एक्सप्लोरर

BLOG: मुस्लिम समुदाय के नाम खुला ख़त

क्रिकेट और सियासत से लेकर गांव के चोरों तक में 'दूसरा' बेहद महत्वपूर्ण है. चलिए आपको पहले क्रिकेट के 'दूसरा' का मतलब बताते हैं. ऑफ स्पिन गेंदबाज जब लेग साइड से गेंद को स्पिन कराता है तो इसे 'दूसरा' कहा जाता है. पाक के गेंदबाजों ने इस तरह की गेंद को फेंकना शुरू किया. ऐसी गेंदों से बल्लेबाज अक्सर चकमा खा जाते हैं. खैर.. अब गांव के चोर चोरी के दौरान कैसे 'दूसरा' का उपयोग करते हैं, यह समझिए... गांव में पहले जब भैंसों की चोरी होती थी तो चोर सबसे पहले भैंसों के गले की घंटी खोल लेते थे. एक चोर पूरब की तरफ घंटी बजाते हुए भागता था तो दूसरा चोर भैंसों को लेकर पश्चिम की तरफ भागता था. गांव के बेचारे भोले लोग घंटी की आवाज सुनकर पूरब की तरफ दौड़ते हैं. चोर कुछ दूर जाकर घंटी खेतों में फेंक देता है. गांव के लोगों के हाथ आती है घंटी.. दूसरा चोर आराम से भैंसों को लेकर नदी पार करा देता है. अब यहां भी क्रिकेट की तरह की दूसरा का उपयोग चोर चकमा देने के लिए करते हैं.

ठीक इसी तरह सियासत में भी 'दूसरा' का सबसे बड़ा रोल है. कभी कथित दलित हितैषी राजनीतिक आंदोलनों में जाइए फिर आपको पता चलेगा कि सवर्णों का डर कैसे सियासी मुखिया दिखाते हैं. कभी राजपूत, ब्राह्मण, भूमिहार इत्यादि के आंदोलनों में जाइए तब पता चलता है कि दलित और पिछड़ों से डरने की कितनी जरूरत है. कभी 'हिन्दू बचाओ' टाइप के आंदोलनों में जाइए तब पता चलेगा कि भाई मुसलमानों से डरने की कितनी जरूरत है. हिन्दू कितने खतरे में हैं. यहां से फार्मूला मिलेगा चार बच्चे पैदा करो.. इसी तरह मुसलमानों के कथित रहनुमा बताते हैं कि इस्लाम खतरे में है. इस खतरे को बताते हुए आपके बच्चों को कैसे कुर्बान कर देते हैं. जन्नत के ख्वाब तले आपके पढ़े लिखे बच्चों से लेकर अनपढ़ तक सभी अपने मां बाप के अरमानों को मिट्टी में मिला देते हैं.

मतलब साफ है कि चोरों से लेकर सियासी लुटेरों तक का धंधा 'दूसरा' का डर दिखा कर ही चलता है. जिसका जो काम है वही तो करेगा, सियासी लोगों का काम है सियासत... तो वे तो करेंगे. चोर का काम है भैंस चुराना तो वह तो चुराएगा ही.. अब सवाल यह है कि 'दूसरा' के डर के धंधे से बचें कैसे? इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? पहल कौन करे? हम क्या सिर्फ चोरों को गाली देकर अपनी भैंस बचा सकते हैं? क्या हम सिर्फ अपने सियासी दलों को भला बुरा कहकर डर के बजाए भरोसा कायम कर सकते हैं?

दलित बनाम सवर्ण, पिछड़ा बनाम दलित इत्यादि के बजाए चलिए आज बात सिर्फ मुसलमानों की करते हैं. कल नोएडा पुलिस के एक अफसर का फरमान आया.. पुलिस अफसर ने यहां की बड़ी-बड़ी कंपनियों को चिट्टी भेजकर कहा कि अगर उनके मुस्लिम कर्मचारी शुक्रवार को पार्क जैसी सार्वजनिक जगहों पर नमाज पढ़ते हैं तो इसके लिए कंपनी को दोषी माना जाएगा. नोएडा पुलिस की दलील है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले इस तरीके की पब्लिक मीटिंग से सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है. नोएडा पुलिस ने कंपनियों से कहा है कि वे अपने कर्मचारियों को मस्जिद, ईदगाह या दफ्तर के परिसर के अंदर ही नमाज पढ़ने के लिए कहें. 'इधर' और 'उधर' दोनों ने अपनी सियासी रोटी सेंकना शुरू कर दिया हैं. अब आप सोचिएगा कि आखिर इस तरह की घंटी क्यों और कौन बजा रहा है? आराम से बैठकर सोचिएगा.. इधर और उधर आपके दोनों कथित हितैषी कहीं रोटी और रोजगार नामक भैंस तो नहीं चुरा रहे हैं. अब ऐसे मौके पर समाधान क्या हो? इस डर से कैसे बचा जाए.. इस पर लगाम कैसे लगे.. ये सवाल फिर उठ खड़ा होता है. हम क्या करें. चलिए अब हम और आप आम लोग आपस में ही बैठकर अपनी भैंस बचाते हैं.

सुबह-सुबह आज सोशल मीडिया पर हिन्दी के लेखक अशोक कुमार पांडेय लिखते हैं कि सड़क पर या पार्क में नमाज़ नहीं होनी चाहिए. शाखा भी नहीं लगनी चाहिए. रामलीला भी नहीं होनी चाहिए. भंडारा भी नहीं होना चाहिए. नेताओं के भाषण भी नहीं होने चाहिए. गुरु नानक जयंती का प्रसाद भी नहीं बंटना चाहिए, जुलूस भी नहीं निकलना चाहिए, मुहर्रम का भी नहीं, कांवरिया जुलूस भी नहीं. धार्मिक कार्य धार्मिक स्थलों पर ही होने चाहिए या निजी भवनों में. लेकिन एक पर पुष्पवर्षा और दूसरे पर प्रतिबन्ध भयानक है. साम्प्रदायिक माहौल अगर बाक़ी सब से नहीं बिगड़ता तो नमाज़ पढ़ने से भी नहीं बिगड़ता.

सवाल जायज है. और सामाजिक हित में ज्वलंत भी.. बराबरी के पैमाने पर खरा भी. लेकिन हमें अपने आस पड़ोस के मुसलमानों से भी यह पूछना होगा कि भाई हम ऑफिस में अपने डेस्क पर लक्ष्मी गणेश, विष्णु की मूर्ति रखते हैं.. आप खुलकर पांच वक्त की नमाज़ या शुक्रवार की नमाज़ अपने बहुसंख्यक साथी के सामने क्यों नहीं पढ़ते? वह कौन सा झिझक या डर है या अप्रत्यक्ष रूप से खुद को हर वक्त वहुसंख्यक समाज के आगे साबित करने का दबाव है जिससे मुस्लिम कर्मचारी ऑफिस में अपनी सीट के पास नमाज़ तक नहीं पढ़ पाते हैं. अपने बहुसंख्यक समुदाय के साथी के घर पूजा के दौरान मूर्ति के सामने सिर झुकाते हैं? आप अपने अंदर से बहुसंख्यकों को साबित करने का डर निकाल दीजिए. मेरा निजी अनुभव है कि अभी तक सिर्फ एक महिला मुस्लिम कर्मचारी अपनी सीट पर नमाज पढ़ती थी. किसी ने उसे धार्मिक कट्टर नहीं कहा या समझा. हां.. बहुसंख्यकों का डर ही तो है जिस वजह से दिल्ली जैसी जगहों पर भी मुसलमानों में असुरक्षा का भाव रहता है. इसी वजह से वह अपनी बस्ती में सिकुड़ते जाते हैं. इस असुरक्षा के भाव ने हिन्दू और मुसलमानों में इतनी खाई पैदा की है कि हिन्दू और मुसलमान आपस में एक दूसरे को पहचान भी नहीं पा रहे हैं. मैं अपनी डेस्क पर ऑफिस आने के बाद सबसे पहले भगवान की तस्वीरों को प्रणाम करता हूं. मुझे इसके लिए कोई धार्मिक कट्टर कहे या लिबरल, इसका कोई फर्क नहीं पड़ता. फिर आप अपनी धार्मिक गतिविधियों से हिन्दुओं को दूर क्यों करते हैं. आप खुलकर पांच वक्त की नमाज़ या शुक्रवार की नमाज़ अपने बहुसंख्यक साथी के सामने क्यों नहीं पढ़ते? आप पढ़ना शुरू कीजिए.. बहुसंख्यकों के सामने खुद को साबित मत कीजिए.. आप कहां तक खुद को समेटेंगे, कब तक खुद को सीमा में बांधेंगे. हमें आपसे ही उम्मीद है. दोनों समुदाय के सियासी लुटेरे एक दूसरे का डर दिखाकर रोटी और रोजगार लूटते रहेंगे.

हां, यह स्पष्ट समझिए आपको तिलक से डराया जाएगा.. हमें टोपी और दाढ़ी से.. इस डर से निकलने का एक ही उपाय है. हमें एक दूसरे के समारोहों में घुलना मिलना होगा. अजीब दौर चल रहा है.. समाधान समाज से ही निकलेगा. आप निकाह और जलसे में मुसलमानों से अधिक हिन्दुओं को बुलाइए.. हम अपने धार्मिक कर्मकांडों या पारिवारिक आयोजनों में मुस्लिम साथियों को ज्यादा बुलाएं. एक बार फिर सोचे मुस्लिम समाज कि आपके घर का हर बच्चा राम, सीता, लक्ष्मण, भरत और रावण को किसी हिन्दू बच्चे से ज्यादा जानता है. फिर क्यों हिन्दुओं के बच्चे खुदा और अल्लाह तक में अंतर नहीं जान पाते. निकाह, जलसा आदि से दूर क्यों हैं? दिल्ली का डर देवरिया के गांव में मुहर्रम पर हावी कैसे हो जाता है? आज आप बहुसंख्यकों के सामने खुद को साबित करते करते इस तरह सिकुड़ चुके हैं कि बहुसंख्यकों को आपके बारे में वही जानकारी है जो उसे अफवाहों के जरिए मिलती है. महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा का हथियार दिया है. जो आपके संवैधानिक अधिकार को प्रभावित करे वहां सविनय अवज्ञा का उपयोग करिए.. अहिंसा वीरता की चरम सीमा है. अपने मोहल्लों से बाहर निकलिये. डरिए मत..यदि भटके हुए कुछ लोग हिंसा करते हैं तो याद करिए आजादी के लिए अंग्रेजों की लाठी खाते हुए गांधी के नेतृत्व में कितनों ने जान दे दी. भरोसा कीजिए आज आपकी कुर्बानी से कल बहुसंख्यक पश्चाताप की आग में जलेंगे और फिर आपके और हमारे बच्चों के बीच कोई 'दूसरा' नहीं बचेगा. आप दुनिया के इकलौते देश में रहने वाले ऐसे मुसलमान हैं जिनकी विभिन्नता हर दस बीस किलोमीटर में बदल जाती है. इस खूबसूरती को बचा लीजिए.. सामाजिक सौहार्द बचाने के नाम पर आपका सिकुड़ना जरूरी नहीं है. हर शहर में कोई मुस्लिम बस्ती मत बनने दीजिए.. मेरे घर आकर आपका मूर्ति के सामने सिर झुकाना बिल्कुल जरूरी नहीं है. आप मेरे पिता से गले लगिए मैं आपके अब्बा के पैर छूता रहूंगा.. आप अपने अंदर के डर से बाहर निकलकर किसी दबाव में मेरे पिता के पैर ना छूएं...सिर्फ गले लगिए... सिर्फ गले लगिए...

आपका

प्रकाश......

लेखक से फेसबुक पर जुड़ें https://www.facebook.com/prakash.singh.3363 ट्वीटर पर जुड़ें- https://twitter.com/prakashnaraya18

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

बालेन शाह कितने अमीर? इंजीनियरिंग बिजनेस, म्यूजिक और रैप से कितनी कमाई करते हैं नेपाल के PM दावेदार
बालेन शाह कितने अमीर? इंजीनियरिंग बिजनेस, म्यूजिक और रैप से कितनी कमाई करते हैं नेपाल के PM दावेदार
'दो पैसों के सामने घुटने नहीं टेकें' शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की भारत सरकार पर सख्त टिप्पणी
'दो पैसों के सामने घुटने नहीं टेकें' शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की भारत सरकार पर सख्त टिप्पणी
'कर्नाटक में बच्चे इस्तेमाल नहीं करेंगे सोशल मीडिया', सिद्धरमैया सरकार का बड़ा फैसला
'कर्नाटक में बच्चे इस्तेमाल नहीं करेंगे सोशल मीडिया', सिद्धरमैया सरकार का बड़ा फैसला
IND vs NZ Weather Report: भारत-न्यूजीलैंड फाइनल मुकाबले में बारिश का खतरा? जानें अहमदाबाद का पूरा मौसम अपडेट
भारत-न्यूजीलैंड फाइनल मुकाबले में बारिश का खतरा? जानें अहमदाबाद का पूरा मौसम अपडेट
ABP Premium

वीडियोज

UP News: Hathras में भयंकर सड़क हादसा Etah-Aligarh Highway पर स्कॉर्पियो ने बाइक में मारी टक्कर
Chitra Tripathi: बेटे Nishant की लॉन्चिंग के लिए Nitish Kumar ने BJP को सौंपी सत्ता? | JDU | Bihar
Bharat Ki Baat: बिहार में BJP से CM की रेस में कौन आगे, क्या होगा फॉर्मूला? | Nitish Kumar | JDU
Sandeep Chaudhary: बिहार का CM कौन...BJP क्यों है मौन? | Nitish Kumar | Bihar | BJP | JDU
Bihar Politics: दिल्ली में Nitish Kumar..बिहार में BJP? निषाद या महिला कौन होगी मुख्यमंत्री? | JDU

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
बालेन शाह कितने अमीर? इंजीनियरिंग बिजनेस, म्यूजिक और रैप से कितनी कमाई करते हैं नेपाल के PM दावेदार
बालेन शाह कितने अमीर? इंजीनियरिंग बिजनेस, म्यूजिक और रैप से कितनी कमाई करते हैं नेपाल के PM दावेदार
'दो पैसों के सामने घुटने नहीं टेकें' शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की भारत सरकार पर सख्त टिप्पणी
'दो पैसों के सामने घुटने नहीं टेकें' शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद की भारत सरकार पर सख्त टिप्पणी
'कर्नाटक में बच्चे इस्तेमाल नहीं करेंगे सोशल मीडिया', सिद्धरमैया सरकार का बड़ा फैसला
'कर्नाटक में बच्चे इस्तेमाल नहीं करेंगे सोशल मीडिया', सिद्धरमैया सरकार का बड़ा फैसला
IND vs NZ Weather Report: भारत-न्यूजीलैंड फाइनल मुकाबले में बारिश का खतरा? जानें अहमदाबाद का पूरा मौसम अपडेट
भारत-न्यूजीलैंड फाइनल मुकाबले में बारिश का खतरा? जानें अहमदाबाद का पूरा मौसम अपडेट
Jab khuli Kitaab Review: पंकज कपूर और डिंपल कपाड़ियां की ये फिल्म दिल को छू लेगी, आपको अपने परिवार के करीब लाने वाली फिल्म 
जब खुली किताब रिव्यू: पंकज कपूर और डिंपल कपाड़ियां की ये फिल्म दिल को छू लेगी
असम में फाइटर जेट सुखोई हुआ क्रैश, वायुसेना के 2 पायलट शहीद
असम में फाइटर जेट सुखोई हुआ क्रैश, वायुसेना के 2 पायलट शहीद
इंग्लैंड से जीता भारत तो आ गई मीम्स की बाढ़, बुमराह से लेकर बैथल तक को यूजर्स ने दिया सम्मान
इंग्लैंड से जीता भारत तो आ गई मीम्स की बाढ़, बुमराह से लेकर बैथल तक को यूजर्स ने दिया सम्मान
Foods That Help You Sleep: गहरी नींद के लिए 'बटर हैक', एक्सपर्ट्स से जानें क्या सच में काम करता है यह ट्रेंड?
गहरी नींद के लिए 'बटर हैक', एक्सपर्ट्स से जानें क्या सच में काम करता है यह ट्रेंड?
Embed widget