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मिर्गी जागरूकता दिवस: दुनियाभर के 5 करोड़ लोग मिर्गी की चपेट में, वयस्कों से अलग बच्चों में ये समस्या

मिर्गी एक मस्तिष्क संबंधी स्थिति है, जिसके कारण व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं. जब किसी को बिना किसी ज्ञात कारण के दो या अधिक दौरे पड़ते हैं, तो इसका निदान मिर्गी के रूप में किया जाता है. मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं जो विद्युत गतिविधि के माध्यम से एक दूसरे के साथ संचार करती हैं. दौरा तब पड़ता है जब मस्तिष्क के एक या अधिक हिस्सों में असामान्य विद्युत संकेतों (abnormal electrical signal) का संचार होता है. कोई भी चीज़ जो मस्तिष्क में नर्व सेल्स के बीच सामान्य संबंध को बाधित करती है, दौरे का कारण बन सकती है. बच्चों में मिर्गी की समस्या किस प्रकार होती है और वयस्कों और बच्चों में मिर्गी की समस्या में क्या अंतर है आइये जानते हैं-

बच्चों और वयस्को में होने वाली मिर्गी में भिन्नता

बच्चों में मिर्गी वयस्कों से भिन्न होती है, बच्चों में विशिष्ट प्रकार के आनुवंशिक मिर्गी सिंड्रोम होते हैं. उनमें से कुछ उम्र के साथ ठीक हो जाते हैं और कुछ जीवन भर रहते हैं. बेहतर प्रबंधन के लिए बच्चों में मिर्गी सिंड्रोम के प्रकार का पता लगाना महत्वपूर्ण है. बच्चों में उम्र के साथ विभिन्न प्रकार की मिर्गी का पता लगाने के लिए विशिष्ट परीक्षणों की आवश्यकता होती है. वयस्कों में ज्यादातर मिर्गी संक्रमण, आघात, स्ट्रोक, ट्यूमर, शराब और नशीली दवाओं के सेवन, हाइपोग्लाइसीमिया, हाइपोनेट्रेनिया जैसी स्थिति के कारण मस्तिष्क में कुछ माध्यमिक विकारों के कारण होती है.

इन्हें प्राथमिक बीमारी के उपचार के साथ-साथ एंटीपीलेप्टिक दवाओं के साथ प्रबंधित किया जाता है. इस प्रकार की मिर्गी वयस्कों में पूरे जीवन के लिए नहीं बल्कि थोड़े समय के लिए उपचार की आवश्यकता होती है और वयस्कों में सामान्यीकृत इडियोपैथिस मिर्गी भी देखी जाती है. जिसके लिए जीवन भर उपचार की आवश्यकता होती है.

बच्चों में मिर्गी के दौरे

मिर्गी के दौरे की 2 मुख्य श्रेणियां फोकल (आंशिक) दौरे और सामान्यीकृत दौरे हैं जो कि निम्न प्रकार से हैं-

फोकल (आंशिक) दौरे                                                                                                                                                                     

फोकल दौरे तब होते हैं जब मस्तिष्क के एक तरफ के एक या अधिक क्षेत्रों में असामान्य विद्युत मस्तिष्क कार्य होता है. फोकल दौरे से पहले, आपके बच्चे में संकेत हो सकते हैं कि दौरा पड़ने वाला है. इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया है. पहला सरल फोकल दौरा और दूसरा जटिल फोकल दौरा. सरल फोकल दौरा जिसमें बच्चे की दृष्टि बदल सकती है, अधिक बार मांसपेशियाँ प्रभावित होती हैं. उदाहरण के लिए इसमें केवल उंगलियां, या हाथ और पैर की बड़ी मांसपेशियां शामिल हो सकती हैं.  इस प्रकार के दौरे में आपका बच्चा होश नहीं खोएगा. दूसरा जटिल फोकल दौरा जो भावनाओं और स्मृति कार्यों (टेम्पोरल लोब) को नियंत्रित करता है. आपके बच्चे के होश खोने की संभावना होती है. उदाहरण के लिए मुंह बंद करना, होंठ चटकाना, दौड़ना, चीखना, रोना या हंसना शामिल हो सकता है. 

सामान्यीकृत दौरे                                                                                                                                                                                     

• बेसुध करने वाला दौरा- आपका बच्चा संभवतः मुद्रा बनाए रखेगा. उसका मुँह या चेहरा हिल सकता है या आँखें तेजी से झपक सकती हैं. दौरा आमतौर पर 30 सेकंड से अधिक समय तक नहीं रहता है. जब दौरा ख़त्म हो जाता है, तो आपके बच्चे को याद नहीं रहता कि अभी क्या हुआ था. वह ऐसी गतिविधियां जारी रख सकता है जैसे कि कुछ हुआ ही न हो. ये दौरे दिन में कई बार हो सकते हैं. अनुपस्थिति दौरे अधिकतर 4 से 12 साल की उम्र के बीच शुरू होते हैं.

•एटोनिक- इसे ड्रॉप अटैक भी कहा जाता है. एटोनिक दौरे के साथ आपके बच्चे की मांसपेशियों की टोन अचानक कम हो जाती है और वह खड़े होने की स्थिति से गिर सकता है या अचानक अपना सिर गिरा सकता है.

 • सामान्यीकृत टॉनिक- क्लोनिक दौरा (जीटीसी)- आपके बच्चे का शरीर, हाथ और पैर मुड़ेंगे (सिकुड़ेंगे), फैलेंगे (सीधे होंगे), और कांपेंगे (हिलेंगे)। इसके बाद मांसपेशियों में संकुचन और शिथिलता (क्लोनिक अवधि) और पोस्टिक्टल अवधि आती है. 

• मायोक्लोनिक दौरा- इस प्रकार के दौरे के कारण मांसपेशियों के समूह में तीव्र गति या अचानक झटका लगता है. 

बच्चों में मिर्गी के कारण 
• तंत्रिका-संकेत देने वाले मस्तिष्क रसायनों (न्यूरोट्रांसमीटर) का असंतुलन
• मस्तिष्क का ट्यूमर
• आघात
• बीमारी या चोट से मस्तिष्क क्षति

उपरोक्त लक्षणों के संयोजन से बच्चों में दौरा पड़ सकता है. हालांकि अधिकांश मामलों में, दौरे का कारण पता नहीं चल पाता है. सुनिश्चित करें कि आपके बच्चे में ऐसे कोई भी लक्षण नजर आएं तो चौबीस घंटे विशेषज्ञों की सुविधा प्रदान करने वाले अस्पताल में चेकअप कराएं और सही इलाज लें.

बच्चों में मिर्गी का इलाज 

उपचार का लक्ष्य दौरे की आवृत्ति को नियंत्रित करना, रोकना या कम करना है. आमतौर पर उपचार दवा से ही किया जाता है. दौरे और मिर्गी के इलाज के लिए कई प्रकार की दवाओं का उपयोग किया जाता है. दवाओं का चयन दौरे के प्रकार, बच्चे की उम्र, दुष्प्रभाव आदि के आधार पर किया जाता है. अपने बच्चे को समय पर और बताए अनुसार दवा देना महत्वपूर्ण है. अपने बच्चे को दवा देना बंद न करें. इससे दौरे अधिक या बदतर हो सकते हैं. आपके बच्चे को जीवन भर दवा की आवश्यकता नहीं हो सकती है. कुछ बच्चों को यदि 3 से 5 साल तक कोई दौरा न पड़ा हो तो उनकी दवा बंद कर दी जाती है. 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है. 

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