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NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक..., CJP आंदोलन ने कैसे हिला दी हुकूमत

Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्र सरकार की तरफ से सभी मांगों को मान लेने के बाद सीजेपी ने आंदोलन खत्म करने का ऐलान किया और छात्रों से घर जाने की अपील की.

कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे ने भारतीय राजनीति में आंदोलन की परिभाषा को फिर से गढ़ा है. भारत में अब तक रैलियों, पर्चों और भाषणों से महीनों तक जमीनी स्तर पर भीड़ जुटाकर आंदोलनों को सफल बनाया जाता था. जबकि इस आंदोलन में पेपर लीक का मुद्दा जिस तरह से सोशल मीडिया पर उठाया गया उससे देशभर के लोग इससे जुड़ते गए और इसका एपी सेंटर रहा जंतर-मंतर. सरकार की ओर से संगठन की अन्य मांगें मान लिए जाने के बाद सीजेपी ने 36 दिन से जारी अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की.

प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शनिवार को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्री नियुक्त किया गया है. जोशी को उनके उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है.

शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त चार्ज मिलने पर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, 'मैं यह जिम्मेदारी निभाऊंगा. मैं प्रधानमंत्री का शुक्रगुजार हूं. पीएम मोदी की सरकार के पिछले 12 सालों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं. पिछले चार-पांच सालों में धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति भी लागू की और कई जरूरी काम किए गए. देश ने नई शिक्षा व्यवस्था में काफी तरक्की की है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मैं अपनी पूरी काबिलियत से काम करूंगा और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी लगन से पूरा करूंगा.'

धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा

इस पूरे घटनाक्रम को युवाओं के नेतृत्व वाले उस आंदोलन के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक विवाद को लेकर लाखों लोगों को एकजुट किया था. धर्मेंद्र प्रधान ने दोपहर में अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले 10 दिन के घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. उन्होंने कहा, 'जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, उसका राष्ट्र-विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझें, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है.' 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से प्रधान का इस्तीफा रात में स्वीकार कर लिया. सीजेपी प्रवक्ता सौरव घोष ने देशभर में सभी जगहों पर अपना विरोध-प्रदर्शन तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की घोषणा करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा सरकार नीट विवाद को लेकर कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने और बीजेपी शासित सभी राज्यों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेने पर भी सहमत हो गई है. 

36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकार ने मानी बात

सीजेपी ने 25 जुलाई दोपहर शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की. यह सीजेपी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बातचीत थी. इसमें केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने किया, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल में सौरव दास के अलावा आशुतोष रांका शामिल थे. रांका ने कहा, 'चूंकि, सरकार ने 36 दिन के विरोध-प्रदर्शन के बाद हमारी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए हम सभी से अपील करते हैं कि वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध स्थल से हट जाएं और घर लौट जाएं.'  

सौरव दास ने कहा कि उन्होंने संगठन की मांगों का एक मसौदा सरकार के साथ साझा किया है, जिस पर मंगलवार (28 जुलाई 2026) तक लिखित गारंटी मिलेगी. जेपी नड्डा ने कहा कि सीजेपी के प्रतिनिधि बैठक में एक लिखित मसौदा लेकर आए थे, जिसमें उन्होंने आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों से जुड़े कुछ बिंदु रखे हैं. उन्होंने कहा कि सीजेपी ने (मसौदे में) बाकी मांगें भी उठाई हैं, जिनमें कोई जवाबी कार्रवाई न किया जाना, मुआवजा दिया जाना और संगठन के पांच-सूत्री चार्टर पर विचार किया जाना शामिल है. नड्डा ने कहा, 'हमने इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. चर्चा के बाद पहला निर्णय यह लिया गया कि कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी. अगर दिल्ली पुलिस या बीजेपी शासित राज्यों में कोई प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है, तो उसे वापस ले लिया जाएगा.'

जंतर-मंतर पर खुशी की लहर 

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर खुशी की लहर दौड़ पड़ी और विरोध स्थल पर 'हम जीत गए' के नारे गूंजने लगे. जश्न जारी रहने के बीच अधिकारियों ने विरोध-प्रदर्शन को खत्म करने की प्रक्रिया की निगरानी शुरू की और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक तितर-बितर होने का आग्रह किया, जबकि दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए आसपास के स्टेशन पर सभी एंट्री और एग्जिट गेट फिर से खोल दिए. 

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान सार्वजनिक विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं. उनसे पहले एमजे अकबर ने 2018 में विदेश राज्य मंत्री के पद से उस समय इस्तीफा दे दिया था, जब मीटू आंदोलन के दौरान उन पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा 2014 के बाद उन कुछ मौकों में से एक है, जब मोदी सरकार ने जनता के विरोध या राजनीतिक दबाव के बीच अपने पैर खींचे हैं. 2015 में मोदी सरकार को बुनियादी ढांचे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण को आसान बनाने के मकसद से भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन की अपनी योजना टालनी पड़ी थी, जबकि 2021 में उसे तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी थी. 

राहुल ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा के लिए “सीधे तौर पर जिम्मेदार” हैं. उन्होंने शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों और पैलेट गन के इस्तेमाल की मंजूदी देने का भी आरोप लगाया. हालांकि, बीजेपी ने प्रधान का बचाव किया. पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि उनके फैसले में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के उच्चतम मानक झलकते हैं. 

दो साल पुराने पेपर लीक रोधी कानून में संशोधन करने के उद्देश्य से सोमवार (27 जुलाई 2026) एक बिल लोकसभा में पेश किया जाएगा. इस बिल में आरोपियों की तुरंत सुनवाई के लिए हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और सजा को और कड़ा करने का प्रस्ताव किया गया है. इसमें पेपर लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.  संगठित अपराधों के लिए बिल में कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है. 

सीजेपी आंदोलन ने कैसे पकड़ी रफ्तार

परीक्षा प्रणाली में सुधार, नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में जवाबदेही तय करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर 20 जून को छात्रों का विरोध-प्रदर्शन शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यह Gen-Z के नेतृत्व वाले सबसे अहम आंदोलनों में से एक बन गया. जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 28 जून को छात्रों के समर्थन में उतरने और जंतर-मंतर पर आइसा के छह कार्यकर्ताओं के साथ अनशन शुरू करने के बाद सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया.  

दिल्ली पुलिस की ओर से वांगचुक को 18 जुलाई को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने के बाद छात्रों और युवाओं का आक्रोश और बढ़ गया. वांगचुक ने केंद्र से प्रदर्शनकारियों की मांगें मानने का आश्वासन मिलने के बाद गुरुवार (23 जुलाई) को 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया. केंद्र सरकार और सीजेपी नेतृत्व के बीच पहली आधिकारिक बैठक 20 जुलाई को जेपी नड्डा के आवास पर हुई थी. उसी दिन हजारों प्रदर्शनकारियों ने संगठन के ‘संसद चलो’ आह्वान पर संसद की ओर मार्च शुरू किया था, लेकिन पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करके उन्हें पीछे धकेल दिया था.

इस दौरान कई लोग घायल हुए थे.  दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की बातचीत शुक्रवार को हुई थी, जब केंद्र ने बैठक किसी मंत्री के आवास या कार्यालय के बजाय एक तटस्थ स्थल पर आयोजित करने की सीजेपी की मांग स्वीकर कर ली.

विक्रम कुमार एबीपी न्यूज़ में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं और डिजिटल टीम का हिस्सा हैं. एबीपी लाइव के नेशनल डेस्क पर विक्रम देश और विदेश की राजनीति से जुड़ी खबरों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ब्रेकिंग न्यूज़ पर इनका विशेष फोकस रहता है. देश-विदेश के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर लिखते रहते हैं. यूएस-ईरान युद्ध के दौरान इन्होंने कई इन-डेप्थ खबरें की हैं जिन पर कई मिलियन व्यूज आए. साल 2023 में प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया से मास मीडिया हिंदी में मास्टर डिग्री हासिल करने के बाद एबीपी लाइव के साथ करियर की शुरुआत की. Email: vikramk@abpnetwork.com

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