CNG की जगह LNG पर क्यों चलाए जाते हैं हैवी ट्रक, जानें कितनी बढ़ जाती है कमर्शल व्हीकल की रेंज?
Why LNG is better than CNG in Heavy Vehicles: जानिए क्यों हैवी ट्रकों के लिए CNG की जगह LNG बन रहा है पहली पसंद. 1,000 KM से ज्यादा की रेंज और ज्यादा कैपेसिटी के साथ जानें LNG के सभी फायदे.

Why LNG is better than CNG in Heavy Vehicles: बढ़ते पेट्रोल और डीजल के दामों से परेशान होकर लोग भारत में सीएनजी कारों की तरफ तेजी से रुख किए हैं. जिसके चलते अब कारों में ही नहीं लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल व्हीकल में भी सीएनजी का इस्तेमाल हो रहा है. हालांकि, बड़े वाहनों में सीएनजी से उतना फर्क पड़ता नहीं है क्योंकि सीएनजी के मुकाबले में अब बड़े वाहन एलएनजी को ज्यादा महत्व दे रहें हैं.
ऐसा माना जाता है कि, एलएनजी से हैवी ट्रक को अच्छा माइलेज मिल जाता है. यही वजह है कि अब ट्रक कंपनियां और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर्स सीएनजी की जगह एलएनजी से चलने वाले भारी ट्रकों पर तेजी से दांव लगा रहे हैं. तो चलिए समझते हैं कि कमर्शियल गाड़ियों के लिए एलएनजी क्यों खास है और यह रेंज कैसे बढ़ा देता है.
लिक्विड फॉर्म और एनर्जी डेंसिटी का मिलता है फायदा
बता दें कि, सीएनजी और एलएनजी दोनों ही से नेचुरल गैस हैं. लेकिन दोनों को स्टोर करने का तरीका एकदम अलग होता है. सीएनजी को गैस के रूप में हाई प्रेशर पर कंप्रेस करके भरा जाता है. दूसरी तरफ, एलएनजी को -162 डिग्री सेल्सियस तक अत्यधिक ठंडा करके लिक्विड में बदल दिया जाता है.
वहीं, लिक्विड फॉर्म में आने के बाद गैस का आयतन 600 गुना कम हो जाता है. इसका मतलब है कि एक ही साइज के टैंक में सीएनजी की तुलना में तीन गुना ज्यादा एलएनजी फ्यूल आसानी से आ जाता है. जिससे इंजन को ज्यादा पावर मिलती है.
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रेंज में मिलता है ज्यादा का फायदा
भारी कमर्शियल गाड़ियों में एलएनजी इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा इसकी माइलेज और ड्राइविंग रेंज में देखने को मिलता है. सामान्य सीएनजी ट्रकों को एक बार फुल टैंक कराने पर वे मुश्किल से 300 से 400 किलोमीटर की दूरी तय कर पाते हैं.
जबकि एलएनजी से चलने वाले भारी ट्रक एक बार फुल टैंक कराने पर आराम से 1,000 से 1,200 किलोमीटर तक का लंबा सफर बिना रुके तय कर सकते हैं. इतनी लंबी रेंज मिलने के कारण ड्राइवरों को बार-बार फ्यूल स्टेशन पर रुककर लंबी लाइनों में लगने की जरूरत नहीं पड़ती. जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बचत होती है.
भारी सामान ले जाने की बढ़ जाती है क्षमता
बता दें कि, सीएनजी गाड़ियों में ज्यादा गैस स्टोर करने के लिए कई भारी-भरकम सिलेंडरों को जोड़ना पड़ता है. जिससे गाड़ी का खुद का वजन बहुत बढ़ जाता है. लेकिन एलएनजी को इंसुलेटेड क्रायोजेनिक टैंक में लिक्विड के रूप में रखा जाता है.
जो वजन में सीएनजी सिलेंडर सेटअप से काफी हल्के होते हैं. टैंक का वजन कम होने की वजह से ट्रक की पेलोड कैपेसिटी बढ़ जाती है. इसके अलावा डीजल ट्रकों के मुकाबले एलएनजी ट्रकों से कार्बन उत्सर्जन भी लगभग 20 से 30 फीसदी तक कम होता है.
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