तेज ही नहीं, Highway पर बहुत Slow Driving भी पड़ेगी भारी
हाईवे पर ओवरस्पीडिंग ही नहीं बल्कि बहुत धीमी गति से गाड़ी चलाना भी खतरनाक है और भारी चालान का कारण बन सकता है. जानिए इससे जुड़े नियम और सुरक्षा के उपाय.

हमारे देश में अब हाईवे और एक्सप्रेसवे पर चलने वालों की गिनती बढ़ती जा रही है. क्योंकि, हाईवे पर ड्राइविंग करना बेहद ही आसान होता है बेहद ही कम समय में सफर भी पूरा हो जाता है. लेकिन कुछ लोग हाईवे पर बहुत तेजी गाड़ी चलाते हैं जिसके चलते उनका चालान करना पड़ता है. हालांकि, आपको यह भी बता दें कि, केवल तेज ही नहीं बल्कि हाईवे पर स्लो ड्राइविंग से भी चालान कट सकता है.
क्योंकि, ट्रैफिक नियमों के मुताबिक हाईवे पर स्लो ड्राइविंग न केवल आपके और अन्य यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है बल्कि इसके लिए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आपका भारी चालान भी काटा जा सकता है. चलिए विस्तार से जानतें हैं नियम और बचाव के तरीके.
न्यूनतम स्पीड सीमा का नियम
आपको बता दें कि, भारत के ज्यादातर एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे पर केवल अधिकतम गति सीमा ही नहीं बल्कि न्यूनतम गति सीमा भी तय होती है. जैसे कि, कई बड़े एक्सप्रेसवे पर यह नियम है कि गाड़ियां 60 या 80 किमी/घंटे से कम रफ्तार पर नहीं चलेंगी.
यदि कोई वाहन चालक बिना किसी वैध कारण के इस तय सीमा से बहुत धीमी गति से गाड़ी चलाता है तो उसे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन माना जाता है. हाईवे पर लगे हाई-टेक ऑटोमैटिक कैमरे और ट्रैफिक पुलिस ऐसे वाहनों की पहचान करके तुरंत चालान जारी कर देते हैं.

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पीछे आ रही गाड़ियों के लिए रहता है खतरा
हाईवे पर अक्सर लोग100 या 120 किमी/घंटे की रफ्तार से गाड़ी चलातें हैं और जब कोई वाहन बहुत धीमी गति से चले तो पीछे आ रहे ड्राइवर के पास ब्रेक लगाने या संभलने का बहुत कम समय बचता है.
ऐसे में पीछे से टक्कर होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है. रात के समय या कोहरे के दौरान धीमी गाड़ी और भी ज्यादा खतरनाक साबित होती है क्योंकि पीछे से आ रही तेज रफ्तार गाड़ी को यह अंदाज़ ही नहीं लग पाता कि आगे चल रहा वाहन कितनी धीमी गति पर है जिससे भयानक दुर्घटनाएं हो सकती हैं.

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ट्रैफिक जाम की भी होती है समस्या
इतना ही नहीं हाईवे पर हमेशा अलग-अलग लेन गाड़ियों की रफ्तार के हिसाब से बंटी होती हैं. तेज रफ्तार गाड़ियां ओवरटेकिंग लेन का इस्तेमाल करती हैं, जबकि भारी या सामान्य वाहन तय लेन में चलते हैं.
लेकिन जब कोई ड्राइवर बीच की या फास्ट लेन में बहुत धीमी गति से गाड़ी चलाना शुरू कर देता है तो पीछे गाड़ियों की लंबी कतार लग जाती है और बेवजह ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. इसके अलावा मजबूरन अन्य चालकों को गलत साइड से ओवरटेक करना पड़ता है जो दुर्घटनाओं को न्योता देता है.
कितने लग सकते हैं चालान?
बता दें कि, मोटर व्हीकल एक्ट के तहत लेन ड्राइविंग के नियमों का पालन न करने और ट्रैफिक में रुकावट पैदा करने पर धारा 177 या अन्य प्रावधानों के तहत 500 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
यदि धीमी ड्राइविंग की वजह से कोई गंभीर दुर्घटना हो जाती है तो चालक के खिलाफ रैश या डेंजरस ड्राइविंग के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. इसलिए हाईवे पर हमेशा तय गति सीमा के दायरे में ही गाड़ी चलाएं और अगर गाड़ी में कोई तकनीकी खराबी है तो उसे तुरंत सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर पार्क करें.
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