शख्स का बड़ा अजूबा, स्कूटी के टायर और कबाड़ से बनाई सोलर कार, फुल चार्ज में चलती है इतना
Solar Car: पूरी गाड़ी को शख्स ने अपने लेवल पर डिजाइन और वेल्डिंग करके तैयार किया. इस सोलर कार को बनाना के लिए शख्स ने किसी बड़ी कंपनी या प्रोफेशनल सेटअप की मदद नहीं ली है.

आज के समय में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत और पॉल्यूशन के चलते लोग ऐसे ऑप्शन ढूंढ रहे हैं जो सस्ते होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित हो. गुजरात के एक शख्स ने इस सोच को सच कर दिया है. शख्स ने बेहद कम खर्च में एक ऐसी कार बनाई है, जिसे बिना पेट्रोल-डीजल के सिर्फ सूरज की रोशनी से चलाया जाता है. खास बात यह है कि इस कार को सिर्फ 30 हजार रुपये में तैयार किया गया है.
आमतौर पर कार बनाना बहुत महंगा काम होता है, लेकिन शख्स ने कबाड़ से इसे बनाने के लिए सारा सामान जुटाया. इसे बनाने के लिए पुराने लोहे का फ्रेम तैयार किया गया, जिसमें इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक के पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया. इसके अलावा कार में स्कूटी के टायर लगाए गए, जिससे लागत काफी कम हो गई. पूरी गाड़ी को शख्स ने अपने लेवल पर डिजाइन और वेल्डिंग करके तैयार किया, यानी इसमें किसी बड़ी कंपनी या प्रोफेशनल सेटअप की मदद नहीं ली गई है.
क्या है गाड़ी की खासियत?
इस कार की सबसे खास बात इसका सोलर सिस्टम है. गाड़ी के ऊपर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो सूरज की रोशनी से बिजली बनाते हैं. यह बिजली बैटरी में स्टोर होती है और उसी से कार चलती है. यानी इस गाड़ी को चलाने के लिए पेट्रोल या डीजल की जरूरत ही नहीं पड़ती. इससे न सिर्फ ईंधन का खर्च खत्म हो जाता है, बल्कि पॉल्यूशन भी नहीं होता है. यही वजह है कि इसे एक पर्यावरण के अनुकूल यानी ईको-फ्रेंडली कहा जा रहा है.
रनिंग कॉस्ट के मामले में भी बेहतर
रनिंग कॉस्ट के मामले में भी यह कार बेहद सस्ती है. पिछले करीब 4 साल में इस गाड़ी में सिर्फ एक बार बैटरी बदलनी पड़ी. इसके अलावा कोई बड़ा खर्च नहीं आया. इसका मतलब है कि एक बार बनाने के बाद यह कार लंबे समय तक लगभग फ्री में चलती रहती है, जो आम लोगों के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है. इस गाड़ी को एक बार फुल चार्ज पर 50 से 60 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है.
हालांकि, यह कार हाईवे या लंबी दूरी के सफर के लिए नहीं बनी है. इसकी स्पीड और कैपेसिटी सीमित है, इसलिए यह गांव या छोटे शहरों में रोजाना के छोटे-मोटे कामों के लिए ज्यादा उपयोगी है, जैसे बाजार जाना या आसपास की दूरी तय करना. ऐसे में जिस उद्देश्य से इसे बनाया गया है, उसमें यह काफी सफल नजर आती है.
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