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Shani Sade Sati: क्या सच में शनि की साढ़ेसाती बर्बाद कर देती है? ये 5 उदाहरण देखें

Shani Sadesati: कर्मप्रधान देवता शनि 'जो बोओगे वही काटोगे' की ट्रेजडी पर काम करते हैं. यानी जैसा कर्म करोगे वैसा फल भी मिलेगा. साढ़ेसाती को लेकर लोगों के बीच यह धारणा है कि इस समय शनि कष्ट देते हैं.

Shani Sadesati: शनि महाराज कर्मप्रधान और न्यायाधीश कहलाते हैं, जोकि बिना भेदभाव किए हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार शुभ फल देते हैं और दंडित भी करते हैं. शनि ऐसे देवता हैं, जिनकी कृपा पाने के लिए आपको व्रत-उपवास, फल-फूल और भोग आदि अर्पित करने से अधिक अपने कर्मों को सुधारने की जरूरत है.

जो लोग अच्छे कर्म करते हैं, दूसरों की मदद करते हैं, नेकी के काम करते हैं, सच्चे इंसान को धोखा नहीं देते, महिलाओं और मजदूरों का सम्मान करते हैं उनके साथ शनि देव ढाल की तरह खड़े रहते हैं और मुश्किल परिस्थिति से भी उनको निकाल देते हैं. लेकिन बात जब शनि साढ़ेसाती की आती है, तो इसका नाम सुनते ही लोग डर जाते हैं.

ज्योतिष शास्त्र में शनि साढ़ेसाती की अवधि को कठिन समय माना जाता है. कुछ लोग तो यह भी मानते हैं कि साढ़ेसाती के समय हंसता-खेलता जीवन बर्बाद हो जाता है. दरअसल साढ़ेसाती ऐसा समय होता है, जब शनि देव आपकी परीक्षा लेते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि साढ़ेसाती के दौरान जीवन बर्बाद हो जाता है. लेकिन हां इस समय जीवन में कई बड़े बदलाव होते हैं, जिनमें अधिकर संघर्षपूर्ण होते हैं. आइए जानते हैं ऐसे वास्तविक उदाहरण के बारे में, जब जाने-माने प्रसिद्ध लोग साढ़ेसाती के चरण से गुजरे और इस दौरान उनके जीवन में अच्छे-बुरे कई बदलाव हुए.

शनि की साढ़ेसाती ने इन लोगों के करियर को किया रीबूट (Shani sadesati real stories)

इंदिरा गांधी (Indira Gandhi): इंदिरा गांधी पर साढ़ेसाती का प्रभाव 1975 से 1982 तक रहा. यह वही समय था जब देश में आपातकाल लगा और इसका असर चुनाव पर पड़ा. इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं. लेकिन फिर से वापसी की और प्रधानमंत्री बनीं. यह इस बात को दर्शाता है कि शनि की साढ़ेसाती का समय उतार-चढ़ान से भरा होता है.

अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan): सदी के महानायक कहे जाने वाले अभिनेता अमिताभ बच्चन की राशि में 1982-1991 तक साढ़ेसाती का चरण रहा. इस दौरान उनके साथ कई अप्रिय घटनाएं घटी लेकिन अच्छे बदलाव भी आएं. यह ऐसा समय था जब अमिताभ बच्चन को राजनीति में असफलता मिली, ABCL कंपनी का दिवालियापन हो गया. लेकिन इसके बाद उनके करियर में अच्छी चीजें भी हुईं और वे सदी के महानायक बन गए. इसलिए शनि की साढ़ेसाती आपको सिर्फ गिराती नहीं बल्कि गिरकर उठना भी सिखाती है.

नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi): शनि की साढ़ेसाती हमेशा अशुभ फल नहीं देती और इसका सबसे अच्छा उदाहरण है प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी. नरेंद्र मोदी पर 2011-2018 तक साढ़ेसाती का चरण रहा. साढ़ेसाती के बीच में भी मोदी 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने. प्रधानमंत्री बनते ही उन्हें सत्ता और जिम्मेदारी मिली, जोकि शनि से जुड़ी है. इससे यह पता चलता है कि, जब व्यक्ति के कर्म अच्छे होते हैं तब शनि साढ़ेसाती के दौरान भी राजयोग मिलता है. इसलिए साढ़ेसाती से डरने के बजाय अपना अच्छा कर्म करते रहिए.

रतन टाटा (Ratan Tata): 2003-2011 के बीच रतन टाटा की कुडली में साढ़ेसाती चल रही थी. लेकिन साढ़ेसाती के दिनों में ही टाटा ग्रुप ने Jaguar और Land Rover जैसी कंपनियों का अधिग्रहण किया और कंपनी को वैश्विक पहचान हासिल हुई.

कपिल शर्मा (Kapil Sharma): मशहूर कॉमेडियन कपिल शर्मा पर 2017-2023 तक साढ़ेसाती का प्रभाव रहा. इस समय उनके करियर में कई उतार-चढ़ाव आए. उनका शो ‘द कपिल शर्मा शो’ बंद हो गया, वे विवाद में फंसे और मानसिक तनाव का सामना किया. लेकिन साढ़ेसाती के आखिरी चरण में धीरे-धीरे सब ठीक होने लगा. उन्होने नई शुरुआत की, शो में फिर से वापसी हुई और शो भी हिट हुई. इससे यह सीख मिलती है कि शनि अगर गिराते हैं और संभलने की ताकत भी देते हैं. इसलिए साढ़ेसाती सिर्फ सजा नहीं बल्कि सीख भी है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

पल्लवी कुमारी (Pallawi Kumari)

धर्म-ज्योतिष विशेषज्ञ | डिजिटल मीडिया पत्रकार | कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट
पल्लवी कुमारी एक कुशल डिजिटल पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें मीडिया उद्योग में 7 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC, नई दिल्ली) की पूर्व छात्रा पल्लवी, जटिल धार्मिक और ज्योतिषीय विषयों को शोध-आधारित, सरल और प्रभावी भाषा में प्रस्तुत करने में विशेषज्ञता रखती हैं.

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