Opinion: धुरंधर के बाद यशराज की Alpha को ट्रोल करने लायक भी नहीं समझा जा रहा क्या?

धुरंधर के बाद सिनेमा बदल गया है, काफी बदल गया है, और यशराज का स्पाई यूनिवर्स खत्म हो गया है, इस तरह की बातें खूब की जा रही थी. लेकिन क्या वाकई ऐसा हुआ है? क्या वाकई किसी एक फिल्म में इतनी ताकत है कि सालों से राज कर रहे पठान और टाइगर के पूरे यूनिवर्स को खत्म कर दे? अक्सर हम किसी एक फिल्म या स्टार के हिट होने पर अपनी कल्पनाओं में बाकियों को पाताल में धकेल देते हैं, लेकिन इस बार मामला थोड़ी गंभीर तो लग रहा है. यशराज के स्पाई यूनिवर्स की नई फिल्म अल्फा आ रही है, एक बार को तो ये फिल्म ट्रोल हो रही थी लेकिन अब तो वो भी नहीं हो रही बल्कि इसके साथ रिलीज हो रही हुमा कुरैशी की फिल्म बेबी डू डाई डू के ज्यादा चर्चे हैं.
इसके कमेंट सेक्शन में लोग बोल रहे हैं कि असली अल्फा तो बेबी है, असली धुरंधर तो बेबी है. अल्फा के साथ ही हुमा कुरैशी की बेबी डू डाई डू आ रही है. इस फिल्म के गानों से लेकर टीजर ट्रेलर सब लोगों को पसंद आ रहा है. लोग बोल रहे हैं कि असली अल्फा तो हुमा लग रही हैं. फिल्म को हुमा अपनी टीम के साथ जमकर प्रमोट भी कर रही हैं और हर तरह से प्रमोट कर रही हैं. अल्फा जैसी फिल्म के सामने वैसे तो आना रिस्की था, लेकिन अब हाल ये हो गया है कि अल्फा पर रिस्क मंडरा रहा है.
लोग हुमा को असली धुरंधर बोलने लगे हैं, क्योंकि उन्हें भी धुरंधर की तरह इंडस्ट्री से सपोर्ट नहीं मिला. धुरंधर के आने के बाद से ही स्पाई यूनिवर्स पर सवाल उठ रहे थे. लेकिन तब तक यशराज आलिया भट्ट, शरवरी और बॉबी देओल को लेकर अल्फा शुरू कर चुका था. कहा जा रहा था कि इसमें धुरंधर के बाद काफी बदलाव भी किए गए, लेकिन जैसे ही फिल्म का टीजर और ट्रेलर आया लोगों ने बता दिया कि स्पाई यूनिवर्स में उन्हें धुरंधर से कम कुछ मंजूर नहीं. जनता और ट्रोलर तो अपना रिएक्शन दे ही रहे हैं, यशराज को भी लगता है अपनी इस फिल्म पर भरोसा नहीं है.
अक्सर चुनाव में वो उम्मीदवार भी एंड तक जीत का दावा करता रहता है, जिसे पता होता है कि उसे उसकी फैमिली तक वोट नहीं देगी. लेकिन यशराज तो अपनी इस फिल्म को ठीक से प्रमोट तक नहीं कर पा रहा. मुंबई में टीजर के लॉन्च पर आलिया को मीडिया से मिलवा देना ताकि फिल्म को लेकर पॉजिटिव सेंटिमेंट बनाने की कोशिश की जा सके और दिल्ली में ट्रेलर लॉन्च पर 13 दर्जन छोटे मोटे इंफ्ल्यूएंसर्स को आलिया और शरवरी के बीच खड़ा करके 100-150 फोटो खिंचवा देना. क्या ऐसे स्पाई फिल्म का प्रमोशन होता है?
आलिया और शरवरी को कही लंच पर भेज देना और पैपराजी से कवर करवा लेना, या तो यशराज की समझ में नही आ रहा कि इस फिल्म को प्रमोट कैसे करें, या फिर उन्हें पता है कि कुछ भी कर लें ये फिल्म नहीं चलेगी लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए धुरंधर से पहले भी काफी नेगेटिव माहौल था. लेकिन इस फिल्म को लेकर खूब उल्टा सीधा बोल रहे थे, उस वक्त आदित्य धर की पत्नी यामी गौतम ने एक ट्वीट कर नेगेटिवटी फैलाने वालों की क्लास लगाई थी.
बहुत से लोगों ने इस फिल्म को दो ढाई स्टार देकर खराब बताया था, लेकिन फिल्म में हिंदी सिनेमा ही पलट दिया. फिर जब दूसरा पार्ट आया तो यही लोग 4 साढ़े चार स्टार देने लगे. कुछ ने तो फिल्म का पहला शो पूरा हुए बिना ही अपना रिव्यू डाल दिया क्योंकि उन्हें खुद को धुरंधर का हितैषी साबित करना था. यही अब सोशल मीडिया पर हो रहा है लोग धुरंधर के नाम पर अल्फा को ट्रोल कर रहे हैं. ये सही नहीं है हर फिल्म को मौका मिलना चाहिए ऐसा नहीं है कि धुरंधर के बाद अच्छी फिल्में आई नहीं और चली नहीं. इम्तियाज अली की मैं वापस आऊंगा पहले हफ्ते में बैठ गई थी. लेकिन उन्होंने कई दर्जन इंटरव्यू और पॉडकास्ट किए और थिएटर दर थिएटर जाकर लोगों का रिएक्शन जाना और उसे सोशल मीडिया पर शेयर किया.
फिल्म को फायदा हुआ और फिल्म चल पड़ी. बस इम्तियाज ने फिल्म में अपना भरोसा नहीं खोया. यही काम यशराज को करना चाहिए था, लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए. आलिया पर भी सवाल उठ रहे हैं कि वो समय रैना के शो लैटेंट में क्यों गईं? वो शो उनके लायक नहीं था, क्या यशराज किसी भी तरह से फिल्म की चर्चा चाहता था. उस वक्त चर्चा हुई भी हुई, ट्रोलिंग भी हुई लेकिन अब तो लोग बोल रहे हैं कि अल्फा नाम की कोई फिल्म आ रही है क्या. उम्मीद करते हैं कि ये फिल्म अच्छी हो और चले क्योंकि सिनेमा के हित में यही है कि नई नई चीजें आती रहे हैं और सिनेमा जिंदा रहे.
[यह आर्टिकल में पूरी तरह से निजी विचारों के ऊपर आधारित है]
“ Opinion: होर्मुज से उठता धुआं, अरब दुनिया की बेचैनी और आने वाले दिनों का खतरा

ट्रेंडिंग न्यूज
टॉप हेडलाइंस




























