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BLOG: पर्रिकर ने रखा सेना का मनोबल ऊंचा, रक्षा सौदों को अंजाम तक पहुंचाया

नई दिल्ली: मनोहर पर्रिकर एक बार फिर गोवा के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. कल यानि मंगलवार को वे गोवा के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे. उन्होंने आज ही रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया. नवंबर 2014 में पीएम मोदी ने मनोहर पर्रिकर को गोवा से बुलाकर रक्षा मंत्री का अहम पद सौंपा था. रक्षा मंत्री बनने से पहले भी मनोहर पर्रिकर गोवा राज्य के मुख्यमंत्री थे. लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आग्रह पर वे राजधानी दिल्ली आए और इस अहम जिम्मेदारी को संभाला. हालांकि दिल्ली आने के बाद भी पर्रिकर मानते थे कि उनका दिल गोवा में ही रहता है.

आज राष्ट्रपति भवन से जारी हुई प्रेस रिलीज में कहा गया कि रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है और प्रधानमंत्री के सुझाव पर कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली को रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त पदभार सौंपा गया है. वे वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे.

ईमानदार छवि के नेता

गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर पर्रिकर की (ईमानदार) छवि काफी साफ मानी जाती थी. उनके जमीन से जुड़े नेता की इमेज भी काफी चर्चित थी. यही वजह थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन्हें रक्षा मंत्री बनाने चाहते थे. क्योंकि रक्षा मंत्रालय और रक्षा सौदों में व्याप्त भष्ट्राचार को खत्म करने के लिए मोदी को पर्रिकर से बेहतर कोई दूसरा व्यक्ति पूरी बीजेपी पार्टी में नहीं दिखाई पड़ रहा था. और पिछले ढाई साल में पर्रिकर अपने प्रधानमंत्री की सभी कसौटियों पर खरे भी उतरें.

दो साल चार महीने देश के रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद सोमवार यानि 13 मार्च को मनोहर पर्रिकर एक बार फिर अपने पैतृक राज्य, गोवा की कमान संभालने वापस लौट गए हैं. वे दूसरी बार गोवा के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं.

जैसे ही ये खबर फैली कि मनोहर पर्रिकर रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देकर वापस गोवा जा रहे हैं, उनके प्रशंसकों में हताशा फैल गई. क्योंकि पिछले करीब ढाई साल के अपने कार्यकाल में मनोहर पर्रिकर ने वो कर दिखाया जो रक्षा मंत्रालय में पिछले कई दशकों में नहीं हो पाया था. उन्होंने सेनाओं के आधुनिकीकरण से लेकर सेनाओं के मनोबल को काफी ऊंचा रखा. उनके रहते हुए ही सेना ने पहली बार आतंकियों के लांचिंग-पैड्स को नष्ट करने के लिए एलओसी पार कर आतंकियों का खात्मा करने के लिए सर्जिकल-स्ट्राइक की. इसके बाद रक्षा मंत्री के तौर पर मनोहर पर्रिकर ने ही सेना को पाकिस्तान की तरफ से हो रहे युद्ध-विराम के उल्लंघन का मुंह तोड़ जवाब देने के लिए तोप के गोले दागने का आदेश दिया. सेना की आर्टेलेरी ने पाकिस्तान में इतनी तबाही मचाई कि पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारतीय सेना को गोलाबारी बंद करने की अपील करते हुए एलओसी पर शांति रखने के लिए दिल्ली फोन कर डाला.

दुश्मन पर सर्जिकल स्ट्राइक

अपनी बोल्ड छवि के लिए जाने वाले पर्रिकर के ही कार्यकाल में जून 2015 में सेना की स्पेशल फोर्स ने म्यांमार सीमा में घुसकर एक और सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था.

पिछले 40 सालों से रुकी हुई पूर्व-सैनिकों की बढ़ी हुई पेंशन यानि वन रैंक वन पेंशन को लागू करने में भी मनोहर पर्रिकर का अहम योगदान रहा था.

जिन मुख्य सौदों के लिए मनोहर पर्रिकर को गोवा से दिल्ली लाया गया था, वे लगभग पूरी हो चुके हैं. उनमें सबसे अहम वायुसेना के लिए रफाल डील, थलसेना के लिए अमेरिका से आने वाली एम-777 होवित्जर तोपें, वायुसेना के लिए ही अमेरिका से आने वाले अपाचे (अटैक) और चिनूक हेलीकॉप्टर शामिल हैं. ये सभी सौदे पिछले कई सालों से अधर में लटके हुए थे. यानि सेनाओं के आधुनिकीकरण का काम एक बार फिर पटरी पर आ गया है.

रक्षा सौदों को अंजाम तक पहुंचाया

वायुसेना की लगातार घट रहीं स्कावर्डन को फ्रांस से 36 लड़ाकू विमान अगले साल से मिलने शुरू हो जायेंगे. करीब 59 हजार करोड़ की इस डील को बिना किसी विवाद के पर्रिकर ने पूरा करके दिखा दिया. हालांकि उनके विरोधियों ने ये ज़रूर कहा कि ये सौदा बेहद महंगा है, क्योंकि कांग्रेस के समय में 126 रफाल लड़ाकू विमानों का सौदा करीब 80 हजार करोड़ रुपये में होने वाला था. लेकिन पर्रिकर ने ये कहकर सबका मुंह बंद कर दिया कि इस सौदे में विमानों के साथ ज़रूरी हथियार और मिसाइल भी मिल रहे हैं. साथ ही 50 प्रतिशत ऑफसेट और रख-रखाव की जिम्मेदारी भी इस सौदे में उन्होंने शामिल कराई थी.

अमेरिका के साथ हुए लेओमा करार यानि लॉजिस्टिक एक्सचेंज ऑफ मेमोरेंडम एग्रीमेंट भी पर्रिकर की ही देन है. ये करार भी पिछले दस सालों से अधर में लटका हुआ था.

प्रधानमंत्री द्वारा लगातार सेनाओं के एकीकरण पर बल दिया जा रहा है. इसका काम भी मनोहर पर्रिकर ने शुरू कर दिया था. हालांकि हाल ही में संसद की स्थायी कमेटी ने चीफ़ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) के पद को लेकर रक्षा मंत्रालय की खिंचाई की थी, लेकिन माना जा रहा है कि इसपर काम शुरू हो गया है. रक्षा मंत्रालय ने पिछले महीने ही संयुक्त कमांडर्स कांफ्रेस में ज्वाइंट थियेटर कमांड और सीडीएस के पद की रूपरेखा का खाका सबके सामने रखा था.

रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी को लेकर मनोहर पर्रिकर ने जो ‘स्ट्रटेजिक पार्टनरशिप’ के मॉडल पर काम शुरू किया था, वो लगभग पूरा हो चुका है. साथ ही कंपनियों की ब्लैक-लिस्टिंग को लेकर शुरू किए गए नए नियम भी लागू हो चुके हैं. सेनाओं के सातवें वेतन आयोग की सिफ़ारिशों का मामला अभी अटका हुआ था. लेकिन अब जब वित्त मंत्री रक्षा मंत्रालय का काम संभालेंगे तो ये मुद्दा भी जल्द निपट सकता है.

पर्रिकर ने प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया' प्रोजेक्ट को काफी आगे बढ़ाया और डीआरडीओ और ऑर्डनेन्स फैक्टरी बोर्ड (ओएफबी) जैसे सरकारी उद्यमों में स्वदेशी सैन्य साजों सामान बनाने पर काफी जोर दिया.

विवाद

लेकिन पिछले ढाई सालों में पर्रिकर काफी विवादों में भी रहे. खासतौर से अपने बेबाक बयानों को लेकर. कभी पाकिस्तान को लेकर ‘आंध्रा-की मिर्ची’ तो ‘चीनी-गणेश’ को लेकर वे लगातार सुर्खियों में रहें. साथ ही उन्होंने देश की परमाणु नीति की नो-फर्स्ट यूज पॉलिसी पर भी सवाल कर विवाद खड़ा कर दिया था. सेना के मना करने के बावजूद उन्होंने राजधानी दिल्ली में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए यमुना पर पंटून-पुल बनावाया तो विवाद का विषय बन गया था. साथ ही उनके करीबी, जनरल बिपिन रावत को दो-दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को दरकिनार करते हुए थल सेनाध्यक्ष बनाया जाना भी काफी विवादों में रहा था.

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