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Vikram Samvat 2083: 19 मार्च से ब्रह्मांड की सत्ता में होगा फेरबदल! रौद्र संवत्सर लाएगा तबाही? जानें भारत पर प्रभाव, ग्रहण और राशियों का हाल

Raudra Samvatsara: 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 का शुभारंभ होगा. गुरु राजा और मंगल मंत्री बनेंगे. यह वर्ष बदलाव, संघर्ष और आध्यात्मिक उन्नति लेकर आएगा. कृषि, व्यापार व तकनीक में नए अवसर बनेंगे,

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हिंदू धर्म में नव वर्ष का आरंभ विक्रम संवत के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है. इस वर्ष 19 मार्च 2026 से नव विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी. इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होगा. नव संवत्सर 2083 को ‘रौद्र संवत्सर’ कहा जाएगा.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर-जोधपुर के निदेशक, ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार, 19 मार्च से ब्रह्मांडीय सत्ता और ग्रहों के मंत्रिमंडल में बड़ा परिवर्तन होगा. इस नव संवत्सर में देवगुरु बृहस्पति को राजा की गद्दी प्राप्त होगी. चंद्रमा को तीन मंत्रालय सौंपे जाएंगे, जबकि मंगल मंत्री के रूप में कार्य करेंगे. सूर्य और शुक्र को इस बार कोई मंत्रालय नहीं मिलेगा.

बृहस्पति को वित्त, कृषि और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलने से नए व्यापारिक मार्ग खुलेंगे. समय पर वर्षा होने से फसल अच्छी रहेगी, हालांकि साइबर ठगी के तरीकों में बदलाव देखने को मिलेगा.

19 मार्च से शुरू होगा विक्रम संवत 2083

डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में हिंदू नववर्ष 19 मार्च, गुरुवार से प्रारंभ होगा. इसी दिन गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्रि भी शुरू होंगी, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव ‘राम नवमी’ तक चलेंगी. नए संवत्सर की शुरुआत के साथ ही ग्रहों की सत्ता में व्यापक परिवर्तन होंगे, जिनका प्रभाव मानव जीवन और प्रकृति पर पड़ेगा.

इस वर्ष गुरु, राहु और केतु का राशि परिवर्तन होगा. साथ ही सूर्य, बुध, शुक्र, मंगल और चंद्रमा भी अपने-अपने समय पर राशि बदलेंगे.

वर्ष की शुरुआत में:

  • सूर्य धनु राशि में
  • बृहस्पति मिथुन में
  • शनि मीन में
  • राहु कुंभ में
  • केतु सिंह में
  • मंगल, बुध और शुक्र भी धनु राशि में रहेंगे

बृहस्पति 2 जून 2026 को मिथुन से निकलकर कर्क में प्रवेश करेंगे और 31 अक्टूबर को सिंह राशि में जाएंगे. राहु 5 दिसंबर को मकर और केतु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे.


रौद्र संवत्सर:  भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 19 मार्च 2026 से रौद्र नाम संवत्सर प्रारंभ होगा. यानी विक्रम संवत 2083 से प्रारंभ होगा रौद्र संवत्सर. यह देश और दुनिया में नरसंहार लेकर आएगा. मध्य एशिया में नरसंहार जारी है और अब यह दक्षिण एशिया में भी देखा जाएगा. इस दौरान मौसम में भारी बदलाव होगा और किसी बड़े भूकंप के आने या ज्वालामुखी फटने के संकेत भी मिलते हैं.

रौद्र संवत्सर मंत्रिमंडल 

  • राजा गुरु
  • मंत्री मंगल 
  • कृषिमंत्री (सश्येष) गुरु
  • खाद्य मंत्री (धान्येश) बुध
  • जलदाय मंत्री (मेघेश) चंद्रमा
  • उद्योग व खनिज मंत्री (रसेश) शनि
  • पेट्रोलियम मंत्री (नीरसेश) गुरु
  • वन व पर्यावरण मंत्री (फलेश) चंद्रमा
  • वित्तमंत्री(धनेश) गुरु
  • गृहमंत्री (दुर्गेश) चंद्रमा


भारत पर प्रभाव

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहों की स्थिति और संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल के प्रभाव से भारत में विभिन्न घटनाएं घटित होंगी. भारत की राजनीति में बडे़ परिवर्तन देखने को मिलेंगे. भारत में पाकिस्तानी आतंकवादी हमला होने की संभावना प्रबल है.

पंजाब, बंगाल, कश्मीर, ओड़िसा और पूर्वोत्तर राज्य में समस्या उत्पन्न हो सकती है. भारत में जन आंदोलन हो सकता है जो भारत की राजनीति को अस्थिर करेगा.किसी घटना-दुर्घटना बड़ी जनहानि होने की संभावना है. भारत की सीमाओं पर तनाव बढ़ जाएगा. भारत में प्रदूषण अपने चरम पर होगा, मौसम और हवाओं से लोग परेशान रहेंगे.

कृतिक आपदाएं  भूकंप, बाढ़,जल प्रलय की घटनाएं बढ़ जाएगी. इस साल भारत किसी बड़ी खोज या नई तकनीक से दुनिया का ध्यान खींच सकता है.  गुरु और मंगल का संयोग कुछ विशेष परिवर्तनकारी घटनाओं का रहेगा,साथ ही गुरु की अतिचारी गति भी बहुत प्रभावित करेगी.

ज्योतिष शास्त्र में इस तरह का संयोग असामान्य परिस्थितियों और तीव्र घटनाक्रमों का घातक माना जाता है. इस वर्ष प्रकृति में भी असाधारण हलचल देखने को मिल सकती हैं प्राकृतिक घटनाएं, मौसम में उतार-चढ़ाव और वातावरण में बदलाव लोगों को प्रभावित करेंगे. उन्होंने बताया कि इस वर्ष साइबर अपराधों में वृद्धि होने की संभावना है.

सतर्कता और आध्यात्मिक उन्नति का वर्ष

डॉ. व्यास के अनुसार, तकनीक के बढ़ते उपयोग के कारण डिजिटल सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होगी. इसके साथ-साथ धर्म और आध्यात्मिकता की ओर लोगों का झुकाव बढ़ेगा. पूजा-पाठ और साधना करने वालों के लिए यह वर्ष विशेष फलदायी रहेगा.

कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों को अच्छे परिणाम मिलेंगे. हालांकि भीषण गर्मी और मौसम की चरम स्थितियाँ परेशानी बढ़ा सकती हैं.


दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि साल 2026 में भी चार ग्रहण देखने को मिलेंगे.  इनमें से दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे. वर्ष 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण लगने वाले हैं. साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा. यह एक कंकण सूर्य ग्रहण होगा.

साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को लगेगा. श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा. साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार 3 मार्च 2026 को लगेगा. यह खण्डग्रास चंद्र ग्रहण होगा. साल का दूसरा चंद्र ग्रहण शुक्रवार 28 अगस्त 2026 को लगेगा. यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा. 


सफलता और चुनौतियों का मिश्रण
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि राजा बृहस्पति होने के कारण देश मंर आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अकल्पनीय प्रगति होगी. विशेषकर कृषि और उत्पादन सेक्टर में रिकॉर्ड सफलता मिलने के योग हैं.

हालांकि, मंगल के मंत्री होने से समाज में उग्रता, विवाद और रक्त संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. न्याय के देवता शनि की दृष्टि के कारण खनिज और तेल क्षेत्रों में कुछ प्रतिकूल प्रभाव दिख सकते हैं.

आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि चंद्रमा की स्थिति एक सफल मानसून की ओर संकेत कर रही है, लेकिन बुध के प्रभाव से महंगाई में तेजी आ सकती है. सोना और चांदी (स्वर्ण-रजत) की कीमतों में भारी उछाल और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. सरकारी राजकोष में वृद्धि होगी, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

राशियों के लिए शुभ 
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू नव वर्ष चार राशियों के लिए बेहद शुभ साबित हो सकता है. इस साल में गुरु और मंगल के प्रभाव के चलते मेष, वृश्चिक, धनु और मीन वालों को अनुकूल परिणाम मिलेंगे.

इन राशियों को करियर के क्षेत्र में उन्नति मिलेगा और धन लाभ के भी योग बनेंगे. रोजगार के नए साधन इनको मिल सकता है. पदोन्नति और समाजिक स्तर पर आपका मान-सम्मान बढ़ने की भी संभावना है. राजनीति के क्षेत्र में हैं तो आपके शुभचिंतकों की संख्या बढ़ेगी. पारिवारिक जीवन भी सुखमय रहे.

करें पूजा-पाठ और दान
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि ग्रहों के अशुभ असर से बचने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए. हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें. भगवान शिव और माता दुर्गा की आराधना करनी चाहिए. महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक 'डॉक्टर अनीष व्यास' देश के जाने-माने प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य हैं. पाल बालाजी के भक्त के रूप में इन्हें जाना जाता है. वैदिक ज्योतिष पर इनका कार्य सराहनीय है. इनकी भविष्यवाणियां काफी सटीक होती हैं. इनके लेख विभिन्न मंचों पर प्रकाशित होते रहते हैं, इन्हें भविष्यफल और दैनिक राशिफल बताने में महारत प्राप्त है. इन्हें हस्तरेखा और वास्तु विशेषज्ञ के रूप में भी जाना जाता है. देश के अलावा विदेशों में भी उनके काफी संख्या में फॉलोअर्स है. सोशल मीडिया पर भी यह एक्टिव रहते हैं.  इनकी अब तक 497 से अधिक भविष्यवाणियां सच साबित हो चुकी हैं.डॉक्टर अनीष व्यास को बचपन से ही कर्मकांड और ज्योतिष की शिक्षा-दीक्षा विरासत में प्राप्त हुई. एम.ए. पत्रकारिता में गोल्ड मेडल प्राप्त कर पीएचडी की उपाधि हासिल कर चुके हैं. डॉ. अनीष व्यास के ज्योतिष विषय पर आधारित लेख देश के प्रमुख समाचार पत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होते हैं. इसके साथ ही विभिन्न न्यूज चैनल में लाईव शो में प्रतिभाग करते रहते हैं.
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Frequently Asked Questions

2026 में कितने सूर्य और चंद्र ग्रहण होंगे?

वर्ष 2026 में चार ग्रहण होंगे, जिनमें दो सूर्य ग्रहण (17 फरवरी और 12 अगस्त) और दो चंद्र ग्रहण (3 मार्च और 28 अगस्त) शामिल हैं.

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