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एक EV में कितनी लगती है चांदी? ऑटो इंडस्ट्री में कई गुना मांग बढ़ी, जानें डिटेल्स
क्या आप जानते हैं एक कार बनाने में कितनी चांदी लगती है? EV में सबसे ज्यादा सिल्वर की खपत होती है. आइए ऑटो इंडस्ट्री में चांदी के इस्तेमाल और बढ़ती मांग के बारे में विस्तार से जानते हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
Source : social media
पिछले कुछ समय से चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. इसकी बड़ी वजह ये है कि अब चांदी सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका इंडस्ट्रियल इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. मोबाइल फोन, सोलर पैनल और अब कारों में भी चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है. खासतौर पर जब से गाड़ियां ज्यादा टेक्नोलॉजी से लैस हुई हैं और इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन बढ़ा है, तब से ऑटो इंडस्ट्री में चांदी की मांग कई गुना बढ़ गई है.
एक कार में कितनी लगती है चांदी?
- ब्रोकरेज फर्म एंजेल वन के अनुसार, लगभग हर कार में चांदी का इस्तेमाल होता है. एक पेट्रोल या डीजल कार में औसतन 15 से 20 ग्राम चांदी लगती है. हाइब्रिड कारों में यह मात्रा बढ़कर करीब 18 से 34 ग्राम तक पहुंच जाती है. वहीं, इलेक्ट्रिक कारों में सबसे ज्यादा चांदी की जरूरत होती है, जहां एक EV में लगभग 25 से 50 ग्राम तक चांदी का इस्तेमाल होता है. यानी पेट्रोल या डीजल कारों की तुलना में EV में 67 से 79 प्रतिशत ज्यादा चांदी लगती है.
कार के किन हिस्सों में होती है चांदी की जरूरत
- आज की मॉडर्न कारें पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर हो चुकी हैं. चांदी का इस्तेमाल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ABS और एयरबैग सिस्टम, ECU यानी इंजन कंट्रोल यूनिट, पावर विंडो, सेंट्रल लॉकिंग और सेंसर में किया जाता है. इलेक्ट्रिक कारों में तो बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, चार्जिंग सिस्टम और हाई-वोल्टेज कनेक्शन में चांदी अहम भूमिका निभाती है.
चांदी ही क्यों होती है पहली पसंद?
- कारों में चांदी का इस्तेमाल किसी लग्जरी वजह से नहीं, बल्कि इसकी तकनीकी खूबियों की वजह से होता है. चांदी बिजली की सबसे बेहतरीन Conductive metals में से एक है. यह बिना ज्यादा ऊर्जा नुकसान के करंट को तेजी से Flow करती है. इसी कारण कारों के इलेक्ट्रिक कॉन्टैक्ट, स्विच और सर्किट में चांदी का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि Signal तुरंत और सटीक तरीके से काम करे.
ऑटो इंडस्ट्री में चांदी की बढ़ती खपत
- ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग 2025 से 2031 के बीच हर साल औसतन 3.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. अनुमान है कि 2031 तक यह मांग करीब 3000 टन प्रति वर्ष तक पहुंच सकती है. फिलहाल पूरी दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री हर साल लगभग 1700 से 2500 टन चांदी का इस्तेमाल कर रही है और EV के बढ़ते चलन से यह आंकड़ा और बढ़ने वाला है. जैसे-जैसे कारें ज्यादा स्मार्ट और इलेक्ट्रिक होती जा रही हैं, वैसे-वैसे चांदी ऑटो इंडस्ट्री की रीढ़ बनती जा रही है. आने वाले समय में EVs चांदी की सबसे बड़ी खपत का कारण बन सकती हैं, जिससे सिल्वर मार्केट और ऑटो सेक्टर दोनों में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे.
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