200 साल की गुलामी झेलने वाले भारत ने एक झटके में ही कैसे पछाड़ दिया ब्रिटेन को!

तेरवही सदी में जन्में ईरान (Iran) के मशहूर फ़ारसी कवि व साहित्यकार शेख़ सादी ने लिखा था- "तकदीर, तख्त, बादशाही,शान-शौकत, हुक्म, रोब और पकड़-धकड़, ये चीजें कभी टिकने वाली नहीं, इसलिए किसी काम की भी नहीं. संसार की हर चीज उसी पैदा करने वाले का नाम ले-लेकर शोर मचा रही है, लेकिन सुनता वही है, जिसके कान सुन सकते हैं.फिर चाहे वह कोई फकीर हो, पीर हो, बादशाह हो, मुरीद हो या कोई शायर."
उनकी कही बातें आज इसलिये याद आ रही हैं कि गुलाम भारत (Slave India) को कबीलाई लुटेरों से लेकर मुगलों व अंग्रेजों ने जमकर लूटा. किसी ने कोई परवाह नहीं की लेकिन इस लूटपाट का कलंक आज भी उन्हीं अंग्रजों के नाम पर ज्यादा बड़ा है,जिन्होंने भारत में तकरीबन 190 साल तक राज किया और हमारा भारी-भरकम खजाना लूटने के अलावा यहां की पुरातन संस्कृति-सभ्यता को बर्बाद करने के साथ ही हिंदू-मुसलमान के बीच नफ़रत के ऐसे जहरीले ऐसे बीज बो गए,जिसका नतीजा आज एक नासूर बनते हुए हम सब देख रहे हैं. उन्हीं शेख सादी ने ये भी कहा था कि "वक़्त का ये उसूल है कि उसकी घड़ी की जो सुई 12 तक पहुंचती है,उसे 6 पर आने में बहुत ज्यादा देर नहीं लगती."
इसलिये हमारे लिए खुशखबरी की बात ये है कि जिन अंग्रेजों ने तकरीबन दो सदी तक हमें अपना गुलाम बनाये रखा था,उसी ब्रिटेन को पछाड़ते हुए भारत,अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है.ये ख़बर ऐसे वक्त आई है,जब ब्रिटिश सरकार अपने लोगों के जीवन यापन में आ रही मुश्किलों से जूझ रही है.लिहाज़ा, ये खबर उसके लिए भारत की ओर से मिला एक ऐसा बड़ा झटका है,जिसे समझने में उसे अभी वक़्त लगेगा कि आखिर ऐसा क्यों और कैसे हो गया?
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 के अंतिम तीन महीने में ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए भारत ने विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने का श्रेय हासिल कर लिया है. अंतराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund) के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) आंकड़ों के अनुसार, यह 'केलकुलेशन' यूएस डॉलर पर आधारित है.
बड़ी बात ये भी है कि महज़ पिछले एक दशक में दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत ने इतनी ऊंची छलांग लगाई है कि कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता था.अब भारत दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्था में शुमार हो गया है.यानी अमेरिका,चीन, जापान और जर्मनी ही अब भारत से आगे हैं.दुनिया के आर्थिक मंच पर इसे भारत की सबसे बड़ी व ऐतिहासिक उपलब्धि के रुप में देखा जा रहा है क्योंकि इन पिछले 10 सालों में से 8 साल से देश में मोदी सरकार ही है,इसलिये अगर वह इस उपलब्धि का श्रेय लेती है,तो इस पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिये.
बता दें कि ब्रिटेन में नए प्रधानमंत्री का चुनाव जल्द होना है जिसके लिए उम्मीदवार तय करने की कवायद अपने अंतिम दौर में है.अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषक मानते हैं कि इंटरनेशनल रैंकिंग में ब्रिटेन की यह गिरावट देश के नए प्रधानमंत्री के लिए एक बड़ी चुनौती की तरह है. कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य सोमवार को बोरिस जॉनसन के उत्तराधिकारी को चुनेंगे. हालांकि वे किस नाम पर अपनी मुहर लगाएंगे,ये फिलहाल साफ नही है.लेकिन ब्रिटेन के राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस रेस में
भारतीय मूल के मंत्री ऋषि सुनक को वहां की विदेश मंत्री लिज ट्रुज पीछे छोड़ सकती हैं.हालांकि रायशुमारी के शुरुआती चरणों में यही माना जा रहा था कि ऋषि सुनक इसमें सबसे आगे हैं ,जो भारतीय मूल के पहले ब्रिटिश पीएम बन सकते हैं लेकिन ब्रिटेन की इकॉनमी की बड़ी और कड़वी हक़ीक़त ये भी है कि पीएम पद का उम्मीदवार बनने की रेस में जीत का सेहरा चाहे जिसके सिर बंधे लेकिन उसे एक ऐसे देश की हुकूमत को संभालना होगा,जो पिछले चार दशकों में सबसे तेज बढ़ती हुई मुद्रास्फीति और मंदी के बढ़ते जोखिमों का सामना कर रहा है.गौर करने वाली बात ये भी है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड की चेतावनी इस मामले में ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है, जिसका कहना है कि यह दौर 2024 तक जारी रह सकता है.
हालांकि ब्रिटेन से तुलना करें,तो अंतराष्ट्रीय एजेंसिया भी ये मान रही हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के इस साल 7 फीसदी से अधिक बढ़ने का अनुमान है. दूसरी ओर, ब्रिटेन को लेकर कहा जा रहा है कि उसकी मुश्किलें आने वाले समय में और बढ़ सकती है.वह इसलिये कि ब्रिटेन में जीडीपी दूसरी तिमाही में कैश के संदर्भ में केवल एक फीसदी बढ़ी है. यदि हम मुद्रास्फीति को ध्यान में रखें तो इसमें 0.1% की कमी आई है. अंतरराष्ट्रीस मुद्रा कोष यानी आईएमएफ के अपने पूर्वानुमान बताते हैं कि भारत इस साल सालाना आधार पर डॉलर के मामले में ब्रिटेन से आगे निकल गया है और अब वह केवल अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी से ही पीछे है. एक दशक में भारत की यह उछाल उल्लेखनीय है. एक दशक पहले भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में 11वें क्रम पर था जबकि यूके पांचवें नंबर पर था.
अब देश में आप महंगाई या बेरोजगारी का रोना भले ही रोते रहें लेकिन इस रिपोर्ट ने सरकार को एक बड़ा हथियार दे दिया है कि इस सबके बावजूद भारत दुनिया की पांचवी बड़ी इकॉनमी बन गया है.इसलिये हर सवाल का जवाब अगर यही मिले,तो हैरान होने की कोई जरुरत नहीं है.
नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.






























