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BLOG: जीत का मंत्र है, 'Take it Easy Policy'

कप्तानी का दबाव क्या होता है विराट कोहली को इसकी झलक मिलना शुरू हो गई है. उन्हें कई बार ये कहना पड़ रहा है कि ऐसा नहीं है कि टीम इंडिया अब कभी हारेगी ही नहीं. मतलब क्रिकेट फैंस को टीम की हार को पचाना भी आना चाहिए. बैंगलोर में शनिवार से शुरू होने वाले टेस्ट मैच में वापसी के लिए उनकी टीम ने कमर कस ली है. विराट कोहली ने बाकयदा वायदा किया है कि उनकी टीम सीरीज में वापसी करेगी. इतिहास गवाह है कि इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के खिलाफ भारतीय टीम सीरीज का पहला मैच हारने के बाद जबरदस्त वापसी कर चुकी है.

इंग्लैंड के खिलाफ अजित वाडेकर की कप्तानी में भारतीय टीम दिल्ली में खेला गया पहला टेस्ट मैच छह विकेट से हार गई थी. इसके बाद कोलकाता और चेन्नई में उसने जीत हासिल की. 2001 के एतिहासिक सीरीज में कोलकाता के इडेन गार्डन्स में मिली जीत सभी को याद है. तीसरा वाकया श्रीलंका के खिलाफ हालिया सीरीज का ही है. विराट कोहली ही कप्तान हुआ करते थे. बैंगलोर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैदान में उतरने से पहले विराट कोहली को तीन बातों पर गौर करना होगा. ये तीन बातें जीत का मूलमंत्र भी हैं और खतरा भी. अगर इन तीन बातों को काबू में कर लिया गया तो विराट कोहली का सीरीज में वापसी का वायदा जरूर पूरा होगा. बाएं हाथ के स्पिनर से सावधान: श्रीलंका में बाएं हाथ के स्पिनर हैं रंगना हेराथ. करीब डेढ़ साल पहले उन्होंने भारतीय टीम का वही हाल किया था जो पिछले मैच में स्टीव ओकैफी ने किया. विराट कोहली तब भी टीम के कप्तान थे, अब भी हैं. उनकी अब तक की कप्तानी में श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया से मिली हार को ही हमेशा याद भी रखा जाएगा. चतुराई इसी में है कि इन दोनों हार के बीच के ‘कनेक्शन’ पर मेहनत की जाए. आपको याद दिला दें कि श्रीलंका दौरे में गॉल टेस्ट मैच की दूसरी पारी में भारतीय टीम को जीत के लिए सिर्फ 176 रन बनाने थे.

Angelo Mathews, Rangana Herath

रंगना हेराथ ने 7 विकेट चटकाए थे और भारतीय टीम को उस टेस्ट मैच में अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था. पिछले मैच में तो फिर भी भारत के लिए लक्ष्य बेहद मुश्किल था, लेकिन इन दो टेस्ट मैचों की तुलना करने का मकसद ये था कि विराट कोहली और बाकी खिलाड़ियों को बाएं हाथ के स्पिनर से सावधान रहना होगा. ये आंकड़े विराट कोहली और उनकी टीम के खिलाड़ियों के दिमाग में रहने चाहिए कि पिछले मैच में स्टीव ओकैफी ने 12 विकेट चटका दिए. पहली पारी में उन्होंने 13.1 ओवर में 35 रन देकर छह विकेट चटकाए, जबकि दूसरी पारी में 5 ओवर की गेंदबाज़ी में 35 रन पर छह विकेट. बेहतर होगा भारतीय बल्लेबाज ओकैफी के खिलाफ बेहतर रणनीति बनाएं. गेंद की लाइन को समझकर बल्लेबाजी करें.

विपरीत परिस्थितियों में ‘रीयल टेस्ट’: इस सोच का कनेक्शन भी डेढ़ साल पहले वाले श्रीलंका दौरे से ही है. जिसका जिक्र लगातार हो रहा है. विराट कोहली की कप्तानी में गॉल टेस्ट में हार के बाद भारतीय टीम ने सीरीज में जबरदस्त वापसी की थी. कोलंबो में खेले गए अगले ही टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने श्रीलंका को 278 रनों के अंतर से हराया था. उस मैच में केएल राहुल और अजिंक्य रहाणे ने शतक लगाया था. गेंदबाजी में आर अश्विन और अमित मिश्रा ने कमाल किया था. इसके बाद सीरीज के तीसरे और आखिरी टेस्ट मैच में भी भारतीय टीम को जीत हासिल हुई थी. जीत का अंतर 117 रनों का था. चेतेश्वर पुजारा ने शानदार 145 रनों की पारी खेली थी. इस मैच में ईशांत शर्मा ने शानदार गेंदबाजी की थी और अमित मिश्रा ने बखूबी उनका साथ दिया था. इसके अलावा पूरी टीम का एकजुट प्रदर्शन जीत का मूलमंत्र बना था. BLOG: जीत का मंत्र है, 'Take it Easy Policy जयंत यादव या कुलदीप यादव? बैंगलोर में मैच से पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में विराट कोहली ने जयंत यादव का पूरा बचाव किया. उन्होंने साफ साफ कहा कि पिछला मैच भले ही जयंत के लिए अच्छा नहीं गया लेकिन उनका हालिया फॉर्म जबरदस्त रहा है. उन्होंने प्लेइंग 11 को लेकर कोई खुलासा नहीं किया लेकिन जयंत यादव बनाम कुलदीप यादव भी एक ‘थ्योरी’ है जिस पर विराट कोहली को काम करना चाहिए. सच्चाई ये है कि जयंत यादव ने पिछले मैच में बहुत औसत गेंदबाजी की थी. दोनों ही पारियों में उन्हें सिर्फ एक एक विकेट मिला था. उन्हें टीम में रखने के पीछे की सोच बस इतनी है कि वो अच्छी बल्लेबाजी भी कर लेते हैं. इंग्लैंड के खिलाफ पिछली सीरीज के मोहाली टेस्ट में उन्होंने हाफ सेंचुरी लगाई थी. इसके बाद मुंबई में उन्होंने शानदार शतक भी लगाया था. लेकिन पिछले मैच में उनकी गेंदबाजी को देखकर विराट कोहली इस कुलदीप यादव को भी प्लेइंग 11 में रखने पर सोच सकते हैं. कुलदीप यादव के अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरूआत होना अभी बाकी है. वो घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. ‘चाइनामैन’ गेंदबाज हैं. बहुत हद तक मुमकिन है कि कंगारुओं को बल्लेबाजी करने में परेशान कर सकते हैं. ये सच है कि विराट कोहली हर मैच के बीतने के साथ बतौर कप्तान परिपक्व होते जाएंगे, लेकिन ये भी सच है कि उनकी परिपक्वता का आंकलन आम क्रिकेट फैन सिर्फ एक कसौटी पर करेगा...और वो इकलौती कसौटी- मैच में जीत या हार.
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