अपनी CNG कार या शेयरिंग कैब, ऑफिस आने-जाने के लिए क्या सस्ता?
ऑफिस आने-जाने के लिए सीएनजी कार और शेयरिंग कैब में से क्या है सस्ता? जानें खर्च, सुविधा और सही विकल्प की पूरी तुलना.

बड़े शहरों में लाखों लोग रोजाना ऑफिस जाते हैं और इस दौरान उनका काफी पैसा खर्च होता है. जिसके चलते आज हम तुलना करेंगे कि डेली ऑफिस जाने के लिए अपनी CNG कार या शेयरिंग कैब क्या ज्यादा सस्ती पड़ेगी. बता दें कि आज के समय में जब पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं तब लोगों के सामने आने-जाने के लिए सही और किफायती साधन चुनना बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है.
एक तरफ जहां अपनी गाड़ी होने का अलग ही आराम और सुकून मिलता है. वहीं दूसरी तरफ कैब या पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने से ड्राइविंग का झंझट खत्म हो जाता है. चलिए इस खबर में जानतें हैं कि आखिरकार सस्ता क्या पड़ने वाला है.
क्या रहता है रनिंग कॉस्ट?
बता दें कि अपनी सीएनजी कार और शेयरिंग कैब के बीच सबसे बड़ा फर्क खर्च का होता है. अगर आपके पास खुद की सीएनजी कार है तो फ्यूल का खर्च बहुत कम आता है. आज के समय में सीएनजी का माइलेज लगभग 25 से 30 किलोमीटर प्रति किलोग्राम तक मिल जाता है. जिससे प्रति किलोमीटर की रनिंग कॉस्ट सिर्फ 3 से 3.50 रुपये के आसपास पड़ती है.
वहीं अगर आपकी ऑफिस की दूरी ज्यादा है और आप डेली हर दिन उप डाउन करते हैं तो सीएनजी कार का फ्यूल खर्च बहुत ज्यादा भारी नहीं पड़ता है. जबकि इसके मुकाबले शेयरिंग कैब में आपको हर दिन के हिसाब से काफी ज्यादा किराया देना पड़ता है. भले ही शेयरिंग कैब सोलो कैब से थोड़ी सस्ती होती है. लेकिन महीने भर का कुल हिसाब लगाने पर इसका किराया सीएनजी के मुकाबले काफी ज्यादा बैठता है.

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मेंटेनेंस का रहता है झंझट
जानकारी दें दे कि कार खरीदने और चलाने में केवल सीएनजी का खर्चा ही शामिल नहीं होता है. बल्कि इसके साथ कई अन्य खर्चे भी जुड़े होते हैं. आपको अपनी गाड़ी के लिए हर महीने बैंक की ईएमआई, बीमा, सर्विसिंग और पार्किंग के पैसे चुकाने होते हैं. अगर आप रोजाना बहुत कम दूरी तय करते हैं तो ये सारे फिक्स्ड खर्चे मिलकर सीएनजी कार को काफी महंगा सौदा बना देते हैं.
वहीं शेयरिंग कैब का इस्तेमाल करने पर आपको गाड़ी की किस्त चुकाने, उसके खराब होने पर मेंटेनेंस कराने या समय पर सर्विस करवाने की कोई टेंशन नहीं रहती है. आपको गाड़ी की किसी भी तरह की कागजी कार्रवाई की चिंता करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ती है.

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समय की होती है बचत
ऑफिस जाते समय टाइम पर पहुंचना एक बहुत बड़ा टास्क होता है. जिसके चलते अपनी सीएनजी कार में आपको पूरा नियंत्रण मिलता है और आप अपनी मर्जी के मालिक होते हैं. जब आपका मन करे आप घर से निकल सकते हैं और रास्ते में किसी के लिए रुकने या इंतजार करने की कोई मजबूरी नहीं होती है. लेकिन सीएनजी पंप पर लंबी लाइनें लगना और कई बार गैस खत्म होने की समस्या थोड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है.
वहीं दूसरी तरफ शेयरिंग कैब में कई बार ड्राइवर के रूट बदलने या रास्ते में दूसरे पैसेंजर्स को पिक और ड्रॉप करने के चक्कर में काफी समय बर्बाद हो जाता है. इस वजह से कई बार ऑफिस पहुंचने में देरी हो जाती है और रोज-रोज का यह सफर थकान भरा लगने लगता है.
कौन सा ऑप्शन है बेस्ट?
यदि आपके घर से ऑफिस की दूरी काफी ज्यादा है और आप रोज कम से कम 35 से 40 किलोमीटर या उससे अधिक का सफर तय करते हैं. तो अपनी सीएनजी कार रखना सबसे ज्यादा सस्ता और फायदेमंद रहेगा. क्योंकि कुछ ही महीनों या सालों में कार की शुरुआती लागत वसूल हो जाती है और रोज का खर्च बहुत कम हो जाता है.
जबकि इसके उलट अगर आपकी ऑफिस की दूरी बहुत कम है या आप कार चलाने के झंझट से पूरी तरह दूर रहना चाहते हैं तो शेयरिंग कैब का विकल्प आपके लिए ज्यादा बेहतर और सुविधाजनक साबित हो सकता है.
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