FASTag Annual Pass ने रचा रिकॉर्ड, 1 करोड़ पार हुआ आंकड़ा
FASTag Annual Pass का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 1 करोड़ पार हो गई है. जानें 3,075 रुपये के इस एनुअल पास की कीमत, नियम, 200 ट्रिप्स की वैधता और अप्लाई करने का तरीका.

भारतीय सरकार हाईवे और एक्सप्रेसवे बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है. जबकि सरकार कार चालकों को इन सड़कों पर कोई दिक्कत न आए इसके लिए फास्टैग एनुअल पास का एक स्कीम लेकर आई थी. जो की बेहद सफल होता दिख रहा है. क्योंकि, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तजा डेटा के अनुसार, इस एनुअल पास को जारी किए जाने के बाद से अब तक 1 करोड़ से अधिक वाहन मालिक इसे अपना चुके हैं.
बता दें कि, एक साथ भुगतान करके साल भर या निश्चित ट्रिप्स के लिए टोल झंझट से मुक्ति देने वाली इस सुविधा ने भारतीय टोल संग्रह प्रणाली में एक मुकाम हासिल किया है. क्योंकि, देश भर के लगभग एक हजार से अधिक टोल प्लाजा पर लागू इस पास ने ड्राइवरों का समय, फ्यूल और बार-बार रीचार्ज करने की सिरदर्दी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. चलिए जानतें है इसका फायदा आम जनता को कैसे मिला है.
फास्टैग एनुअल पास के फायदे
जानकारी दें दे कि, फास्टैग एनुअल पास की कीमत 3,075 रुपये है. यह पास मुख्य रूप से निजी और गैर-व्यावसायिक चार पहिया वाहनों के लिए बनाया गया है. इस पास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 3,075 रुपये का एकमुश्त फीस चुकाने के बाद चालक को हर टोल प्लाजा पर अलग से बैलेंस कटने की चिंता नहीं रहती.
जबकि इसके अलावा बार-बार फास्टैग वॉलेट रीचार्ज करने की प्रक्रिया से राहत मिलने के साथ-साथ टोल प्लाजा पर लगने वाला समय भी काफी घट जाता है. नियमित रूप से हाईवे पर ट्रैवल करने वाले या हर महीने लंबी दूरी तय करने वाले निजी वाहन चालकों के लिए यह पास एक बेहद किफायती और सहूलियत भरा विकल्प साबित हो रहा है.

यह भी पढ़ें: नई Triber Turbo vs Ertiga vs Carens: कौन सी 7-सीटर ज्यादा दमदार?
1 साल या 200 ट्रिप्स का फॉर्मूला
बता दें कि, फास्टैग एनुअल पास के इस्तेमाल के लिए सरकार और नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने कुछ दिशानिर्देश भी तय किए हैं. यह एनुअल पास जारी होने की तारीख से 1 साल या फिर अधिकतम 200 टोल ट्रिप्स के लिए मान्य रहता है. यदि 1 साल से पहले ही 200 ट्रिप्स पूरी हो जाती हैं तो पास की वैधता समाप्त मान ली जाएगी और यूजर को नया पास रीचार्ज कराना होगा.
इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पास केवल राष्ट्रीय राजमार्गों और नेशनल एक्सप्रेसवे पर स्थित टोल प्लाजा पर ही लागू होता है. जबकि राज्यों के स्टेट राजमार्गों के टोल पर सामान्य फास्टैग वॉलेट से ही भुगतान होता है.

कैसे काम करता है एनुअल पास?
बता दें कि, इस पास को बनवाने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल और आसान बनाया गया है. यूजर को कोई नया फास्टैग टैग खरीदने की आवश्यकता नहीं होती बल्कि यह पास उनकी गाड़ी पर पहले से लगे एक्टिव फास्टैग से ही लिंक हो जाता है.
सबसे पहले आप सरकार के आधिकारिक राजमार्गयात्रा मोबाइल ऐप या NHAI की वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. प्रक्रिया के तहत वाहन संख्या दर्ज कर 3,075 रुपये का भुगतान यूपीआई, नेट बैंकिंग या क्रेडिट/डेबिट कार्ड से करना होता है. पेमेंट सफल होने के 2 घंटे के भीतर एनुअल पास एक्टिवेट हो जाता है और टोल पर स्कैनिंग के दौरान ही पास एक्सीम्प्शन दर्ज हो जाता है.
डिजिटल हाईवे ट्रांजिट की दिशा में बड़ा कदम
जानकारी दें दे कि, फास्टैग एनुअल पास की सफलता से यह साफ हो गया है कि भारतीय वाहन चालक अब कैशलेस और डिजिटल यात्रा को तेजी से अपना रहे हैं. 1 करोड़ से अधिक एक्टिव यूजर्स का यह आंकड़ा देश में लगातार सड़क यातायात और आधुनिक टोल प्रबंधन प्रणाली पर आम जनता के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.
बार-बार लाइन में लगने और रीचार्ज के पचड़े से आजादी मिलने के कारण आने वाले समय में एनुअल पास अपनाने वाले यूजर्स की संख्या में और भी बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. अगर आप भी अक्सर हाईवे पर सफर करते हैं तो यह एनुअल पास आपके समय और पैसों दोनों की बचत कर सकता है.
यह भी पढ़ें: Splendor से Upgrade करना है, इन 5 बाइक्स पर डालें नजर, माइलेज है शानदार





















