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6 महीने में RC न हुई ट्रांसफर तो डीलर के नाम होगी गाड़ी, ये है प्रस्ताव
RC Transfer: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. केंद्र सरकार पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर रही है.

सरकार के प्रस्ताव में क्या?
Source : Magnific
अगर आप सेकेंड हैंड कार या बाइक खरीदने का प्लान बना रहे हैं या कोई पुरानी गाड़ी खरीदी है तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है. केंद्र सरकार पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर रही है.
इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इस प्रस्ताव का मकसद सेकेंड हैंड कार बाजार में होने वाली गड़बड़ियों, कानूनी विवादों और RC ट्रांसफर में होने वाली देरी को खत्म करना है. फिलहाल यह सिर्फ एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है, अभी इसे अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है.
सरकार ला रही नया नियम
- मौजूदा समय में अक्सर ऐसा होता है कि लोग पुरानी कार या बाइक खरीदने के बाद गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपने नाम पर ट्रांसफर कराने में कई महीने लगा देते हैं. कई मामलों में यह प्रोसेस सालों तक पूरा नहीं होता. ऐसे में RTO रिकॉर्ड में कार पुराने मालिक या डीलर के नाम पर ही दर्ज रहता है.
- अगर इस दौरान गाड़ी से कोई हादसा हो जाए, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन हो या किसी तरह का कानूनी मामला सामने आए तो सबसे पहले जिम्मेदारी रिकॉर्ड में दर्ज मालिक पर आती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार नया नियम लाने की तैयारी कर रही है.

- ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगर किसी शख्स ने सेकेंड हैंड गाड़ी खरीदी है और खरीदने के 6 महीने के अंदर RC अपने नाम पर ट्रांसफर नहीं कराई तो गाड़ी का मालिकाना रिकॉर्ड दोबारा उस डीलर के नाम पर दर्ज हो जाएगा, जिससे कार खरीदी गई थी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि RC ट्रांसफर का प्रोसेस तय समय के भीतर पूरी हो और किसी भी तरह की कानूनी उलझन पैदा न हो.
RC ट्रांसफर के लिए जरूरी शर्ते
- इस नए प्रस्ताव के तहत डीलर की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी. अगर तय समय तक RC ट्रांसफर नहीं होती है तो डीलर को भी इस प्रोसेस को पूरा कराने के लिए एक्टिव रहना होगा. इससे सेकेंड हैंड कार बेचने वाले डीलर भी जरूरी डॉक्यूमेंट समय पर तैयार कराएंगे और खरीदारों से कागजी कार्रवाई जल्द पूरी करवाने की कोशिश करेंगे. इससे गाड़ी खरीदने और बेचने की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा व्यवस्थित हो सकती है.
- सरकार ने RC ट्रांसफर के लिए कुछ जरूरी शर्तें भी प्रस्तावित की हैं. अगर गाड़ी का वैलिड RC, बीमा या PUC सर्टिफिकेट मौजूद नहीं है तो RC ट्रांसफर नहीं हो सकेगी. इसके अलावा अगर गाड़ी पर कोई ट्रैफिक चालान, जुर्माना या रोड टैक्स बकाया है तो पहले उसका भुगतान करना होगा. सभी बकाया राशि चुकाने और जरूरी डॉक्यूमेंट पूरे होने के बाद ही गाड़ी का मालिकाना हक नए खरीदार के नाम पर ट्रांसफर किया जा सकेगा.
सरकार का ये है मानना?
- सरकार का मानना है कि इस नियम से कई पुरानी समस्याओं का समाधान होगा. अभी तक RC ट्रांसफर में देरी के चलते पुराने मालिकों के पास ई-चालान पहुंच जाते थे, जबकि गाड़ी किसी और के पास होती थी. कई बार एक्सीडेंट या क्राइम होने पर पुलिस भी रिकॉर्ड में दर्ज पुराने मालिक तक पहुंचती थी. नए नियम से ऐसी परेशानियां कम होंगी और यह स्पष्ट रहेगा कि गाड़ी की जिम्मेदारी किसकी है?

- इसी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में सरकार ने सड़क सेफ्टी से जुड़ा एक और बड़ा प्रस्ताव भी रखा है. इसके तहत 1 अक्टूबर 2028 से देश में बनने वाले नए L, M और N कैटेगरी के गाड़ियों में व्हीकल-टू-व्हीकल (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है. इस तकनीक की मदद से आपस में जरूरी जानकारी साझा कर सकेंगे, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है.
- ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नियम अभी लागू नहीं हुआ है. फिलहाल यह केवल एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन है. सरकार ने इस पर आम लोगों, कार डीलरों और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. सभी प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद ही इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया जाएगा और उसके बाद इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है.
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