब ऐसा कोई चेहरा नज़र नहीं आता, जो एनडीए के उम्मीदवार को कड़ी चुनौती दे सके.

महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी हालांकि  2017 में उप राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन वह वैंकया नायडू से चुनाव हार गए थे. राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने से मना करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष किसी और नाम पर विचार करे, जो मुझसे कहीं बेहतर राष्ट्रपति साबित हो सकता है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा 15 जून को दिल्ली में बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में गांधी को उम्मीदवार बनाये जाने का प्रस्ताव रखा गया था. तब उन्होंने कहा था कि अभी इस बारे में कोई भी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगा.

लेकिन अब विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए गोपालकृष्ण गांधी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि उम्मीदवारी को लेकर गहराई से विचार करने के बाद मैं देखता हूं कि विपक्ष का उम्मीदवार ऐसा होना चाहिए जो विपक्षी एकता के अलावा राष्ट्रीय सहमति और राष्ट्रीय माहौल पैदा करे.  उन्होंने ये भी कहा कि मुझे लगता है कि और भी लोग होंगे जो मुझसे कहीं बेहतर काम करेंगे. इसलिए मैंने नेताओं से अनुरोध किया है कि ऐसे व्यक्ति को अवसर देना चाहिए.

भारत को ऐसा राष्ट्रपति मिले, जैसे कि अंतिम गवर्नर जनरल के रूप में राजाजी (सी राजगोपालाचारी) थे और जिस पद की सबसे पहले शोभा डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बढ़ाई. पूर्व नौकरशाह गोपालकृष्ण गांधी दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं. मंगलवार की इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं होंगी. वजह ये बताई गई है कि उनके पूर्व में निर्धारित कार्यक्रमों के कारण वे बैठक में भाग नहीं ले पाएंगी.

हालांकि उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी टीएमसी की तरफ से इसमें शामिल होंगे. लेकिन ये तो 15 जून को हुई बैठक में ही लगभग तय हो गया था कि शरद पवार अगली बैठक 21 को को बुलाएंगे. ऐसे में,ममता बनर्जी की गैर मौजूदगी के कई मायने निकाले जा रहे हैं. एक कयास ये भी है कि वे शरद पवार के प्रस्ताव ठुकराने से आहत हुई हैं क्योंकि उन्होंने विपक्षी एकता की सारी कवायद ही इसलिये की थी कि अकेले शरद पवार ही ऐसा मजबूत चेहरा हैं जो संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार बनकर एनडीए को कड़ी टक्कर दे सकते हैं.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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