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भारत में आ रही नई टेक्नोलॉजी, अब गाड़ियां आपस में करेंगी बात, हादसे से पहले मिलेगा अलर्ट
सरकार भारत में V2V टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी कर रही है, जिससे गाड़ियां आपस में बात करेंगी और हादसे से पहले ड्राइवर को अलर्ट मिलेगा. आइए विस्तार से जानते हैं कि ये सिस्टम कैसे काम करेगा.

भारत में V2V टेक्नोलॉजी किया जा सकता है लागू
Source : freepik/nitin_gadkari
भारत में सड़क हादसों की संख्या काफी ज्यादा है. इन्हें कम करने के लिए सरकार एक नई और खास टेक्नोलॉजी लाने की तैयारी कर रही है, जिसका नाम व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V टेक्नोलॉजी है. इस टेक्नोलॉजी में गाड़ियां एक-दूसरे से सीधे बात कर सकेंगी. इसके लिए न इंटरनेट की जरूरत होगी और न ही मोबाइल नेटवर्क की. सरकार का मकसद है कि ड्राइवर को खतरे की जानकारी पहले ही मिल जाए, ताकि वह समय रहते सावधानी बरत सके और हादसे से बचा जा सके. आइए विस्तार से जानते हैं.
V2V सिस्टम कैसे काम करेगा?
- दरअसल, V2V टेक्नोलॉजी के तहत हर गाड़ी में एक छोटा सा डिवाइस लगाया जाएगा, जो दिखने में सिम कार्ड जैसा होगा. यह डिवाइस आसपास चल रही या सड़क किनारे खड़ी दूसरी गाड़ियों से लगातार सिग्नल भेजेगा और लेगा. जैसे ही दो गाड़ियां बहुत पास आती हैं या टकराने का खतरा होता है, सिस्टम तुरंत ड्राइवर को अलर्ट कर देगा. इससे ड्राइवर को पहले ही पता चल जाएगा कि आगे खतरा है और वह ब्रेक लगा सकता है.
हादसे रोकने में कैसे मददगार होगी टेक्नोलॉजी?
- ये टेक्नोलॉजी खास तौर पर उन हालात में बहुत फायदेमंद होगी, जहां अक्सर गंभीर हादसे होते हैं. जैसे सड़क किनारे खड़े वाहनों से पीछे से टकराने की घटनाएं कम होंगी. कोहरे के समय, जब सामने की गाड़ी दिखाई नहीं देती, तब भी ड्राइवर को अलर्ट मिलेगा. तेज रफ्तार ट्रैफिक में अचानक ब्रेक लगने या दूरी कम होने पर भी यह सिस्टम समय रहते चेतावनी देगा, जिससे एक्सीडेंट टल सकता है.
नितिन गडकरी ने क्या कहा?
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि सरकार इस टेक्नोलॉजी को जल्द लागू करना चाहती है. उन्होंने कहा कि कोहरा और सड़क पर खड़े वाहन कई बड़े हादसों की वजह बनते हैं. V2V टेक्नोलॉजी ऐसे मामलों में ड्राइवर को पहले ही सावधान कर देगी. साथ ही बसों में भी नए सेफ्टी फीचर्स जोड़े जाएंगे, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और मजबूत होगी.
कब तक लागू होगी V2V टेक्नोलॉजी?
- परिवहन मंत्रालय के अनुसार यह टेक्नोलॉजी 2026 के अंत तक शुरू की जा सकती है. पहले इसे नई गाड़ियों में लगाया जाएगा और बाद में धीरे-धीरे बाकी वाहनों में भी लागू किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट पर सरकार करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
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