कार खरीद रहे हैं? इन 5 खर्चों से बढ़ सकता है बजट
अगर आप पहली बार कार खरीद रहे हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि नई कार की कीमत सिर्फ एक्स-शोरूम रेट तक सीमित नहीं होती. बल्कि बीमा और एक्सेसरीज जैसे खर्च आपका बजट बढ़ा देते हैं.

नई कार खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए किसी सपने से कम नहीं होता. आमतौर पर लोग कार खरीदने से पहले मॉडल, वेरिएंट, फीचर्स और एक्स-शोरूम कीमत पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं. लेकिन जब डीलर के पास जाकर पूरी कीमत का कोटेशन सामने आता है तो कीमत उम्मीद से काफी ज्यादा हो जाती है. इसकी वजह रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स, इंश्योरेंस और दूसरी चीजों से जुड़ी लागत होती है.
ऐसे में सिर्फ कार की शुरुआती कीमत देखकर बजट तय करना सही तरीका नहीं है. खरीदारी से पहले उन खर्चों को समझना जरूरी है जो अक्सर बातचीत के दौरान बाद में सामने आते हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 खर्चों के बारे में, जिन्हें कार खरीदते समय जरूर जांचना चाहिए.
इंश्योरेंस को सिर्फ एक जरूरी खर्च न समझें
कार खरीदते समय इंश्योरेंस की कीमत ऑन-रोड कीमत का अहम हिस्सा होती है. थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस कानूनी रूप से जरूरी है, जबकि अपनी कार को नुकसान से बचाने के लिए कॉम्प्रिहेंसिव कवरेज लिया जा सकता है. लेकिन सिर्फ सबसे कम प्रीमियम वाली पॉलिसी चुनना हमेशा सही नहीं होता. IDV, डिडक्टिबल, क्लैम सपोर्ट और कैशलेस गैराज जैसी चीजों को भी देखना चाहिए.
इंश्योरेंस ऐड-ऑन से बढ़ सकता है प्रीमियम
नई कार के साथ इंश्योरेंस में कई अतिरिक्त कवरेज दिए जाते हैं. जीरो डेप्रिसिएशन, इंजन प्रोटेक्शन, रिटर्न-टू-इनवॉइस, रोडसाइड असिस्टेंस और कंज्यूमेबल्स कवर इनमें शामिल हो सकते हैं. हर ग्राहक के लिए सभी ऐड-ऑन जरूरी नहीं होते. जैसे जिस शहर में जलभराव का जोखिम ज्यादा है, वहां इंजन प्रोटेक्शन उपयोगी हो सकता है. वहीं नई या महंगी कार के लिए कुछ दूसरे कवरेज पर भी विचार किया जा सकता है. इसलिए ऐड-ऑन को सिर्फ इसलिए न लें क्योंकि वे पैकेज में दिए जा रहे हैं.
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एक्सेसरीज का बिल भी बढ़ा देता है खर्च
फ्लोर मैट, सीट कवर, डैश कैमरा, इन्फोटेनमेंट अपग्रेड और दूसरी एक्सेसरीज कार की कीमत के ऊपर अतिरिक्त खर्च जोड़ सकती हैं. डीलर की ओर से दिए गए एक्सेसरीज पैकेज को कार खरीदने का अनिवार्य हिस्सा मान लेना जरूरी नहीं है. खरीदार को हर एक्सेसरी की अलग कीमत मांगनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि असल में किस चीज की जरूरत है. बाजार में उसी सामान की कीमत की तुलना करने से भी पता चल सकता है कि डीलर का पैकेज कितना उचित है.
वारंटी और इंश्योरेंस एक जैसी चीजें नहीं
पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहकों में अक्सर वारंटी और इंश्योरेंस को लेकर कंफ्यूजन रहता है. दोनों का मतलब अलग है. वारंटी आमतौर पर कंपनी द्वारा तय शर्तों के तहत निर्माण या कुछ निर्धारित कंपोनेंट-रिलेटेड डिफेक्ट्स को कवर करती है. वहीं मोटर इंश्योरेंस दुर्घटना, चोरी, प्राकृतिक आपदा और थर्ड-पार्टी लायबिलिटी जैसे जोखिमों से सुरक्षा देता है.
सस्ता इंश्योरेंस हमेशा फायदेमंद नहीं
इंश्योरेंस लेते समय केवल प्रीमियम देखकर फैसला करना बाद में महंगा पड़ सकता है. कम प्रीमियम वाली पॉलिसी में IDV कम हो सकती है और हो सकता है या कुछ जरूरी सुविधाएं शामिल न हों.
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