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Blog: जीत के जश्न में अपनी गलतियों को ना भूलें विराट कोहली

टीम इंडिया ने जोहांसबर्ग टेस्ट मैच जीत लिया. टेस्ट सीरीज दक्षिण अफ्रीका के खाते में गई. इस टेस्ट सीरीज की गलतियों से विराट कोहली को सबक लेना होगा. वरिष्ठ खेल पत्रकार शिवेंद्र कुमार सिंह का आंकलन

जोहांसबर्ग टेस्ट मैच में जीत के बाद टीम इंडिया में जश्न का माहौल है. भारतीय टीम ने जोहांसबर्ग में अपना शानदार रिकॉर्ड कायम रखा है. विराट कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया ने ये टेस्ट मैच 63 रनों से जीता. विराट कोहली ने इस जीत के बाद कहा कि ये लंबे समय तक याद रखी जाने वाली जीत है. इसमें कोई दो राय भी नहीं है. लेकिन सवाल ये है कि क्या इस सीरीज का नतीजा भी भारतीय टीम के पक्ष में हो सकता था ? ये सवाल इसलिए जायज है क्योंकि भारतीय टीम के गेंदबाजों ने पूरी सीरीज में शानदार प्रदर्शन किया. मुश्किल भारतीय बल्लेबाजों को लेकर रही. जो दो टेस्ट मैच दक्षिण अफ्रीका ने जीते उसमें हार जीत का अंतर सिर्फ 72 रन और 135 रन था. ये अंतर इस बात को साबित करता है कि दोनों टीमों के प्रदर्शन में फर्क बहुत मामूली था. दोनों टीमें अच्छा खेलीं. जमकर मेहनत की. नतीजा उस टीम के पक्ष में गया जो ज्यादा संतुलित थी. विराट कोहली के लिए सबक इसी बात में है. सीरीज के पहले और दूसरे टेस्ट मैच में उन्होंने जो प्लेइंग 11 खिलाया, वो संतुलित नहीं था. इस बात को लेकर मीडिया से हुए सवाल जवाब के दौर में विराट कोहली को गुस्सा भी आया. बावजूद इसके उन्हें इस बात को परिपक्वता के साथ सोचना होगा कि क्या उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में करीब ढाई दशक से चले आ रहे जीत के सूखे को खत्म करने का मौका खो दिया?

अजिंक्य रहाणे के बिना टेस्ट में उतरने का खतरा

विराट कोहली ने हालिया श्रीलंका सीरीज के प्रदर्शन के आधार पर दक्षिण अफ्रीका में प्लेइंग 11 चुनने की बड़ी भूल की. ये सच है कि श्रीलंका सीरीज में रहाणे अच्छी फॉर्म में नहीं थे, लेकिन मौजूदा टेस्ट टीम में उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. गावस्कर जैसे दिग्गज खिलाडी ने रहाणे के बारे में पुरानी कहावत कही ‘फॉर्म इज टेंपरेरी क्लास इस परमानेंट’. पहले दोनों टेस्ट मैच में भारतीय बल्लेबाजी जब लड़खड़ाई तो उसे संभालने के लिए सिर्फ चेतेश्वर पुजारा थे. उनके साथ कोई ऐसा बल्लेबाज नहीं था जो क्रीज पर खड़ा होकर दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों का सामना करे. अजिंक्य रहाणे की जगह पर विराट कोहली ने रोहित शर्मा को प्लेइंग 11 का हिस्सा बनाया. रोहित शानदार खिलाड़ी हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि विदेशी पिचों पर वो टेस्ट मैचों में अभी खुद को साबित नहीं कर पाए हैं. रोहित लगातार चूकते रहे और नतीजा मिडिल ऑर्डर में जो मजबूती होनी चाहिए वो नहीं दिखाई दी. अजिंक्य के टीम में रहने का फर्क जोहांसबर्ग टेस्ट में दिखाई दिया. पहली पारी में तो वो सिर्फ 9 रन बना पाए, लेकिन दूसरी पारी में उनके बल्ले से निकले 48 रन महत्वपूर्ण रहे. दूसरी पारी में जब पिच पर बल्लेबाजी करना मुश्किल होता जा रहा था उन्होंने टीम की तरफ से सबसे ज्यादा योगदान दिया. उनका प्रदर्शन विराट कोहली के लिए सबक है, सबक इस लिहाज से टेस्ट टीम के प्लेइंग 11 में उपकप्तान को बाहर बिठाने की भूल कितनी भारी पड़ती है.

भुवनेश्वर कुमार हैं लंबी रेस का घोड़ा

जोहांसबर्ग टेस्ट में प्लेइंग 11 का दूसरा बदलाव थे, भुवनेश्वर कुमार. जिन्हें केपटाउन टेस्ट में अच्छे प्रदर्शन के बाद भी सेंचुरियन टेस्ट मैच के प्लेइंग 11 में विराट कोहली ने जगह नहीं दी थी. केपटाउन टेस्ट में भुवनेश्वर कुमार ने 6 विकेट लिए थे. अगले टेस्ट की प्लेइंग 11 से वो नदारद थे. विराट कोहली इससे पहले भी एक टेस्ट में अच्छे प्रदर्शन के बाद अगले टेस्ट में भुवी को ‘ड्रॉप’ कर चुके हैं. एक बेहतरीन गेंदबाज के साथ साथ भुवनेश्वर कुमार निचले क्रम में जिस परिपक्वता से बल्लेबाजी करते हैं उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है. विराट कोहली को भुवनेश्वर कुमार में और भरोसा दिखाना होगा. जोहांसबर्ग टेस्ट मैच की पहली पारी में भुवनेश्वर कुमार ने 30 रन बनाए. गेंदबाजी में दक्षिण अफ्रीका के दोनों सलामी बल्लेबाजों को आउट करने के अलावा उन्होंनें एबी डीविलियर्स का बेशकीमती विकेट लिया. दूसरी पारी में उन्होंने फिर 33 रन बनाए. दूसरी पारी में उन्हें 1 विकेट मिला. ये विराट कोहली के लिए दूसरा सबक है कि प्लेइंग 11 के साथ जबरदस्ती में की गई छेड़छाड़ का नतीजा कितना भारी पड़ता है.

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