कितने पंक्चर झेल सकता है एक टायर, कब आ जाती है बदलवाने की नौबत?
Punctures Damaging Tyres: टायर में अधिक पंक्चर भी बन सकते हैं बड़ा खतरा. इनसे भी जा सकती है जान. जानें इनको कब बदलवा देना चाहिए? आइए जानते हैं इसके बारे में.

Punctures Damaging Tyres: गाड़ी के टायरों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. अक्सर लोग सोचते हैं कि जब तक टायर चल रहा है, तब तक उसे बदलने की कोई जरूरत नहीं है. लेकिन एक टायर कितने पंक्चर झेल सकता है? कब टायर को बदल देना ही समझदारी है? आइए इसे आसानी से समझते हैं.
एक टायर में कितने पंक्चर लग सकते हैं?
आम तौर पर एक अच्छे टायर में 3 से 4 बार पंक्चर लगवाया जा सकता है. लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें होती हैं. सभी पंक्चर टायर के बीच वाले हिस्से पर होने चाहिए. अगर टायर के साइड में छेद हो जाए, तो उसे ठीक नहीं करना चाहिए. साइड का पंक्चर बहुत खतरनाक होता है.
दो पंक्चर के बीच कितनी दूरी होनी चाहिए?
अगर आपके टायर में एक से ज्यादा पंक्चर हैं, तो उनके बीच की दूरी कम से कम 16 इंच यानी लगभग 40 सेंटीमीटर होनी चाहिए. अगर दो पंक्चर बहुत पास-पास हैं, तो वह हिस्सा कमजोर हो जाता है. ऐसे में तेज रफ्तार में गाड़ी चलाते समय टायर फटने का डर रहता है.
कब समझें कि टायर बदलने का समय आ गया है?
टायर की भी एक उम्र होती है. भले ही टायर में कोई पंक्चर न हो, फिर भी 5 से 6 साल बाद उसे बदल देना चाहिए. टायर का रबर समय के साथ सख्त हो जाता है. इससे सड़क पर गाड़ी की पकड़ कमजोर हो जाती है.
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ये 4 लक्षण दिखें तो तुरंत बदलें टायर
- ट्रेड की गहराई कम होना: टायर के ऊपर जो डिजाइन या गोटियां होती हैं, अगर वे घिसकर बिल्कुल समतल हो जाएं, तो टायर तुरंत बदलें.
- टायर में उभार: अगर टायर का कोई हिस्सा फूल गया है या उसमें गांठ जैसी दिख रही है, तो वह कभी भी ब्लास्ट हो सकता है.
- साइड में दरारें पड़ना: टायर के किनारे अगर छोटे-छोटे क्रैक्स दिखने लगें, तो समझें रबर खराब हो चुका है.
- बार-बार हवा कम होना: अगर बिना पंक्चर के भी हर दो-तीन दिन में टायर की हवा कम हो रही है, तो टायर बदलवा लें.
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